योगी आदित्यनाथ का बयान: नरेंद्र मोदी हैं कर्मयोगी और साधक की मिसाल

लखनऊ 
इतिहास साक्षी है कि यह देश जब-जब चुनौतियों से घिरा, तब-तब इस धरती ने ऐसे महामानव दिए, जिन्होंने समय की धारा मोड़ दी. बीसवीं सदी के अंत और इक्कीसवीं सदी के आरंभ में जब भारत संक्रमण और असंतुलन से जूझ रहा था. ठीक इसी दौर में वडनगर से एक साधारण परिवार का संतति उभरी, जिसने संघर्ष को शक्ति और अवसर में बदला. राजनीति में भारतीय मूल्यों व जनभावनाओं को प्रतिष्ठा दी और भारत को वैश्विक मंच पर नई गरिमा और आत्मविश्वास दिलाया. आज पूरा देश उस यशस्वी नेतृत्व के जीवन की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. वास्तव में, आज उनके पचहत्तर वर्ष का यह जीवन केवल व्यक्ति मात्र की यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक चेतना का जागरण है.

मोदी जी का जीवन संघर्षों से संकल्प और संकल्प से सिद्धि की अनुपम गाथा है. बाल्यकाल की कठिनाइयों और वंचनाओं ने उनके भीतर ऐसा आत्मबल, संवेदनशीलता और अटूट संकल्प गढ़ा, जिसने उन्हें राष्ट्र निर्माण की महान यात्रा के लिए तैयार किया. 

जीवन के संघर्षों से शिक्षित और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में दीक्षित नरेंद्र मोदी जी ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण का पाठ ग्रहण किया. उनकी जीवन यात्रा केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरक गाथा है, जिसमें प्रत्येक अनुभव राष्ट्रसेवा की सीख बनकर आगे आया. अपने सुदीर्घ सामाजिक जीवन में मोदी जी शुचिता, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता का पर्याय बनकर उभरे हैं. “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम” उनके हर कार्य के मूल में निहित है.

'संघर्षों का अनुभव…'

वर्ष 2014 में भारत ने उन्हें प्रधानमंत्री चुना. यह चुनाव केवल सरकार का परिवर्तन नहीं था, बल्कि लोकचेतना के उदय का प्रतीक था. जनता ने एक ऐसे नेता को राष्ट्र की बागडोर सौंपी, जिसने स्वयं संघर्षों का अनुभव किया था और जो साधारण जन के जीवन की पीड़ा को समझता था. प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने शासन को नई परिभाषा दी. उन्होंने नीति और कार्यक्रमों की आत्मा में ‘वंचित को वरीयता’ का भाव भरा. यही भाव ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र में प्रकट हुआ. दशकों तक योजनाओं से वंचित लोगों को सम्मान और अवसर देना ही उनके शासन का मूल बन गया. यही कारण है कि करोड़ों गरीब परिवारों को घर, शौचालय, गैस, बिजली और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं वास्तविकता बनीं.

'प्रत्येक नागरिक की जीवन गुणवत्ता में सुधार…'

प्रधानमंत्री मोदी जी ने दीनदयाल उपाध्याय जी के ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को अपने नीति निर्माण में आधार बनाया है. उनका मानना है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानविक दृष्टि से भी होना चाहिए. इसी दृष्टि से योजनाएं गरीब और वंचित तक पहुंचती हैं, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाती हैं, और अंतिम नागरिक तक लाभ सुनिश्चित करती हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, डिजिटल क्रांति, और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलें इसी दर्शन का जीवंत प्रमाण हैं. मोदी जी का नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक सुधार केवल आंकड़े और नीतियां न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जीवन गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाएं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदृष्टि ने भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन की राह प्रशस्त की है. करों के संजाल से मुक्ति दिलाकर जीएसटी लागू करना, न केवल ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की संकल्पना को साकार करता है, बल्कि पूरे देश में आर्थिक एकता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा की नई संस्कृति लेकर आया. इसके माध्यम से भारत का राष्ट्रीय बाज़ार एकीकृत हुआ, स्थानीय उत्पादों और उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिला. यह केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समावेशी विकास का साधन भी बना और अब तो जीएसटी-नेक्स्ट जेनेरेशन रिफॉर्म ने तो व्यवसाय के लिए सरल और सुगम कर ढांचा प्रस्तुत किया, राज्य और केंद्र के राजस्व को संतुलित किया और निवेशकों का विश्वास बढ़ाया. आम भारतीय इन कर सुधारों का प्रत्यक्ष लाभार्थी है.

