राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा- यह समय है कि प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाएं और इस पर चर्चा कराएं

नई दिल्ली
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने और एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस सत्र में यह संदेश दिया जाना चाहिए कि देश एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगा। सिब्बल ने सरकार से यह भी अनुरोध किया कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों को विभिन्न महत्वपूर्ण देशों में भेजा जाए, ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डाला जा सके।

विशेष सत्र बुलाने का आग्रह
कपिल सिब्बल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह समय है कि प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाएं और इस पर चर्चा कराएं। हम सभी को यह संदेश देना चाहिए कि देश एकजुट है और हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट खड़े हैं।" उन्होंने इस हमले को भारत की संप्रभुता पर हमला करार दिया और इसे लेकर संसद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करने की आवश्यकता जताई। सिब्बल का कहना था कि यह समय है जब पूरी दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि भारतीय संसद और नागरिक एक साथ हैं और इस प्रकार के हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की जरूरत
कपिल सिब्बल ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डालने के लिए प्रमुख देशों को भारत के साथ व्यापार न करने की चेतावनी देने की भी बात की। उन्होंने कहा, "भारत को पाकिस्तान के साथ व्यापार करने वाले सभी प्रमुख देशों को यह बताना चाहिए कि अगर वे पाकिस्तान के साथ व्यापार करते हैं तो हमारे साथ कारोबार नहीं करेंगे।" इस तरह से पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना का सुझाव उन्होंने प्रधानमंत्री से किया।

हमलों का सिलसिला और पाकिस्तान का कृत्य
सिब्बल ने 1972 से लेकर अब तक भारत पर हुए विभिन्न आतंकी हमलों का जिक्र किया, जिसमें संसद पर हमला (2001), कालूचक नरसंहार (2002), मुंबई में ट्रेन बम विस्फोट (2006), 2008 का मुंबई हमला, पठानकोट एयरबेस हमला (2016), उरी आतंकी हमला (2016) और पुलवामा आत्मघाती बम विस्फोट (2019) शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह सिलसिला लगातार चलता जा रहा है और पाकिस्तान ने हमेशा भारत को आतंकवाद के माध्यम से नुकसान पहुँचाया है।"
 
सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने का प्रस्ताव
कपिल सिब्बल ने यह भी सुझाव दिया कि संसद में एक सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए, जिसमें यह संदेश दिया जाए कि भारत एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के द्वारा दुनिया को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय सरकार और विपक्ष एक साथ खड़े हैं और इस प्रकार के कृत्यों को कभी सहन नहीं किया जाएगा।

सांसदों के प्रतिनिधिमंडल भेजने का सुझाव
कपिल सिब्बल ने कहा कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में भेजा जाना चाहिए, ताकि वहां पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डाला जा सके। उन्होंने कहा, "भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे को उठाने की जरूरत है और हमारे सांसदों को इन देशों में जाकर पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक अभियान चलाना चाहिए।"

समूहों के सहयोग से पाकिस्तान पर दबाव बनाने का आह्वान
सिब्बल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि यह समय है कि सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आतंकवाद को कभी भी शरण नहीं मिले।

 

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