2025 आम महोत्सव 8.0 का मीडिया संवाद

भोपाल 
प्रश्न : नाबार्ड क्या है और इसकी स्थापना का क्या उद्देश्य था?
उत्तर : राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), जिसकी स्थापना 1982 में देश में कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए हुई थी।  
आज नाबार्ड ने देश के कृषि व ग्रामीण विकास में अपने अनूठे कार्यक्रमों के माध्यम से अलग पहचान बनाई है। इसमें एपीओ, एमईडीपी, एलईडीपी, वाटरशेड, वित्तीय साक्षरता, आदिवासी समुदाय के विकास हेतु टीडीएफ कार्यक्रम शामिल हैं।  
प्रश्न : टीडीएफ़ क्या है ? इसके उद्देश्य कौन सी परियोजनाएं चलाई जाती है ?
उत्तर: नाबार्ड ने 2003-04 में अपने लाभ में से 50 करोड़ रुपये की राशि से जनजातीय विकास निधि (टीडीएफ) बनाई जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय की सतत आजीविका के साधनों का सृजन करना था। टीडीएफ के तहत वाडी तथा नॉन वाडी परियोजनाएं चलाई गई। अभी वाडी परियोजनाओं को ट्राइब्स के नाम से जाना जाऐगा। इन परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की क्षमता और जनजातीय जरूरतों के आधार पर स्थायी आय प्रदान  करने वाली गतिविधियों को अपनाकर, सामुदायिक भागीदारी के आधार पर जनजातीय परिवारों के एकीकृत विकास के अनुकरणीय मॉडल तैयार करना है। साथ ही जनजातीय संस्थाओं का निर्माण और उन्हें मजबूत करना, जिससे समुदाय नीति निर्माण, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में भागीदार बन सकें और सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें। सामुदायिक संस्थाओं को बढ़ावा देना, इनपुट आपूर्ति, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को सुविधाजनक बनाना है । इसके अलावा जनजातीय किसानों को मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करना है, जिससे उन्हें उपभोक्ता मूल्य का अधिक हिस्सा प्राप्त हो सके। 
प्रश्न : नाबार्ड द्वारा वर्तमान में मध्यप्रदेश में कितनी परियोजनायें कार्यान्वित हैं?
उत्तर: मध्य प्रदेश में अभी तक 31 जिलों में 102 परियोजाएं मंजूर की जा चुकी है तथा इन परियोजनाओं से अभी तक 78126 आदिवासी परिवारों को लाभ मिला है। वर्तमान में राज्य के 19 जिलों में 23 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है । 
प्रश्न : इन वाड़ी परियोजनाओं के मुख्य उत्पाद क्या है? 
उत्तर: इन वाड़ी परियोजना में, आदिवासी परिवार रसायन मुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले फलों का उत्पादन करते हैं, जिसमें प्रमुख उपज विभिन्न किस्मों के आम, अमरूद, नींबू, आंवला तथा सीताफल आदि हैं । 
साथ ही कटनी जिले में नॉन वाडी के तहत मेडिसन हर्ब वाली परियोजना भी चल रही है। 
प्रश्न: आम महोत्सव का उद्देश्य  क्या है ? 
उत्तर: वाड़ी परियोजना के अंतर्गत आदिवासी परिवारों द्वारा उत्पादित फलों का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके, इसके लिए नाबार्ड हमेशा प्रयसरत रहा है, जिसमें आम महोत्सव एक मुख्य आयोजन है। 
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश हमारे आदिवासी किसानों द्वारा उत्पादित आमों के लिए प्रदेश के मुख्य शहरो में बाजार उपलब्ध करवाना, मूल्य संवर्धन तथा विपणन के विभिन्न पहलुओं से अवगत करना है । इस महोत्सव आम को वाडी से सीधा भोपालवासियों की प्लेट तक पहुँचाने का कार्य करता है। इस कार्यक्रम को क्रेता और विक्रेता द्वारा अत्यधिक सराहा जाता रहा है। 
प्रश्न : इस वर्ष आम महोत्सव का आयोजन कब किया जा रहा है ?
उत्तर: इस वर्ष नाबार्ड द्वारा “ राज्य स्तरीय आम महोत्सव” के आठवें संस्कारण का आयोजन दिनांक 10 से 14 जून 2025 तक किया जा रहा है। साथ ही रीवा तथा छिंदवाडा में जिला स्तरीय आम महोत्सव का भी आयोजन किया जा रहा है।
प्रश्न: आम महोत्सव कहाँ आयोजित किया जा रहा है ?
उत्तर:  राज्य स्तरीय आम महोत्सव का आयोजन नाबार्ड, मध्य प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, ई- 5, अरेरा कालोनी, बिट्टन मार्केट, भोपाल में किया जा रहा है। 
प्रश्न: आम महोत्सव में आम कहाँ-कहाँ से आ रहे हैं ? 
उत्तर:  राज्य के लगभग हर कोने जैसे छिंदवाड़ा, झाबुआ, अलीराजपुर, रीवा, सतना, मंडला, शहडोल आदि जिलों के नाबार्ड समर्थित वाड़ी परियोजना के स्वादिष्ट और रसायन मुक्त आम, इस महोत्सव में बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे। महोत्सव में लगभग 20 टन आम बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे।
प्रश्न: कौन से आम की किस्म की इस बार मुख्य आकर्षण होगी ?
उत्तर : जी आई टैग सुंदरजा तथा नूरजहाँ आम के साथ ही साथ केसर, तोतापरी, आम्रपाली, दशहरी, लंगड़ा, चौसा, नारंगी, सिंदूरी, राजपुरी आदि विविध आम की किस्में इस बारे आम महोत्सव में उपलब्ध होंगे । 
प्रश्न: सुंदरजा और नूरजहां आम की क्या खासियत है ?
उत्तर: सुंदरजा आम एक अनूठी किस्म है इस आम को शुगर के रोगी भी खा सकते हैं। अपनी इसी विशेषता के लिए यह विश्व प्रसिद्ध हो चुका है। यह आम बहुतायात में विदेशों में जाता है। यह किस्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में बहुत होती है। इसे जीआई टैग प्राप्त है। 
दूसरा आकर्षण का केंद्र नूरजहां आम है। इस विशाल आकर वाले आम को देखने व खरीददारों के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।  इसका वजन लगभग 1.5 से 3 किलों से बीच में होता है। यह आम अधिक रसीला होता है, इसका छिलका पतला होते है और गूठली (बीज) भी छोटा होता है। 
प्रश्न : पिछली बार की तुलना में इस बार कितनी विशेषता वाले आम आ रहे हैं ?
उत्तर :  पिछली बार की तुलना में इस बार और आधिक किस्म के आम बिक्री हेतु उपलब्ध होंगे, साथ ही साथ पिछली बार नूरजहान आम केवल अवलोकन के लिए उपलब्ध था इस बार बिक्री हेतु भी उपलब्ध रहेगा ।

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