80 साल के पूर्व राष्ट्रपति को खाली करना पड़ा सरकारी महल, श्रीलंका में बदला नियम

 कोलंबो 

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पॉश इलाके सिनामैन गार्डेन में मौजूद भव्य और महल जैसे दिखने वाले एक घर में सामान समेटे जा रहे हैं. यहां हलचल है. 10 सालों से ये घर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का निवास था. महिंदा राजपक्षे आने वाले नवंबर में 80 साल के हो जाएंगे, लेकिन बुढ़ापे में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ रहा है. ये श्रीलंका में हाल ही में पास हुए एक कानून का असर है. 

श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों की सारी सुविधाएं छीन लेने वाला नया कानून Presidents' Entitlement (Repeal) Act पास हो गया है. इसके बाद पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी विधवाओं को आधिकारिक आवास, मासिक भत्ता, सुरक्षा स्टाफ, वाहन, सचिवालय सुविधाएं और अन्य लाभ मिलने बंद हो गए हैं. अब देश के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी आवास खाली करना पड़ रहा है. 

ऐसा ही माहौल पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा के घर भी है. हालांकि उन्होंने मौजूदा सरकार से कुछ मोहलत मांग ली है. वे अपना घर 2 महीने में खाली करेंगी.

दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके श्रीलंका में जब पिछले साल चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे अनुरा कुमारा दिसानायके ने देश के लोगों से वादा किया था कि वे पूर्व राष्ट्रपतियों की शाहखर्ची पर लगाम लगाएंगे. महंगाई और नेताओं के मनमानी खर्चे से त्रस्त श्रीलंका की जनता ने अनुरा दिसानायके के इस चुनावी वादे को सपोर्ट किया. 

राष्ट्रपति बनने के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बिल पर काम शुरू किया. श्रीलंका सरकार का एक आंकड़ा कहता है कि 2024 में पूर्व राष्ट्रपतियों के ताम-झाम में सरकारी खजाने से 11 अरब श्रीलंकाई रुपये खर्च हुए. 

यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट ने मंजूर किया और 31 जुलाई को गजट में प्रकाशित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने राजपक्षे परिवार की चुनौती को खारिज करते हुए 9 सितंबर को इसे साधारण बहुमत से पारित करने की मंजूरी दी. संसद ने 10 सितंबर को 151-1 के मतों से इसे पारित किया. 

अब श्रीलंका में पूर्व राष्ट्रपतियों को सिर्फ पेंशन मिला करेगी. उनके सभी लाभ समाप्त हो गए हैं. 

 इसी के साथ पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने 11 सितंबर को कोलंबो का आधिकारिक निवास खाली कर दिया है. महिंदा राजपक्षे अब कोलंबो से 190 किलोमीटर दूर तंगाल्ले में रहेंगे. तंगाल्ले स्थित कार्लटन हाउस ही वह जगह है जहां राजपक्षे ने 1970 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी.

श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा ने नया कानून लागू होने के बाद कहा है कि उन्हें कोलंबो में एक घर मिल गया है. इस घर का अभी नवीनीकरण चल रहा है. उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार सरकारी घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को घर खाली करने से पहले तीन महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है.  हालाकि उन्होंने कहा कि उन्हें घर खाली करने में दो महीने से ज़्यादा समय नहीं लगेगा. 

चंद्रिका कुमार तुंगा ने कहा है कि तीन हफ्ते पहले वे गिर गई थीं और इस दौरान उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. उन्होंने श्रीलंका के अंग्रेजी अखबार डेली मिरर से बात करते हुए कहा, "मेरे कूल्हे की सर्जरी हुई. यह एक गंभीर सर्जरी है. मुझे दिन में दो-तीन बार फ़िज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है. इसलिए मैं इस समय उस नए घर में न तो जा सकती हूँ और न ही कोई काम कर सकती हू."

चंद्रिका कुमार तुंगा ने नए कानून के लागू होने तक राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को पत्र लिखकर सरकार द्वारा निर्धारित किराया देकर जीवन भर इसी जगह रहने की अनुमति मांगी थी. लेकिन इसे अस्वीकार कर दिया गया. 

तब तुंगा ने कहा था कि वह नई व्यवस्था के तहत उसी जगह पर और रहने की इच्छा रखती है क्योंकि बुढ़ापे में और 15 सालों में दो बार कैंसर से जूझने के बाद उनके लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था. 

श्रीलंका में वर्तमान में पांच जीवित पूर्व राष्ट्रपति हैं. हालांकि जब सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था तब उनमें से केवल तीन ही इन सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे. 

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