भारतीय भाषाओं के संगम का केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश : मंत्री परमार

"अखिल भारतीय विश्वविद्यालय रोलर स्केट्स चैंपियनशिप 2024-25" हुई शुरू

भोपाल
हमारे पूर्वज खेलों का महत्व जानते थे। पुरातन काल से भारत, विविध खेल विधाओं एवं पारम्परिक खेलों से समृद्ध रहा है। सामाजिक परम्पराओं और प्रचलन में खेल का समावेश था। भारत का खेल क्षेत्र में अपना समृद्ध इतिहास रहा हैं। अतीत के विभिन्न कालखंडों में भारत ने, विश्व के विविध खेलों को भी भारतीयता के साथ समावेशित किया है। खेल के मैदान संस्कार और अनुशासन सिखाते हैं। खेल से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को भोपाल स्थित सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के तत्वावधान में आयोजित "अखिल भारतीय विश्वविद्यालय रोलर स्केट्स (पुरुष एवं महिला) चैंपियनशिप 2024-25" के शुभांरभ अवसर पर कही। मंत्री परमार ने देश भर से पधारे खिलाड़ियों, उनके मेंटर्स और रैफरी का राजा भोज की नगरी में अभिनंदन किया। मंत्री परमार ने कहा कि राजा भोज की नगरी भोपाल की अपनी अलग वैश्विक पहचान है। राजा भोज के शासन में विभिन्न मापदंडों की स्थापना हुई थी, यहां का श्रेष्ठ जल प्रबंधन उनकी दूरदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री परमार ने विभिन्न विधाओं की विविध विभूतियों को सम्मानित किया। साथ ही संस्थान परिसर में पौधरोपण भी किया।

मंत्री परमार ने कहा कि हमारा भारत, हमारे पूर्वजों के विचार "ज्ञानमेव शक्ति" के आधार पर विश्व में सर्वश्रेष्ठ था। भारत का "ज्ञानपुंज" विश्व में गुंजायमान था, इसलिए भारत "विश्वगुरु" की संज्ञा से सुशोभित था। भारत अपनी ज्ञान परम्परा के आधार पर विश्व मंच पर सिरमौर था। भारत के पुरातन ज्ञान को पुनः विश्व मंच पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टिकोण के साथ, प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए हमें हमारे पूर्वजों की गौरवशाली ज्ञान परम्परा पर गर्व का भाव जागृत कर, उनके बनाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति, जल स्त्रोतों एवं सूर्य सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण के भाव से, शोध एवं अनुसंधान के आधार पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज में परम्परा के रूप में स्थापित की, कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी संस्कृति और सभ्यता है। हमारे पूर्वज सूर्य उपासक थे, प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों की उपयोगिता और महत्व को जानते थे। मंत्री परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष@2047 तक भारत, सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में समर्थ देश बनेगा। साथ ही खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों का भरण पोषण करने में भी सामर्थ्यवान देश बनेगा। मंत्री परमार ने कहा कि "वसुधैव कुटुंबकम्" भारत की मूल भावना रही है। विश्व कल्याण हमारा ध्येय रहा है लेकिन वैश्विक आवश्यकतानुरूप शक्ति संचय भी आवश्यक है। वर्ष@ 2047 के विकसित एवं विश्व गुरु भारत की संकल्पना को साकार करने में हम सभी की सहभागिता आवश्यक है। मंत्री परमार ने कहा कि इसके लिए हमें अपने गौरवशाली अतीत को भारतीय दृष्टि से समझना होगा। हम सभी की सहभागिता से, अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमं च पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए हमें स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्व मंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा। अपनी गौरवशाली सभ्यता, भाषा, इतिहास और ज्ञान के आधार पर, भारत पुनः "विश्व गुरु भारत" बनेगा।

मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हमें हीन भावना से मुक्त होकर स्वाभिमान को जागृत करने का अवसर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के भावानुरूप अब भाषाएं देश के सभी प्रांतों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करेगी। मंत्री परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश ने भारत की सभी भाषाओं को सम्मान देने के लिए, नए प्रकल्प का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर विश्वविद्यालय में, अन्य राज्यों की भाषाओं को सिखाने के लिए कार्य योजना बना रहे हैं जिससे यहां के विद्यार्थी, अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के साथ उनकी भाषा में संवाद कर सकें। विद्यार्थियों को मूल्यांकन में भी इसके अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। मंत्री परमार ने कहा कि इस प्रकल्प से, देश के हृदय प्रदेश से भाषाओं के माध्यम से देश को जोड़ने का संदेश जाएगा। हमारा प्रदेश, भारतीय भाषाओं के संगम का केंद्र बनेगा। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश में विद्यार्थियों की संस्थानों में उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी और विद्यार्थियों के मूल्यांकन में क्रेडिट के रूप में उनकी उपस्थिति के अंक दिए जाएंगे। मंत्री परमार ने कहा कि हर विद्या-हर क्षेत्र में भारतीय ज्ञान विद्यमान है। यह भारतीय विचार और दर्शन न केवल पाठ्यक्रमों तक सीमित रहेगा, बल्कि भारत को पुनः विश्वगुरु, शक्तिशाली, सामर्थ्यवान और सर्वश्रेष्ठ बनाने में महती उपयोगिता सुनिश्चित करेगा।

सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. हरप्रीत सलूजा, कुलाधिपति श्रीमति प्रीति सलूजा, कार्यकारी निदेशक सुकोपल सलूजा, कुलगुरु एन.के. तिवारी एवं एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के पदाधिकारीगण सहित देश भर से पधारे प्रतिभागी खिलाड़ी, उनके मेंटर्स और प्रबंधक, विभिन्न रैफरी एवं कोच उपस्थित थे।

 

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