बांग्लादेश पर भारत ने आर्थिक स्ट्राइक करते हुए आने वाले सामान पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली

पाकिस्तान की लंका लगाने के बाद अब भारत सरकार ने बांग्लादेश का बैंड बजाने की पूरी तैयारी कर ली है। भारत ने बांग्लादेश पर आर्थिक स्ट्राइक करते हुए आने वाले सामान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। पाकिस्तान और चीन परस्त मोहम्मद यूनुस सरकार के खिलाफ भारत ने कड़ा एक्शन लेते हुए  जमीनी रास्तों से रेडिमेड कपड़ों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे कुछ सामानों के आयात पर शनिवार को प्रतिबंध लगा दिए। सिर्फ न्हावा शेवा (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, नवी मुंबई) और कोलकाता समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से आयात की अनुमति होगी। भारत सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में बांग्लादेश की युनूस सरकार (Muhammad Yunus) को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

वाणिज्य मंत्रालय के तहत कार्यरत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। हालांकि, यह प्रतिबंध उन बांग्लादेशी सामानों पर लागू नहीं होगा जो भारत के रास्ते नेपाल और भूटान भेजे जाएंगे। इन परिवर्तनों के लिए देश की आयात नीति में एक नया पैराग्राफ जोड़ा गया है, जो बांग्लादेश से भारत में इन वस्तुओं के आयात को तत्काल प्रभाव से विनियमित करेगा। इससे पहले भारत ने बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा नौ अप्रैल को वापस ले ली थी।

अधिसूचना के अनुसार, बांग्लादेश से तैयार कपड़ों का इंपोर्ट अब केवल न्हावा शेवा और कोलकाता बंदरगाहों के माध्यम से ही किया जा सकेगा, न कि किसी भूमि बंदरगाह के माध्यम से। इसके अतिरिक्त, प्रोसेस्ड फूड, फल और फलों के स्वाद वाले या कार्बोनेटेड पेय, कपास और सूती धागे का वेस्ट, प्लास्टिक और PVC तैयार माल (पिगमेंट, डाई, प्लास्टिसाइज़र जैसे कच्चे इनपुट को छोड़कर) और लकड़ी के फर्नीचर सहित अन्य श्रेणियों के सामानों को भी विशिष्ट बंदरगाह प्रतिबंधों के अंतर्गत लाया गया है।

इन वस्तुओं को असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम में स्थित लैंड कस्टम्स स्टेशंस (LCS) या इंटीग्रेटिड चेक पोस्ट (ICP) के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में चंग्रबांधा और फुलबारी लैंड कस्टम्स स्टेशंस के माध्यम से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है। हालांकि, डीजीएफटी ने स्पष्ट किया कि ये बंदरगाह प्रतिबंध भारत से होकर नेपाल और भूटान जाने वाले बांग्लादेशी माल पर लागू नहीं होंगे। इसके अलावा, बांग्लादेश से मछली, एलपीजी, खाद्य तेल और कुचल पत्थर का आयात इन प्रतिबंधों से मुक्त रहेगा। यह घटनाक्रम पिछले महीने सरकार द्वारा ट्रांसशिपमेंट सुविधा को समाप्त करने के कदम के बाद हुआ है, जिसके तहत बांग्लादेश को बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पहुंच के लिए इंडियन लैंड पोर्ट का उपयोग करके तीसरे देशों को माल निर्यात करने की अनुमति दी गई थी।

नेपाल तथा भूटान को छोड़कर अन्य देशों को बांग्लादेश भारत के रास्ते सामानों का निर्यात नहीं कर सकता। बताया जा रहा है कि यह निर्णय बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस द्वारा हाल ही में चीन में दिए गए विवादास्पद बयान के संदर्भ में लिया गया है। चीन में युनूस ने कहा था कि भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य, जो बांग्लादेश के साथ लगभग 1,600 किमी की सीमा साझा करते हैं के पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है।

समुद्री रास्ते के लिए भारत के ये राज्य बांग्लादेश पर निर्भर हैं। युनूस ने यह भी कहा था कि बांग्लादेश इस क्षेत्र में हिंद महासागर का एकमात्र संरक्षक है। यूनुस ने चीन को बांग्लादेश के माध्यम से दुनियाभर में माल भेजने के लिए भी आमंत्रित किया था। युनूस के इस बड़बोलेपन को भारत ने बेहद गंभीरता से लिया।

बांग्लादेश के इस दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप भारत के भीतरी इलाकों से पूर्वोत्तर तक पहुंच बंद हो गई। बांग्लादेश के भूमि-बंदरगाह प्रतिबंधों के कारण, पूर्वोत्तर राज्यों को स्थानीय रूप से निर्मित वस्तुओं को बेचने के लिए बांग्लादेश के बाजार तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बाजार तक पहुंच केवल प्राथमिक कृषि वस्तुओं तक ही सीमित हो गई है। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश को पूरे पूर्वोत्तर बाजार तक खुली पहुंच हासिल है। इससे अस्वस्थ निर्भरता पैदा हो रही है तथा पूर्वोत्तर राज्यों में विनिर्माण क्षेत्र का विकास अवरुद्ध हो रहा है।

दरअसल भारतीय परिधान क्षेत्र ने पहले भी चिंता जताई थी और सरकार से व्यापार असंतुलन का हवाला देते हुए बांग्लादेश को दिए गए ऐसे ट्रांजिट विशेषाधिकारों को वापस लेने का आग्रह किया था। यह निर्णय बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस द्वारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर हाल ही में की गई टिप्पणियों का नतीजा बताया जा रहा है। यूनुस ने चीन में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कहा था कि भारत के पूर्वी हिस्से में सात भू-आबद्ध राज्य हैं, जिन्हें सात बहनें कहा जाता है और उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। हम समुद्र (बंगाल की खाड़ी) के संरक्षक हैं। उन्होंने चीन को दुनिया भर में इसके माध्यम से माल भेजने के लिए आमंत्रित भी किया था।

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