Raipur में राम वनगमन पथ में लगेगी Gwalior में बनी 51 फीट ऊंची Shri Ram की प्रतिमा

रायपुर/ग्वालियर

 भगवान श्रीराम की 14 वर्षों की वन यात्रा आज भी भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का अहम हिस्सा है। श्रीराम ने अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक का मार्ग जंगलों में व्यतीत किया, जिन स्थानों से वे गुज़रे वे आज राम वन गमन पथ के रूप में श्रद्धा का केंद्र हैं। भारत सरकार इस पथ पर पड़ने वाले धार्मिक स्थलों को विकसित करने का कार्य कर रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों के 248 स्थलों को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से संवारा जा रहा है।

रायपुर में लगेगी ग्वालियर में बनी मूर्ति

अब इसी पथ पर ग्वालियर की भी महत्वपूर्ण भागीदारी दर्ज होने जा रही है। ग्वालियर के प्रसिद्ध मिंट स्टोन से बनी भगवान राम की 51 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा जल्द ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी में स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा वनवासी रूप में श्रीराम को दर्शाती है और इसे जाने-माने मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा और उनकी टीम ने तैयार किया है।

7 महीने पहले मिला था काम

इस विशाल प्रतिमा को आकार देने का जिम्मा छत्तीसगढ़ सरकार ने करीब 7 महीने पहले दीपक विश्वकर्मा को सौंपा था। उनकी टीम के 25 कलाकारों ने दिन-रात मेहनत करके इसे मूर्त रूप दिया है। यह प्रतिमा पूरी तरह ग्वालियर मिंट स्टोन से बनी है। अलग-अलग खंडों को जोड़कर एक अद्भुत और सजीव आकृति तैयार की गई है।

वनवासी स्वरूप में है प्रतिमा

इस मूर्ति की विशेषता है कि यह भगवान राम को वनवासी स्वरूप में दर्शाती है। उनकी वेशभूषा, पुष्पहार, रुद्राक्ष की 108 माला, खड़ाऊ आदि सभी को अत्यंत सूक्ष्मता और सुंदरता से पत्थर में उकेरा गया है। मूर्तिकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से डिजाइन पहले से तय थी और उसी के अनुसार इसे तैयार किया गया।

मूर्ति में शिवरीनारायण की छवि भी दिखेगी

राम वनगमन पथ में 9 जगहों को चिन्हित किया गया था। इनमें से 7 जगहों चंदखुरी, शिवरीनारायण, सीतामढ़ी हरिचौका, राजिम, चंपारण, नगरी सिहावा, रामगढ़ में मूर्तियां लगाईं। रामाराम (सुकमा) और तुरतुरिया (बलौदा बाजार) में विकास कार्य किया गया है। चंदखुरी को छोड़कर बाकी 6 जगहों पर 25 फीट की मूर्ति स्थापित की गईं हैं।

मूर्ति निर्माण में आईं चुनौती

दीपक विश्वकर्मा के अनुसार, इस प्रतिमा का निर्माण अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। सबसे पहले विशाल पत्थर को काटकर ज़मीन पर बिछाया गया, फिर उसके ऊपर डिजाइन उकेरा गया। माप-तौल और ड्राइंग के बाद मूर्ति पर काम शुरू हुआ। इस प्रक्रिया में लगभग 60-70 टन मिंट स्टोन का उपयोग हुआ, लेकिन कटाई और तराशने के बाद प्रतिमा का कुल वजन लगभग 30-35 टन रह गया। इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में लगभग 72 लाख रुपये की लागत आई है। इसे रायपुर ले जाकर स्थापित करने में अतिरिक्त 22-25 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है। यानी कुल मिलाकर यह करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी।

25 कलाकारों ने 7 महीने में तैयार की मूर्ति

छत्तीसगढ़ सरकार ने 7 महीने पहले दीपक विश्वकर्मा को इस मूर्ति को तैयार करने का जिम्मा सौंपा था. इस प्रतिमा को तैयार करने में दीपक विश्वकर्मा के साथ उनकी टीम के करीब 25 कलाकारों ने 7 महीने तक दिन रात मेहनत की है. इस पूरी प्रतिमा को ग्वालियर मिंट स्टोन से तैयार किया गया है. अलग-अलग पत्थरों को जोड़कर इसे एक स्वरूप दिया गया है. इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रतिमा कैसी होनी चाहिए इसके बिंदु पहले ही बता दिए थे. ऐसे में उनके अनुसार ही इसे तैयार किया गया है.

