भारत की जलनीति का बड़ा कदम: चिनाब नदी पर सावलकोट प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

 नई दिल्ली
भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को करार झटका दिया है. भारत ने चार से अधिक दशकों की देरी के बाद आखिरकार सावलकोट पावर प्रोजेक्ट का निर्माण जल्द शुरू करने का फैसला किया है.

भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर के रामबन जिले में इस महत्वाकांक्षी पावर प्रोजेक्ट के लिए इंटरनेशनल टेंडर्स मंगाए हैं. 1856 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के लिए ऑनलाइन बिड जमा करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर निर्धारित की गई है. 

बता दें कि प्रशासनिक अड़चनों, पर्यावरणीय मसलों और पाकिस्तान की आपत्तियों की वजह से सावलकोट पावर प्रोजेक्ट को दशकों की देरी का सामना करना पड़ा. यह पावर प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के चिनाब नदी पर शुरू किया जाएगा. 

सिंधु नदी संधि निलंबित करने के बाद इस रुके हुए प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने से पाकिस्तान पर दोहरी मार पड़ेगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने के लिए हमें जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है. कहा जा रहा है कि सावलकोट परियोजना पूरी होने के बाद भारत सिंधु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा.

केंद्र सरकार का मानना है कि इस परियोजना की जरूरत नेशनल लेवल पर है। हालांकि पाकिस्तान की आपत्तियों और कई तरह की रुकावटों के कारण यह परियोजना अटकी हुई थी। यह आपत्ति सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान करता था और परियोजनाओं पर अड़ंगे लगा देता था।

ये मुद्दे भी
सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए कई काम होने थे। 13 गांवों के लोगों को मुआवजा दिया जाना। रामबन में सेना के ट्रांजिट कैंप को स्थांतरित करना और पर्यावरण नियमों के तहत वन भूमि को मंजूरी देने। मुआवजा देने जैसे कई मुद्दे थे।

मील का पत्थर साबित होगी परियोजना
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) ने बुधवार को इस बिजली परियोजना के लिए टेंडर प्रॉसेस शुरू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट जम्मू- कश्मीर के रामबन जिले के सिधु गांव के पास बनना है। ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर है। 1856 मेगावाट का यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा। प्रोजेक्ट की योजना, डिजाइन और इंजीनियरिंग कार्यों के लिए इंटरनेशनल टेंडर्स आमंत्रित किए गए हैं।

भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु समझौता क्या हुआ था
सावलकोट परियोजना पूरी होने के बाद भारत सिंधु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल कर पाएगा। 1960 में हुई इस संधि में भारत को ब्यास, रावी और सतलुज नदियों का कंट्रोल मिला था। वहीं पाकिस्तान को सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों का नियंत्रण दिया गया था। इंडस संधि में यह भी कहा गया था कि भारत पाकिस्तान के नियंत्रण वाली पश्चिमी नदियों से कुछ पानी का यूज कर सकता है।

उमर अब्दुल्ला बोले- मैंने की थी कोशिश
जम्मू- कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पास बिजली मंत्रालय भी है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि यह जल्द ही शुरू हो जाएगी। उमर अब्दुल्ला ने बताया कि इस परियोजना का रूप 1980 के दशक में सोचा गया था। इस पर कुछ काम शुरू होता, इसे 1996 में बंद कर दिया गया था। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने एक नॉर्वेजियन कंसोर्टियम की मदद से इसे फिर से शुरू करने की कोशिश की थी लेकिन वह कोशिश भी फेल हो गई। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मेरे पिछले कार्यकाल के दौरान मैंने इसे फिर से शुरू करने की कोशिश की, लेकिन बाधाएं आईं। मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार के दौरान इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।

क्या है प्रोजेक्ट और क्या बाधाएं हुईं दूर
सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक एक रन-ऑफ-रिवर परियोजना है। मतलब यह नदी के पानी के प्राकृतिक प्रवाह का यूज करके बिजली पैदा करेगी। इस हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना पर 22,704।8 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। इसे दो चरणों में डिवेलप किया जाएगा। NHPC को जल उपकर पर भी छूट मिल गई है। इस महीने की शुरुआत में वन सलाहकार समिति (FAC) ने परियोजना के निर्माण के लिए 847 हेक्टेयर वन भूमि को मोड़ने के लिए 'सैद्धांतिक' मंजूरी भी दे दी थी।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी ने पाकिस्तान को साफ कर दिया था कि ट्रेड और टेरर, पानी और खून, गोली और बोली एक साथ नहीं हो सकते. पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी संधि को सस्पेंड कर दिया था. भारत सरकार के इस कदम पर पाकिस्तान आगबबूला हो गया था. 

सिंधु नदी की पांच सहायक नदियां हैं जो रावी, ब्यास, सतलुज, झेलम और चिनाब हैं. रावी, ब्यास और सतलुज नदियों को पूर्वी नदियां जबकि चिनाब, झेलम और सिंधु को पश्चिमी नदियां कहा जाता है. इनका पानी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए ही अहम है.

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