ऊर्जा क्षेत्र में ओबरा की वापसी, 2320 मेगावाट उत्पादन के साथ फिर बना ‘पावर किंग’

ओबरा
यूपी में ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना का स्वर्णिम इतिहास रहा है। परियोजना के स्थापना के बाद यहां स्थापित तापीय बिजली इकाईयों से होने वाले उत्पादन से सूबे के कई हिस्से रोशन हुए।धीरे-धीरे इसकी क्षमता में वृद्धि होने के बाद इसका नाम देश के पटल पर भी जाना पहचाना जाने लगा। यह यूपी की पुरानी बिजली परियोजनाओं में शामिल है। जिससे निर्माण के इतने वर्षों बाद आज भी यहां की पुरानी इकाईयों से बदस्तूर उत्पादन जारी है।

हालांकि ओबरा डैम के संकुल में स्थापित इस परियोजना के आसपास नई परियोजनाओं को लगाने के लिए आज भी अनुकूल व पर्याप्त जगह होने के साथ ही उससे जुड़े सभी संसाधन भी उपलब्ध होने के कारण इसके विस्तारीकरण पर भी काफी काम किया गया।

जिसके फलस्वरूप इस परियोजना के विस्तार के रूप में ओबरा ''''सी'''' तापीय परियोजना ने अपना मुकाम हासिल कर उत्पादन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

60 के दशक में वजूद में आया था ओबरा तापीय परियोजना

60 के दशक में वजूद में आये ओबरा तापीय परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता की पांच इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना की पहली इकाई से 15 अगस्त 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके अलावा दूसरी इकाई से 11 मार्च 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ।

इसके बाद तीसरी इकाई से 13 अक्टूबर 1968, चौथी इकाई से 16 जुलाई 1969 और पांचवी इकाई से लगभग दो साल बाद 30 जुलाई 1971 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना का नाम देश के पटल पर जाने जाना लगा।

इसके बाद तापीय परियोजना का विस्तार करते हुए 70 के दशक में ओबरा तापीय परियोजना में 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाइयों का निर्माण हुआ। जिनमें 100 मेगावाट वाली छठवीं इकाई से चार अक्टूबर 1973 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर उसे ग्रिड से जोड़ा गया। सातवीं से 14 दिसम्बर 1974 और आठवीं से एक जनवरी 1976 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर एक स्वर्णिम इतिहास लिखा गया।

1979 से 82 तक 200 मेगावाट की पांच इकाई का निर्माण

प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती गयी ओबरा तापीय परियोजना का विस्तार होता रहा है। पानी और कोयला उपलब्ध होने पर 1979 से लेकर 1982 के बीच 200 मेगावाट वाली पांच इकाइयों का निर्माण हुआ।

जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजना में शुमार हो गया। लेकिन समय के साथ 50 मेगावाट की पांच इकाइयों और 100 मेगावाट की तीन इकाइयों का समय सीमा पूरी होने के बाद इन इकाइयों को उत्पादन से बाहर कर दिया गया। सरकार ने 1320 मेगावाट वाली ओबरा सी परियोजना की घोषणा की।

जिसके बाद दिसंबर 2016 में ओबरा सी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिसका नौ फरवरी 2024 को सीओडी प्रक्रिया पूरी कर कामर्शियल उत्पादन पर ले लिया गया। पहली इकाई से उत्पादन शुरू होने के उपरान्त प्रबंधन ने दूसरी इकाई से भी जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाना शुरू कर दिया।

जिसके परिणाम स्वरुप अगले 16 महीनों बाद 16 जून 2025 को दूसरी इकाई की सीओडी प्रक्रिया पूरी कर उक्त इकाई से कार्शियल उत्पादन शुरू कर दिया गया।

परियोजना के एटीपीएस में आठ इकाइयां हो चुकीं हैं डिस्मेंटल

60 से लेकर 70 के दशक के बीच लगी परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयां और 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाईयां अपनी परिचालन की समय से सीमा से अधिक समय तक उत्पादन करतीं रहीं।

एक समय ऐसा आया कि यह इकाईयां काफी पुरानी होने की वजह से इनसे होने वाला उत्पादन अपेक्षा से अधिक महंगा होने की वजह से इन इकाईयों को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय लिया गया। जिसके बाद इन इकाईयों को बंद करने के साथ ही प्रबंधन ने उसे पूरी तरह से डिस्मेंटल करने का निर्णय लिया।

जिसके लिए निविदा प्रक्रिया को पूरा कर प्रबंधन ने सभी आठों इकाईयों को पूरी तरह से डिस्मेंटल करा दिया। लेकिन इन सबके बावजूद 70 से लेकर 80 के दशक के बीच लगाई गयीं 200 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयों से आज भी निरंतर उत्पादन जारी है।

साथ ही ओबरा सी परियोजना की दोनों इकाईयों से कामर्शियल उत्पादन शुरू होने के पश्चात परियोजना की क्षमता बढ़कर 2320 मेगावाट हो गयी है।

 

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