शिप्रा नदी पर नए पुलों का जाल बिछेगा उज्जैन में, 300 करोड़ की परियोजना शुरू

उज्जैन 

धार्मिक महत्ता के कारण मोक्षदायिनी के रूप में ख्यात शिप्रा भविष्य में ब्रिजों की नदी भी कहलाएगी। सिंहस्थ तैयारियों के मद्देनजर नदी पर नए ब्रिजों की लंबी लाइन तैयार हो रही है। इनमें टू-लेन व फोर-लेन सबमर्सिबल ब्रिज के साथ ही उच्च स्तरीय पुल और कलात्मक आर्च ब्रिज भी शामिल हैं। इंदौर रोड तपोभूमि से मंगलनाथ के बीच 12 किलोमीटर से भी कम दूरी में शिप्रा पर 14 नए ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है।

इनमें कुछ नए ब्रिज वर्तमान पुल के समानांतर बनेंगे वहीं कुछ नई लोकेशन पर आकार लेंगे। इनके निर्माण पर कुल करीब 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह पहला मौका है जब शिप्रा पर इतनी बड़ी संख्या में ब्रिजों का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि कुछ ब्रिजों के निर्माण पर अंतिम स्वीकृति मिलना शेष है। इनके अलावा कुछ सडक़ निर्माण व घाटों के निर्माण अंतर्गत नदी पर छोटी रपट भी बनाई जाएंगी।

सिंहस्थ में आने-जाना होगा आसान

सिंहस्थ के दौरान करीब 30 करोड़े लोगों के आने का अनुमान है। नए ब्रिज बनने से शहरी सीमा में नदी के एक से दूसरे छोर तक आने-जाने के लिए शिप्रा पर औसत 1 किलोमीटर से भी दूरी पर पुल उपलब्ध हो सकेंगे। इसका बड़ा लाभ सिंहस्थ के दौरान क्राउड मैनेजमेंट के रूप में मिलेगा।

23,332 करोड़ रुपए के 153 कार्य जा चुके

सिंहस्थ 2028 के लिए सरकार के द्वारा 23,332 करोड़ रुपए के 153 कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन-मक्सी मार्ग, उज्जैन सिंहस्थ बायपास मार्ग, इंगोरिया-उन्हेल मार्ग और इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग का भी निर्माण किया जा रहा है।

सीएम डॉ मोहन यादव के बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेले में आर्मी को भी तैनात किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्य योजना बनाई जाएगी। साथ ही जिले को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने के लिए योगा, वेलनेस, नेचुरोपैथी, एलोपैथी और आयुर्वेद के केंद्रों के साथ मेडिकल डिवाइस उद्योग, फार्मा कंपनियों और मेडिकल रिसर्च संस्थाओं को साथ लेकर एक योजना तैयार करने के लिए कहा है।

मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने के लिए योगा, वेलनेस, नेचुरोपैथी, एलोपैथी और आयुर्वेद के केंद्रों के साथ मेडिकल डिवाइस उद्योग, फार्मा कंपनियों और मेडिकल रिसर्च संस्थाओं को साथ लेकर एकीकृत कार्ययोजना तैयार करें।

अभी 15 ब्रिज उपलब्ध

शिप्रा नदी पर तपोभूमि से मंगलनाथ मंदिर तक नदी को पार करने के लिए अभी छोटे-बड़े 14 ब्रिज उपलब्ध हैं। नए ब्रिज बनने के बाद नदी को पार करने के लिए करीब 30 पुल और रपट उपलब्ध हो सकेंगी। इसमें से करीब 8 बिज्र सिंहस्थ-2016 में बनाए गए थे।
शिप्रा पर यहां बन रहे नए ब्रिज

-वीर दुर्गादास छतरी विकास योजना में नदी पर कलात्मक आर्च पर ब्रिज

-अंगारेश्वर महादेव पहुंच मार्ग मंगलनाथ से अंगारेश्वर मंदिर तक ब्रिज- 14.56 करोड़

-लालपुल से चिंतामण गणेश रेलवे स्टेशन से एनएचएआइ 4 लेन मार्ग में शिप्रा नदी पर छोटी रपट।

-एमआर-24 (इंदौर रोड से चिंतामण रेलवे स्टेशन मार्ग तक फोरलेन में शिप्रा नदी पर ब्रिज) 18.71 करोड़ रुपए

-हरिफाटक से रिंग रोड, शिप्रा पर समानांतर उच्च स्तरीय ब्रिज का निर्माण (वाकणकर ब्रिज)- 22.45 करोड़

-पिपलीनाका से भैरवगढ़ मार्ग पर वर्तमान ब्रिज के साथ समानांतर टू लेन ब्रिज-14.52 करोड़ रुपए।

-कर्कराज पार्किंग से भूखी माता मंदिर क्षेत्र तक नया फोरलेन ब्रिज- 23.48 करोड़

-एमआर-४ त्रिवेणी हिल्स कॉलोनी के पीछे ग्राम सिकंदरी की ओर फोरलेन पुल- 24.81 करोड़

-गऊघाट पाले से सावराखेड़ी की ओर फोरलेन ब्रिज- 24.14 करोड़

-तपोभूमि से हामूखेड़ी मार्ग में नदी पर ब्रिज-17.28 करोड़ रुपए

-केडी गेट से गोंसा रोड पर नदी पर फोरलेन ब्रिज – 19.99 करोड़ रुपए

-कार्तिक चौक से शंकराचार्य रोड (छोटा पुल ) पर पुल निर्माण- 43.82 करोड़

-लालपुल डाउन स्ट्रीम पर आरओबी के समानांतर नदी पर फोरलेन ब्रिज- 17.32 करोड़ रुपए
नृसिंह घाट पर ब्रिज के समानांतर ब्रिज- 10.40 करोड़ रुपए।

वर्तमान में शिप्रा के करीब 8 किलोमीटर लंबे घाटों के साथ 29 किलोमीटर के नए घाट और बन रहे हैं। इससे स्नान के लिए बड़ा स्थान उपलब्ध होगा। सिंहस्थ के दौरान मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवागमन होगा। साथ ही श्रद्धालु शहर में देवदर्शन के लिए पहुंचेंगे। इस दृष्टि से यह ब्रिज काफी महत्वपूर्ण व उपयोगी हैं। सिंहस्थ के दौरान इनसे मोबिलिटी आसान होगी और बाद में भी यह उपयोगी साबित होंगे।– रौशनकुमार सिंह, कलेक्टर उज्जैन

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