विदेशी जेलों में बढ़ी भारतीयों की संख्या, खाड़ी देशों में 9 साल में 3405 कैदी बढ़े

नई दिल्ली

भारत सरकार ने लोकसभा में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि इस समय दुनियाभर की जेलों में कुल 10,574 भारतीय नागरिक बंद हैं। इनमें से कई दोषी करार दिए जा चुके हैं, कुछ मुकदमे का इंतजार कर रहे हैं और कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है लेकिन उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी संसद में एक लिखित उत्तर के जरिए दी। उनके मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों को विदेशों में फांसी की सजा भी सुनाई गई है।

किन देशों में सबसे ज्यादा भारतीय कैदी?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सबसे अधिक भारतीय नागरिक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की जेलों में बंद हैं- कुल 2,773। इसके बाद सऊदी अरब में 2,379, क़तर में 795, नेपाल में 1,357 और कुवैत में 342 भारतीय नागरिक जेल में हैं। 
 दुनिया के अलग-अलग जेलों में फिलहाल 10,574 भारतीय नागरिक कैद हैं। इनमें से 43 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है। संसद में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे अधिक संख्या में भारतीय कैदी हैं, जहां वर्तमान में 2,773 भारतीय नागरिक सलाखों के पीछे हैं।
किन देशों में कितने कैदी हैं?

इसके बाद सऊदी अरब में 2,379 और नेपाल में 1,357 कैदी हैं। जिन अन्य देशों में भारतीय कैदियों की संख्या अच्छी-खासी है, उनमें कतर में 795, मलेशिया में 380, कुवैत में 342, यूनाइटेड किंगडम में 323, बहरीन में 261, पाकिस्तान में 246, चीन में 183 और अन्य देश शामिल हैं।

कई देशों में केवल एक-एक भारतीय कैदी है, जिनमें अंगोला, बेल्जियम, कनाडा, चिली, मिस्र, इराक, जमैका, मॉरीशस, सेनेगल, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ताजिकिस्तान और यमन शामिल हैं।
सऊदी में हैं मौत की सजा पाने वाले सबसे ज्यादा कैदी

बात करें मृत्यु दंड की सजा भुगत रहे कैदियों की तो सबसे ज्यादा 21 भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में हैं। उसके बाद सऊदी अरब (7), चीन (4), इंडोनेशिया (3) और कुवैत (2) हैं। अमेरिका, मलेशिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर और यमन में एक-एक भारतीय को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।

किन देशों में भारतीयों को दी गई है फांसी की सजा?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दुनिया भर के 11 देशों में 43 भारतीय नागरिकों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा 21 भारतीय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हैं, जबकि सऊदी अरब में 7, चीन में 4, और इंडोनेशिया में 3 भारतीयों को यह सजा मिली है। इसके अलावा, कुवैत में 2, और मलेशिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर, अमेरिका, और यमन में एक-एक भारतीय नागरिक फांसी की सजा का सामना कर रहा है। इनमें से कई मामले अभी कोर्ट में चल रहे हैं, और भारतीय दूतावास इन कैदियों को कानूनी सहायता देने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि 2020 से 2024 के बीच UAE में किसी भी भारतीय कैदी को फांसी नहीं दी गई, लेकिन इस साल फरवरी 2025 में तीन भारतीयों को फांसी दी गई, जिनमें उत्तर प्रदेश की एक नर्स और केरल का एक व्यक्ति शामिल था।

कौन हैं ये कैदी?
इन कैदियों में अपराध के दोषी लोग, मुकदमे का इंतजार कर रहे लोग और ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है लेकिन किसी कारणवश उन्हें रिहा नहीं किया गया है। सरकार ने यह भी माना है कि कुछ कैदी ऐसे भी हैं जिनके मामले में विदेशों की कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती है या उनका पासपोर्ट और दस्तावेज अधूरे होते हैं।

क्या कर रही है सरकार?
भारत सरकार ने बताया कि विदेशों में बंद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और रिहाई उसकी प्राथमिकता में शामिल है। जैसे ही किसी भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी की सूचना विदेशों में भारतीय दूतावास को मिलती है, मिशन संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल राजनयिक (कांसुलर) पहुंच की मांग करता है।

विदेशी जेलों में बंद भारतीयों की मदद के लिए क्या करता है दूतावास?
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशी जेलों में बंद भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास कई महत्वपूर्ण कदम उठाते हैं। सबसे पहले, वे कांसुलर एक्सेस के जरिए गिरफ्तार भारतीय से मिलते हैं, उनकी पहचान की पुष्टि करते हैं, और उनके केस की स्थिति का पता लगाते हैं। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर दूतावास स्थानीय वकीलों के जरिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं। भारतीय सामुदायिक कल्याण कोष (ICWF) का इस्तेमाल करके कैदियों को कानूनी मदद, यात्रा दस्तावेज, या वापसी के लिए टिकट जैसी आर्थिक सहायता दी जाती है। दूतावास सजा पूरी करने के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में भी मदद करते हैं ताकि कैदी भारत लौट सकें। साथ ही, वे विदेशी सरकारों से आम माफी (Amnesty) या सजा में छूट की अपील करते हैं। भारत सरकार ने कई देशों के साथ कैदी प्रत्यर्पण संधियां की हैं, जिनके तहत दोषी भारतीय नागरिक अपनी सजा भारत में काट सकते हैं।

तमिलनाडु के मछुआरों की रिहाई का मामला
लोकसभा में पूछे गए सवाल के एक हिस्से में यह जानकारी भी सामने आई कि 15 जुलाई 2025 तक 28 भारतीय मछुआरे श्रीलंका की हिरासत में थे, जिनमें से 27 तमिलनाडु के हैं और 1 पुडुचेरी से। भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ कई दौर की बातचीत में मछुआरों की वापसी का मुद्दा उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल 2025 को श्रीलंकाई राष्ट्रपति से हुई बैठक में भी इस मसले को मानवीय आधार पर हल करने की अपील की थी। इसके अलावा, भारत और श्रीलंका के बीच नियमित फिशरीज ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया जाता है। आखिरी बैठक 29 अक्टूबर 2024 को हुई थी। दूतावास के अधिकारी श्रीलंकाई जेलों में जाकर भारतीय मछुआरों की स्थिति की जानकारी लेते हैं और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं।

बिना शुल्क मिलती है मदद
जैसे ही किसी भारतीय नागरिक के विदेश में गिरफ्तारी की सूचना मिलती है, भारतीय दूतावास तुरंत स्थानीय विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों से संपर्क करके कांसुलर सहायता मांगता है। इसका मकसद होता है गिरफ्तार व्यक्ति से मिलना, उनके ऊपर लगे आरोपों और हालात को समझना, जरूरत पड़ने पर वकील की व्यवस्था करना, और अगर व्यक्ति सहमति दे तो उनके परिवार को सूचना देना। यह सारी सहायता बिना किसी शुल्क के दी जाती है। भारत सरकार ने साफ किया है कि विदेशों में भारतीय मिशन और दूतावास इन सेवाओं के लिए किसी भी भारतीय नागरिक से कोई शुल्क नहीं लेते। जरूरतमंद भारतीयों को भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) के जरिए आर्थिक और अन्य सहायता प्रदान की जाती है।

 

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