मध्यप्रदेश में 19 पवित्र शहरों और गांवों में शराब दुकानों को एक अप्रैल से बंद किया जाएगा

भोपाल

मध्यप्रदेश में 19 पवित्र शहरों और गांवों में शराब दुकानों को एक अप्रैल से बंद किया जाएगा। उनसे होने वाली आय की भरपाई के लिए सरकार संबंधित जिले की बाकी दुकानों में 25 फीसदी तक की वृद्धि करेगी।

रेस्तरांं में ओपन एरिया में बिकने वाली शराब के लिए भी फ्लोर एरिया बढ़ाने की सहमति दी गई है। विभाग ने कमर्शियल आयोजनों के लिए भी व्यक्तियों की संख्या के आधार पर लाइसेंस फीस तय की है।

ई-बैंक गारंटी की वैधता 30 अप्रैल 2026 तक

एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति में शराब दुकानों के लिए लाइसेंस लेने वाले ठेकेदारों को बैंक गारंटी सिर्फ ई-बैंक गारंटी के रूप में ही मिलेगी। इसके माध्यम से ही शराब दुकानों का आवंटन किया जा सकेगा।

ई-बैंक गारंटी की वैधता अवधि कम से कम 30 अप्रैल 2026 तक होगी। इसके लिए एफडी स्वीकार नहीं की जाएगी और पहले से जमा एफडी का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। जो ई-बैंक गारंटी दी जाएगी उसका कहीं और प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।

नई आबकारी नीति जारी करते हए आबकारी विभाग ने कहा है कि ई-बैंक गारंटी को लेकर ठेकेदार से प्रमाणित दस्तावेज भी लिए जाएंगे कि ई-बैंक गारंटी पर पहला हक उस ठेके के लिए होगा जो ठेकेदार को मिलेगा। यह बैंक गारंटी सिर्फ साइबर ट्रेजरी के माध्यम से जमा ई चालान या स्वीकार्य बैंकों की ई-गारंटी के रूप में मंजूर की जाएगी।

पवित्र शहरों और गांवों के लिए भी बताए प्रावधान

आबकारी नीति में प्रदेश के पवित्र शहरों और गांवों की शराब दुकानों को बंद किए जाने के बाद सरकार ने उसकी भरपाई के लिए विकल्प तैयार किए हैं। इसमें कहा है कि अगर किसी शराब दुकान का वार्षिक मूल्य 500 करोड़ रुपए है और इनमें से बंद की जाने वाली शराब दुकानों का वर्ष 2024-25 का वार्षिक मूल्य 100 करोड़ रुपए है तो ऐसी स्थिति में शेष वार्षिक मूल्य 400 करोड़ रुपए की शराब दुकानों के रिजर्व मूल्य की गणना नए फॉर्मूले के आधार पर की जाएगी।

फॉर्मूले में कहा है कि बंद की जाने वाली दुकान के वर्ष 2024-25 के कुल वार्षिक मूल्य का जिले की शेष शराब दुकानों के इसी वर्ष के कुल वार्षिक मूल्य का प्रतिशत निकाला जाएगा जो 25 प्रतिशत होगा। विभाग ने इसे उदाहरण के साथ समझाते हुए कहा है कि अगर किसी दुकान का वर्ष 2024-25 में वार्षिक मूल्य 10 करोड़ रुपए है तो वर्ष 2024-25 के वार्षिक आधार मूल्य में 20 प्रतिशत वृद्धि कर उसका अंतरिम रिजर्व मूल्य निकाला जाएगा, जो 14.50 करोड़ रुपए होगा।

दुकानों को कहीं शिफ्ट भी नहीं किया जाएगा

नई आबकारी नीति में कहा है कि 13 नगरीय निकायों और 6 ग्राम पंचायतों में एक अप्रैल से शराब दुकानों का संचालन नहीं किया जाएगा। यहां किसी भी प्रकार के बार और वाइन आउटलेट के लाइसेंस एक अप्रैल 2025 से नहीं दिए जाएंगे। इनके संचालन की भी अनुमति नहीं होगी। यहां की दुकानों को कहीं शिफ्ट भी नहीं किया जाएगा।

नीति में कहा है कि भौगोलिक एरिया के आधार पर अधिकतम चार शराब दुकानों को मिलाकर आवश्यकता के आधार पर एकल समूह बनाया जा सकेगा लेकिन इससे अधिक दुकानों के समूह के मामले में आबकारी आयुक्त ही फैसला करेंगे।

नीति में यह भी कहा है कि सभी शराब दुकानों पर पाइंट आफ सेल (POS) मशीनें लगाई जाएंगी और शराब की बोतल पर चस्पा एक्साइज एडहेसिव लेवल को स्कैन कर ही बिलिंग और बिक्री की जाएगी। ऐसा नहीं किए जाने पर पहली बार 25 हजार रुपए और इसके बाद हर जांच में पांच हजार रुपए प्रति केस पेनल्टी में वृद्धि की जाती रहेगी। यानी दूसरी बार तीस हजार, तीसरी बार पैंतीस हजार रुपए पेनल्टी लगाई जाएगी।

ओपन एरिया में शराब बांटने का दायरा बढ़ाया

अभी रेस्त्रां बार लाइसेंस को अपने डाइनिंग एरिया के अतिरिक्त अन्य फ्लोर और खुली छत पर भी संचालित कर सकते हैं। ऐसे एक्स्ट्रा फ्लोर के लिए 500 वर्गफीट का एरिया जरूरी होता है और हर फ्लोर के लिए 10 प्रतिशत अधिक लाइसेंस फीस देना होती है। नए वित्त वर्ष में यह पात्रता एक्स्ट्रा फ्लोर और खुली छत के सात रेस्त्रां के उसी फ्लोर पर खुले स्थान को भी शर्तों के साथ दी जा सकेगी। यह पात्रता रेस्त्रां बार के साथ लो एल्कोहलिक बेवरेज बार को भी होगी।

कमर्शियल आयोजनों के लिए लाइसेंस दिए जा सकेंगे

आबकारी विभाग ने कहा है कि कमर्शियल किस्म के आयोजनों के लिए प्रासंगिक लाइसेंस दिए जा सकेंगे जिसके लिए अलग लाइसेंस फीस होगी। इस दौरान शराब का उपयोग किया जा सकेगा। इसके लिए जो फीस तय की गई है उसके मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या के आधार पर लाइसेंस फीस वसूली जाएगी।

    500 व्यक्तियों के लिए 25 हजार लाइसेंस फीस होगी।
    एक हजार व्यक्तियों के लिए 50 हजार रुपए लाइसेंस फीस होगी।
    दो हजार व्यक्तियों के लिए 75 हजार रुपए लाइसेंस फीस होगी।
    5 हजार व्यक्तियों के लिए 1 लाख रुपए लाइसेंस फीस होगी।
    पांच हजार से अधिक व्यक्तियों के लिए दो लाख रुपए लाइसेंस फीस होगी।

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