मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट से बड़ी राहत, बोली सभी विधर्मियों का मुंह हुआ काला

भोपाल 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मालेगांव धमाके में एनआईए की अदालत से मिली क्लीनचिट को सनातनियों की जीत बताया है तो यह भी कह दिया कि 'विधर्मियों का मुंह काला' हो गया। उन्होंने 'हिंदूराष्ट्र' की मंशा भी जाहिर की है। अदालत ने साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित सभी सात आरोपियों को 17 साल बाद बरी कर दिया।

साध्वी प्रज्ञा ने उनकी गिरफ्तारी के बाद 'भगवा आतंकवाद' जैसे गढ़े गए शब्दों को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने इसमें दूसरे धर्म के सभी लोगों को भी लपेट लिया। साध्वी ने शुक्रवार रात एक्स पर लिखा, 'भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद के जन्मदाता कांग्रेस सहित सभी विधर्मियों का मुंह हुआ काला। भगवा ,हिंदुत्व और सनातन की विजय पर समस्त सनातनियों और देशभक्तों का हुआ बोलबाला बहुत-बहुत बधाई।' साध्वी ने अपनी पोस्ट के साथ जय हिंदूराष्ट्र, जय श्री राम का नारा लगाया।

भोपाल की पूर्व सांसद ने इससे पहले एक्स पर एक भगवा झंडे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'भगवा चिर विजयी ध्वज….' झंडे के नीचे राष्ट्र जयघोष लिखा हुआ है। बचपन से ही हिंदुत्व की विचारधारा के लिए समर्पित साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए एक बम धमाके के केस में गिरफ्तार किया गया था। आरोप लगाया गया था कि जिस बाइक पर विस्फोटक रखा गया था वह साध्वी के नाम रजिस्टर्ड थी। लेकिन अदालत ने कहा कि सबूतों से यह साबित नहीं हो पाया।

साध्वी प्रज्ञा ने अपने पोस्ट में लिखा कि भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा गढ़ने वाली कांग्रेस सहित सभी विधर्मियों का मुंह काला हुआ, भगवा, हिंदुत्व और सनातन की विजय पर समस्त सनातनियों और देशभक्तों का बोलबाला। बहुत-बहुत बधाई। जय हिन्दू राष्ट्र, जय श्रीराम।
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एनआईए कोर्ट से मिली राहत
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपने हाथ में ली थी और साध्वी प्रज्ञा समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। मामले की करीब 16 साल तक चली सुनवाई के बाद, विशेष एनआईए अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपों को प्रमाणित करने में असफल रहा। कोर्ट के फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भगवा आतंकवाद का नैरेटिव एक राजनीतिक साजिश था और उसका आज पटाक्षेप हो गया है।

कौन-कौन थे आरोपी? 
मामले में भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी पर आतंकवाद और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप लगे थे। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मुकदमा चला है, जिनमें हत्या, साजिश, सांप्रदायिकता फैलाना, और आतंक फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच की और कोर्ट से आरोपियों को उनके अपराध के अनुसार सजा देने की मांग की थी। 

मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगाए गए विस्फोटक में धमाका होने से 6 लोगों की मौत हो गई थी और 101 अन्य लोग घायल हो गए थे। इस मामले के आरोपियों में ठाकुर, पुरोहित, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। हिंदू आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ‘हिंदू आतंकवाद’, और ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। अब अदालत के फैसले के बाद भाजपा की ओर से कांग्रेस से जवाब मांगा जा रहा है।

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