देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में रंगपंचमी पर विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक गेर आज निकलेगी, 75 साल पहले मिसाइल से हुई थी शुरुआत

इंदौर
 रंगों के त्योहार को पूरे जोर-शोर से मनाने बनाने के लिए इंदौर नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली हैं. इस बार इंदौर की गेर में आकर्षक झांकियां भी देखने मिलेंगे जो टोरी कॉर्नर से शामिल होंगी. वहीं सबसे खास नजर रहेगी नगर निगम के हाथी पर जो 150 फीट की दूरी तक लोगों पर रंग फेंकेगा. आइए जानते इंदौर की गेर और नगर निगम के इस हाथी के बारे में.

20 फीट का हाथी बरसाएगा गेर में रंग

दरअसल, इंदौर नगर निगम की वर्कशॉप में वेस्ट मटेरियल और मशीनी पार्ट्स से 20 फीट का एक हाथी बनाया गया है. यह हाथी अपने सिर को चारों तरफ घूमाएगा और सूंड से लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंचाई तक रंगों की बौछार करेगा. सोमवार को इस हाथी को अंतिम रूप दिया गया है और इसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है. वहीं दूसरी गेर में एक मंच पर खड़ी चार स्वच्छता दीदी लोगों को रंगों से सराबोर करेंगी. इसके साथ ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी एमआईसी टीम के साथ लोगों पर रंग वर्षा करते नजर आएंगे.

मुख्यमंत्री और एनआरआई भी होंगे शामिल महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बताया कि गेर में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल होने आ रहे हैं। सभी व्यवस्था की जा चुकी है। महापौर ने बताया कि पिछले दो साल से नगर निगम भी आधिकारिक रूप से शामिल हो रहा है। इस बार नगर निगम की गेर रहेगी, एनआरआई का रथ भी रहेगा।

500 से ज्यादा सफाई मित्र रहेंगे तैनात गेर के बाद सफाई व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की जा चुकी है। 500 से ज्यादा कर्मचारी और संसाधन एक साथ लगकर रिकॉर्ड टाइम में पूरे गेर मार्ग को साफ करेंगे। इस बार के भी फोटो-वीडियो यूनेस्को को भेजे जाएंगे। भारत सरकार से भी निवेदन किया है कि यूनेस्को में पत्र भेजे और उनकी विजिट कराए।

गेर के लिए अब तक की तैयारियां

राजवाड़ा को ढंका गया इंदौर की विशेष पहचान राजवाड़ा को ढंकने का काम किया जा चुका है। बड़ा पीला प्लास्टिक राजवाड़ा पर लगा गया है ताकि रंगों के कारण इसे नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही गोराकुंड और सराफा क्षेत्र में बिल्डिंगों को बड़े प्लास्टिक से ढंका गया है। कई लोग भी अपने घरों को रंग-गुलाल से बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर कर रहे हैं।

इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाया पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गेर के पूरे रूट में 100 से 200 मीटर के सेक्टर बनाए जा रहे हैं, ताकि उसमें प्रभावी तरीके से सुरक्षा व्यवस्था की जा सके। साथ ही अन्य आकस्मिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाए जा रहे हैं। हाइराइज की व्यवस्था भी की जा रही है।

गेर वाली रूट पर सीसीटीवी, एंबुलेंस तमाम व्यवस्थाएं

आज 19 मार्च बुधवार को परम्परागत रूप से निकल जाने वाली रंगपंचमी की गेर को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं. पूरे मार्ग पर ‍निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, साथ ही कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. बेरिकेटिंग से लेकर आकस्मिक चिकित्सा के लिए भी प्रबंध किए गए हैं. निर्धारित स्थानों पर एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों की व्यवस्था भी रहेगी. इंदौर शहर की पहचान बन चुके इस त्योहार को देखन के लिए गेर वाले रूट पर नागरिकों के बैठने का भी प्रबंध किया गया है.

इंदौर नगर निगम द्वारा बनाया गया रंग फेंकने वाला हाथी

वहीं बिजली विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस विभाग की टीमों ने एकसाथ टोरी कार्नर, मल्हारगंज से लेकर राजबाड़ा, कृष्णपुरा तक के गेर मार्ग का निरीक्षण किया और तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया है.

सुरक्षा दृष्टि से बीच-बीच में बंद की जाएगी बिजली

गेर मार्ग पर केबल व तार पर्याप्त व सुरक्षात्मक हाइट पर किए गए हैं, वहीं कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर के पुराने, क्षतिग्रस्त बॉक्स बदले गए हैं. कई इलाकों में रंग व पानी से बचाव के लिए कवर लगाए गए हैं. वहीं सुभाष चौक जोन पर बिजली कंपनी का अस्थाई कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. ऐतिहासिक गेर के दौरान फायर फायटर से 100 से 150 फीट की ऊंचाई तक रंग उड़ाया जाएगा. इस दौरान सुरक्षात्मक कारणों से 11 केवी लाइन के कुल 14 फीडरों से अलग-अलग समय पर बिजली बंद की जाएगी.

आपात स्थिति के लिए तैयार है प्रशासन

कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि गेर को लेकर सभी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गेर मार्ग पर आइडेंटिफिकेशन किया गया है। कहां-कहां मंच लगाने हैं, कहां वॉच टावर बनेंगे, सीसीटीवी कैमरे लगाने की जगह भी निर्धारित की गई है। गलियों में बीच-बीच में एग्जिट रूट बनाए हैं। वहां एम्बुलेंस भी रहेगी, अगर कोई घटना हो जाती है तो उसके जरिए बाहर निकाला जा सकता है। कैबिनेट के आने की सूचना नहीं है, लेकिन हमारी पूरी तैयारी है।

बैलगाड़ी से हुई थी गेर की शुरुआत

गेर आयोजक कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि आज से 75 साल पहले उनके पिता प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, बाबूलाल गिरी और सत्यनारायण सत्तन साहब ने मिलकर इंदौर में गेर की शुरुआत की थी। बैलगाड़ी से शुरू हुआ गेमिसाइल, टैंकर, डीजे सहित मॉडर्न साधनों तक पहुंच चुका है। इस गेर की पहचान पूरे देशभर में है।

गेर आयोजक शेखर गिरी ने बताया कि गेर 48 और 50 के दशक में बाबूलाल गिरी और छोटे लाल गिरी ने निकाली थी। हमारी एक पीढ़ी गेर निकाल चुकी है। दूसरी पीढ़ी गेर का संचालन कर रही है। मेरे बाद भी मेरे भाई और भतीजे भविष्य में गेर को निकालेंगे।

गेर खेलने छतों की कराई जाती है बुकिंग

गेर में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली, डीजे, पानी के टैंकर और अन्य गाड़ियां शामिल होने लगी हैं। रंगपंचमी की गेर देखने के लिए लोग छतों पर बुकिंग कराने लगे हैं। पहले की अपेक्षा अब लाखों की संख्या में लोग इस गेर में शामिल होने लगे हैं। नगर निगम गेर में पिछले दो साल से आधिकारिक रूप से शामिल होने लगा है। इसमें अब एनआरआई भी शामिल होने के लिए आने लगे हैं।

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