अमेरिका की नीति में अंतर, भारत को टारगेट, चीन और रूस को बड़ा लाभ

चीन 
चीन की पांचों उंगलियां इस वक्त घी में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने जहां दुनिया भर में उथल-पुथल मचाई है, वहीं दूसरी तरफ चीन को अब भी छूट मिली हुई है। बीते अप्रैल महीने में चीन के साथ शुरू हुए मिनी ट्रेड वॉर के बाद अमेरिका पीछे हटता हुआ दिखा और फिलहाल उसने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के डेडलाइन को और बढ़ा दिया है। इस बीच ट्रंप का फोकस फिलहाल भारत पर है। बीते कुछ सप्ताह में ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत को लगातार टारगेट किया है और कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया है। ऐसे में फोकस शिफ्ट होता देख चीन रूसी तेलों का आयात बढ़ाने में जुट गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इन दिनों पारंपरिक रूप से भारत आने वाले अतिरिक्त शिपमेंट को सुरक्षित करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। गौरतलब है कि यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बीच भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीददार के रूप में उभरे थे, जिन्हें रूस डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है। अब भारत को अमेरिका से मिल रहे झटकों के बाद चीन इसे अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है।

चीन ने बढ़ाया आयात
बीते दिनों कुछ रिपोर्ट्स में यह खबरें सामने आईं हैं कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी कर रहा है। रॉयटर्स ने बीते दिनों विश्लेषकों के हवाले से बताया था कि भारत ने रूस से अपने कच्चे तेल के आयात में प्रतिदिन 600,000 से 700,000 बैरल तक की कमी की है। इस बीच चीन के रिफाइनर एक्स्ट्रा रूसी तेल खरीदने के लिए आगे आए हैं। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सरकारी तेल कंपनियों और प्रमुख निजी रिफाइनरों ने अगस्त में ही अक्टूबर और नवंबर में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल के कम से कम 15 कार्गो सुरक्षित कर लिए हैं। हर शिपमेंट में 700,000 से 10 लाख बैरल होंगे जिसे चीन की आपूर्ति में एक बड़ी बढ़ोतरी बताया जा रहा है।

मौके का फायदा
इस बीच तेल की कीमतें कम होने से भी चीन को बेहद फायदा हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक रूसी ग्रेड के तेल अन्य देशों की तुलना में कम से कम 3 डॉलर प्रति बैरल सस्ते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप से मिले इस डेडलाइन का फायदा उठाकर चीनी रिफाइनर जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा शिपमेंट सुरक्षित कर रहे हैं।

भारत पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान
बीते कुछ सप्ताह में अमेरिका ने लगातार इस बात को दोहराया है कि भारत रूस से बहुत अधिक व्यापार खरीदता है और यूक्रेन जंग में रूस की आर्थिक मदद कर रहा है। ट्रंप ने इस तरह के आरोप लगाते हुए भारत पर पहले 25 फीसदी और फिर बाद में अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। हालांकि भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। भारत ने अमेरिकी टैरिफ को बेतुका और अनुचित भी बताया है।

भारत नहीं करेगा हितों से समझौता
बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का 75 से 80 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। बीते सालों में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति कई गुना बढ़ गई है और फिलहाल भारत लगभग 38 फीसदी तेल रूस से खरीदता है। भारत ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से कहा है कि अपनी अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और वह वहां से तेल खरीदेगा जहां उसे अच्छा सौदा मिलेगा। रूसी तेल से कच्चे तेल का आयात कम होने की खबरों के बीच शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि खरीददारी का फैसला पूरी तरह आर्थिक और वाणिज्यिक आधार पर ही किया जाएगा।

 

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