60-70 टन मिंट स्टोन का इस्तेमाल

इस प्रतिमा में राम की सुंदरता और वनवासी रूप को दर्शाने के लिए पुष्प हार को पत्थर में ही उकेरा गया है. साथ ही प्रमुख आकर्षण रुद्राक्ष की माला है, जिसे 108 पत्थरों से रूप दिया गया है. खड़ाऊ भी अत्यंत आकर्षक बनाए गए हैं. इस प्रतिमा को बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दीपक को डिजाइन उपलब्ध कराया गया था. उसी डिजायन को दीपक ने पत्थर में हूबहू उकेरा है. इस प्रतिमा को तैयार करने के लिए 60-70 टन ग्वालियर मिंट स्टोन का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, कांट छांट और प्रतिमा को स्वरूप देने में आधा पत्थर निकल गया फिर भी यह करीब 30 से 35 टन वजनी है.

इससे पहले भी बनाई हैं प्रतिमाएं

यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में बनी राम प्रतिमा को राम वन गमन पथ पर स्थान मिला हो। इससे पहले भी दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई 25-25 फीट ऊंची दो प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में स्थापित की जा चुकी हैं। इन्हीं की गुणवत्ता और कलात्मकता को देखते हुए उन्हें 51 फीट ऊंची इस नई प्रतिमा का कार्य सौंपा गया। यह प्रतिमा राम वन गमन पथ पर अब तक लगाई गई 7 मूर्तियों में सबसे ऊंची है और जल्द ही इसकी स्थापना चंदखुरी में की जाएगी। यह न सिर्फ ग्वालियर के लिए गर्व की बात है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बनने जा रही है।

चुनौतीपूर्ण रहा पत्थर से प्रतिमा का सफर

भगवान राम की यह प्रतिमा अपने आप में अनोखी है और इसे बनाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. दीपक विश्वकर्मा ने बताया, "इस प्रतिमा का साइज अपने आप में चुनौती था. पहले मूर्ति के लिए पत्थर को काटा गया और उसे जमीन पर बिछाया गया. जिसके बाद इसकी ड्राइंग तैयार की गई. नाप तौल किया गया, क्योंकि डिजाइन के अनुसार 51 फीट की प्रतिमा बनाना आसान नहीं था, लेकिन पूरी टीम ने इसे सफलता पूर्वक पूरा किया." दीपक ने यह भी बताया, "मूर्ति को पास कर दिया गया है और आने वाले एक हफ्ते में यह मूर्ति रायपुर के लिए रवाना हो जाएगी."

प्रतिमा पर 1 करोड़ होंगे खर्च

जितनी भव्य और आकर्षक यह प्रतिमा है, उतना ही इसका खर्च भी है. 51 फीट ऊंची इस प्रतिमा को बनाने में करीब 72 लाख रुपए की लागत आई है. इसके बाद जब इसे रायपुर में लगाया जाएगा, तो वहां भी करीब 22-25 लाख रुपए का खर्च आएगा. यानी करीब एक करोड़ रुपए की लागत से राम वन गमन पथ पर ग्वालियर की यह प्रतिमा शोभा बढ़ाएगी.

पहले भी लगाईं ग्वालियर में तैयार दो प्रतिमाएं

ऐसा नहीं है कि यह पहली प्रतिमा है, जो राम वन गमन पथ पर ग्वालियर से तैयार होकर लगाई गई है. इससे पहले भी दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई भगवान राम के वनवासी रूप की दो प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में लग चुकी हैं, लेकिन उनकी ऊंचाई महज 25-25 फीट थी. उन्हीं प्रतिमाओं के आधार पर दीपक विश्वकर्मा को इस प्रतिमा का ऑर्डर मिला था. हालांकि, यह पहली प्रतिमा है, जो वहां लगाई गई 7 प्रतिमाओं में सबसे बड़ी है. 51 फीट ऊंची है. बाकी सभी 6 की ऊंचाई सिर्फ 25 फीट ही है. कुछ ही दिन में इसकी भी स्थापना हो जाएगी.

More From Author

ग्वालियर का CBG plant करेगा कमाल, 350 टन कचरा रोज़ बनेगा CNG और खाद

13 करोड़ की लागत से उज्जैन में बन रहा महाकाल संस्कृति वन, 29.6526 एकड़ में लगेंगे 30 हजार पौधे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.