राजधानी में एक बार फिर शासकीय नजूल भूमि पर हुए कथित घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी

भोपाल

राजधानी भोपाल में एक बार फिर शासकीय नजूल भूमि पर हुए कथित घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। “नानी की हवेली” नामक एक विवादास्पद कमर्शियल निर्माण परियोजना के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को एक विस्तृत, साक्ष्य-समर्थित शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें प्रमुख नगर निवेशक (Chief Town Planner) अनूप गोयल, सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के खिलाफ गंभीर आर्थिक अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और हवाला लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में खुलासा हुआ है कि उक्त भूखंड, जिसका CLR नंबर 11180024089 है, राज्य शासन की नजूल संपत्ति के रूप में दर्ज है और 2013 से “शत्रु संपत्ति” घोषित है। इसके बावजूद, मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल द्वारा 3 फरवरी 2025 को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से इस भूखंड पर कमर्शियल निर्माण की अनुमति जारी की गई।

शिकायत के अनुसार न तो सुरेश और नरेश चोटरानी ने कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज़ प्रस्तुत किया और न ही इस भूमि पर किसी प्रकार का नामांतरण हुआ है। बावजूद इसके, भवन अनुज्ञा जारी करना न केवल गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है, बल्कि एक संभावित रिश्वत और बेनामी सौदेबाज़ी का संकेत भी दे रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप यह भी है कि इस भूखंड की स्वीकृति प्रक्रिया में भारी मात्रा में हवाला लेनदेन व नकद भुगतान हुआ, जिससे संपत्ति का बाजार मूल्य दर्जनों करोड़ रुपये तक पहुँच गया, लेकिन शासन को एक भी रुपया राजस्व के रूप में प्राप्त नहीं हुआ।

प्रमुख आपराधिक बिंदु जो उजागर हुए हैं:
    •    शासकीय नजूल भूमि को निजी संपत्ति दर्शाने की साजिश
    •    फर्जी दस्तावेजों पर भवन अनुमति जारी करना
    •    वैधानिक स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अधिकारी द्वारा स्वीकृति देना
    •    बेनामी संपत्ति का निर्माण एवं हवाला नेटवर्क के माध्यम से धनप्राप्ति
    •    न्यायालय के आदेशों की अवहेलना

सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक भूखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल में फैले एक बड़े भूमि नेटवर्क घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें दर्जनों नजूल या विवादास्पद सरकारी ज़मीनों को फर्जी कागज़ातों के सहारे निजी परियोजनाओं में परिवर्तित किया जा रहा है।

शिकायत में आरोप है कि अनूप गोयल के विरुद्ध पूर्व में भी नगर निगम व सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार भ्रष्टाचार की शिकायतें की गई थीं, लेकिन उनके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मांग की गई कानूनी कार्रवाई में शामिल हैं:
    •    IPC की धारा 120B, 409, 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत अभियोग
    •    भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
    •    धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA)
    •    बेनामी संपत्ति अधिनियम, 1988
    •    न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971

शिकायत में राजस्व दस्तावेज़, न्यायिक आदेशों की प्रतिलिपियाँ, भवन अनुज्ञा और स्वीकृति पत्रों सहित आवश्यक साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।

EOW द्वारा इस शिकायत को दर्ज कर प्रारंभिक जांच प्रारंभ कर दी गई है।

यदि इस प्रकरण में दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह उदाहरण बन सकता है कि किस प्रकार राज्य की संपत्तियों को मिलकर लूटा जा सकता है — और यह चिंता का विषय न केवल भोपाल, बल्कि समस्त मध्यप्रदेश और देश के लिए है।

भोपाल में शत्रु संपत्ति की बंदरबांट, नानी की हवेली रिकॉर्ड में सरकारी, निगम ने जारी की बिल्डिंग परमिशन

राजधानी की बहुचर्चित नानी की हवेली मामले में नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. बिल्डिंग परमिशन शाखा ने नानी की हवेली के ऑनरशिप डॉक्यूमेंट की अनदेखी करते हुए इसकी भवन अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि सरकारी रिकॉर्ड में नानी की हवेली अब भी नजूल की संपत्ति दर्ज है. उधर गड़बड़ी सामने आने के बाद बिल्डिंग परमिशन शाखा के अधिकारी अपनी गलती छुपाने में जुटे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने यह भवन अनुज्ञा एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी की गई अनापत्ति के आधार पर जारी की है.

बिना नामांतरण जारी कर दी अनुज्ञा

दरअसल, नानी की हवेली के मामले की सुनवाई वर्ष 2014 से जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही है. जिसमें हाईकोर्ट 4 जनवरी 2023 को सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के पक्ष में फैसला सुना चुकी है. उधर जिला प्रशासन ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की है. इस वजह से जिला प्रशासन द्वारा इसका नामांतरण नहीं किया गया. रिकॉर्ड में अभी भी नानी की हवेली शासकीय रिकॉर्ड में नजूल के नाम दर्ज है.

पुरानी एनओसी को बनाया आधार

नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल ने 3 फरवरी 2025 को नानी की हवेली भूखंड पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स की अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि इसके लिए जरूरी भूखंड के ऑनरशिप की अनदेखी की गई. भवन अनुज्ञा के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत की गई शहर एसडीएम की 3 अगस्त 2022 को जारी अनापत्ति को आधार बनाया गया. सीनियर एडवोकेट जगदीश छावानी के मुताबिक "जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था, तो फैसले के पहले अनापत्ति की वैधानिकता ही नहीं है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए थी."

शत्रु संपत्ति से जुड़ा है पूरा मामला

बताया जाता है कि 1947 में विभाजन के बाद कराची से आए कन्हैयालाल भाटिया को विस्थापित मानते हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर मंगलवारा, जंहागीराबाद और सीहोर में आवास आवंटित किए थे, लेकिन इन आवासों पर अवैध कब्जा होने की वजह से उन्हें 28 दिसंबर 2005 को नानी की हवेली आवंटित कर दी थी. सीहोर में बस चुके भाटिया ने दिसंबर 2006 को नानी की हवेली का कब्जा लेकर सुशील कुमार धनवानी को इसकी पॉवर ऑफ अटॉनी बना दी थी. बाद में नानी की हवेली को सुरेश चोटरानी को विक्रय कर दिया गया था. हालांकि बाद में राज्य शासन ने इसे शत्रु संपत्ति मानकर इसे शासकीय घोषित कर दिया.

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मामले में मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल का कहना है कि "नानी की हवेली के समय एसडीएम की अनुज्ञा प्रस्तुत की गई थी. हालांकि बाद में हाईकोर्ट का फैसला भी आवेदक के पक्ष में आया है. सभी दस्तावेज देखने के बाद ही भवन अनुज्ञा जारी की गई है. यदि इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाएगी तो अनुज्ञा निरस्त कर दी जाएगी." वहीं एसडीएम शहर दीपक पांडे ने बताया कि "नानी की हवेली का मामला लंबे समय से चला आ रहा है. इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आया है. इस मामले में फिर से रिव्यू पिटीशन लगाई जा रही है."

 

More From Author

मोदी से अबरार की मां ने की अपील, अनुरोध है कि किसी तरह इस युद्ध को रोका जाए, ईरान में फंसे अबरार का भारत लौटने से इंकार

मध्यप्रदेश में भीषण हादसा, गुना में जहरीली गैस से 5 लोगों की मौत, मच गया कोहराम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13695/1

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.