फौजी अफसर की गर्लफ्रेंड से गैंगरेप, 5 दोषियों को उम्रकैद, महू की फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला; जाम गेट पर 6 महीने पहले हुई थी घटना

 महू

इंदौर जिले के महू क्षेत्र स्थित जाम गेट के पास सितंबर 2024 में हुए बहुचर्चित जाम गेट कांड में अदालत ने 5 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में सेना के ट्रेनी मेजर को बंधक बनाकर उनकी महिला मित्र के साथ लूटपाट, मारपीट और गैंगरेप की जघन्य घटना को अंजाम दिया गया था. फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के बाद महज पांच महीने में आए इस फैसले ने पीड़ितों को न्याय दिलाया है और समाज में कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

यह घटना पिछले साल 11 सितंबर को सुबह 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी और इसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं.

महू न्यायालय की विशेष लोक अभियोजक संध्या उइके ने पीटीआई को बताया कि चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रविशंकर दोहरे ने अनिल बारोड़ (27), पवन वसुनिया (23), रितेश भाभर (25), रोहित गिरवाल (23) और सचिन मकवाना (25) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

आरोपियों को सामूहिक बलात्कार पीड़िता को 50,000 रुपये और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है. छठे आरोपी, जो नाबालिग है, पर किशोर न्यायालय में मुकदमा चल रहा है.

मध्य प्रदेश के महू में सेना के दो प्रशिक्षु अधिकारियों और उनकी दो महिला मित्रों के साथ लूट, मारपीट और सामूहिक बलात्कार के मामले में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. घटना पिछले साल 11 सितंबर को महू-मंडलेश्वर रोड पर जाम गेट पर हुई थी.

    11 सितंबर को क्या हुआ था?

उइके ने कहा, "लूट, अपहरण और सामूहिक बलात्कार की घटना पिछले साल 11 सितंबर को 2 से 3 बजे के बीच महू-मंडलेश्वर रोड पर स्थित जाम गेट के पास हुई थी, जब इन्फैंट्री स्कूल, महू के दो प्रशिक्षु सेना अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ वहां गए थे." उइके ने कहा, "अचानक, छह लोगों ने पिस्तौल तान दी, उन पर हमला किया और लाठी से उनकी पिटाई की. उन्होंने 10 लाख रुपये मांगे और न देने पर जान से मारने की धमकी दी. उन्होंने उनके मोबाइल फोन और 800 रुपये लूट लिए.इसके बाद उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और महिला मित्र को रकम का इंतजाम करने के लिए इन्फैंट्री स्कूल जाने को कहा."

12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई अंतिम रिपोर्ट

उइके ने कहा कि उन्होंने एक प्रशिक्षु अधिकारी और एक महिला मित्र को बंधक बना लिया, जिसके साथ रितेश भाभर और अनिल बारोड़ ने सामूहिक बलात्कार किया. अगले दिन बड़गोंडा थाने में मामला दर्ज किया गया और मामले की अंतिम रिपोर्ट 12 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई. उइके ने बताया, "अभियोजन पक्ष की दलीलें 26 अक्टूबर को शुरू हुईं और बचाव पक्ष के गवाहों के बयान इस साल 20 मार्च को दर्ज किए गए. अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें 21 मार्च को समाप्त हुईं, जो मामला दर्ज होने की तारीख से ठीक पांच महीने और 12 दिन बाद था."

 अफसरों को बंधक बनाकर मांगे थे रुपये
पिछले साल 10 सितंबर को दो प्रशिक्षु सैन्य अधिकारी अपनी दो महिला मित्रों के साथ रात को जाम गेट तक गए थे। वे कार रोककर बातें कर रहे थे, तभी आरोपी हथियार लेकर उनके पास आए और दोनों सैन्य अफसरों के साथ मारपीट की। एक ट्रेनी आर्मी अफसर और उसकी गर्लफ्रेंड को आरोपियों ने छोड़ दिया और 10 लाख रुपये लेकर आने के लिए कहा। इस दौरान दूसरे अफसर और उसकी महिला मित्र को बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद अनिल और रितेश बंधक युवती को झाड़ियों में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दूसरे अफसर ने अपने कमांडेंट को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग गए थे।

बाद में पुलिस ने घटना में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने घटना के एक माह के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। पुलिस ने दुष्कर्म में शामिल अनिल और रितेश के कपड़े, मौके पर मिले उनके सिर के बाल आदि डीएनए सेंपल के लिए भेजे थे। युवती के सैंपल भी भेजे गए थे। रिपोर्ट में आरोपियों द्वारा युवती से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार भी जब्त किए थे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल और एएसपी रूपेश द्विवेदी घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच अलग-अलग टीमें बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की. शुरुआत में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, और बाद में विशेष अभियान चलाकर बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया गया. पुलिस ने डकैती, मारपीट, फिरौती और

सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया.
इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वासल ने उस समय कहा था, "हमें सूचना मिली कि आर्मी अफसर और उनके साथियों के साथ मारपीट और लूट की घटना हुई है. हमने तुरंत अपनी टीम भेजी और पांच नई टीमें बनाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया है."

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, 5 महीने में फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आर.एस. दोहरे की कोर्ट में करीब पांच महीने तक सुनवाई चली. अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने मजबूती से पैरवी की. पुलिस ने ठोस सबूत और दस्तावेज पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों—पवन, रोहित, अनिल, रितेश और सचिन (सभी मानपुर थाना क्षेत्र के निवासी)—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने साफ कहा कि यह सजा मरते दम तक जेल में रहने की होगी.

इसके अलावा, कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. गैंगरेप की शिकार युवती को 50 हजार रुपए और अन्य तीन पीड़ितों को 10-10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. मामले में एक नाबालिग आरोपी भी शामिल था, जिसका फैसला अभी लंबित है.

विशेष लोक अभियोजन अधिकारी का बयान
विशेष लोक अभियोजन अधिकारी संध्या उईके ने कहा, "यह एक जघन्य अपराध था, जिसमें सैन्य अधिकारियों और उनकी महिला मित्रों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है. यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ ही समाज में एक कड़ा संदेश देता है."

राहुल गांधी ने उठाया था मुद्दा
इस घटना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी हंगामा हुआ था. कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे. उन्होंने लिखा था, "मध्य प्रदेश में सैन्य अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं." इस मामले को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था.

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