'भारत स्व से साक्षात्कार कर रहा…'

मोदी जी का योगदान केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं है. 'विकास भी-विरासत भी' के मंत्र के साथ मोदी जी के नेतृत्व में पूरा भारत में एक नवीन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी और सहभागी बन रहा है. भारत स्व से साक्षात्कार कर रहा है. कुत्सित राजनीति के कारण अपने ही देश में उपेक्षा और तुष्टीकरण का दंश झेलने को विवश सनातन आस्था गौरवान्वित हो रही है. कौन भूल सकता है 22 जनवरी 2024 का वह ऐतिहासिक अवसर जब पांच शताब्दियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला के भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प पूर्ण हुआ. आखिर भारत को इसी दिन की तो प्रतीक्षा थी. इस चिरप्रतीक्षा के पूरा होने का श्रेय आदरणीय मोदी जी को ही है. इसी प्रकार काशी-विश्वनाथ धाम का पुनरुद्धार, महाकाल लोक, केदारधाम पुनरोद्धार, काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजनों के माध्यम से उत्तर और दक्षिण की सांस्कृतिक धाराओं को जोड़ना और सुनियोजित उपेक्षा और तिरस्कार से आहत पूर्वोत्तर को विकास की मुख्यधारा में लाना, ये सभी प्रयास भारत की एकात्म चेतना के पुनर्जागरण के प्रतीक बने हैं.

2014 में मोदी जी के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ ही भारत की विदेश नीति में क्रांतिकारी परिवर्तन को दुनिया ने देखा और सराहा है. 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ भारत ने वैदेशिक संबंधों में बहुपक्षीय नीति को अपनाया है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और हाल में ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक कार्रवाइयों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति अडिग है.

मोदी जी के नेतृत्व में देश के अंदर आर्थिक नीतियों ने भी एक नई कथा लिखी जा रही है. आधार, जनधन और मोबाइल की ट्रिनिटी ने डिजिटल क्रांति को जन्म दिया. आज भारत में UPI लेन-देन की नई परिभाषा गढ़ रहा है. मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने युवाओं को नयी उड़ान दी. ग्रामीण भारत में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों ने आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा. कृषि, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सभी क्षेत्रों में भारत ने अभूतपूर्व गति प्राप्त की. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने अंतरिक्ष में चंद्रयान और गगनयान जैसे अभियानों के माध्यम से नित नए इतिहास रचे हैं. डिजिटल इंडिया के अंतर्गत भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा उपभोक्ता देश बन चुका है. डीप टेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5जी, क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है. यह सब प्रधानमंत्री जी के स्पष्ट दृष्टिकोण और नवाचारोन्मुख नीतियों का परिणाम है.

मोदी जी का नेतृत्व इस अर्थ में अद्वितीय है कि उन्होंने शासन को जन-आंदोलन में बदला. स्वच्छ भारत अभियान में बच्चे-बच्चे ने झाड़ू उठाया, जनधन योजना में गरीब ने बैंक खाता खोला, डिजिटल लेन-देन में सामान्य दुकानदार भी सहभागी बना. 40 वर्षों तक उत्तर प्रदेश में मासूम बच्चों के असमय काल-कवलित होने का कारक रहे इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन यदि आज संभव हुआ है तो इसके मूल में प्रधानमंत्री जी का स्वच्छ भारत मिशन की प्रेरणा ही है. यह सब दर्शाता है कि उन्होंने शासन को केवल नीतिगत दस्तावेज़ नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामाजिक आंदोलन में परिणत किया.

महिला सशक्तिकरण पर मोदी जी ने विशेष बल दिया है. बेटियों की शिक्षा, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं बनीं. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने समाज में सकारात्मक सोच पैदा की. महिलाओं की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ी. संसद और विधानसभा में आरक्षण का प्रावधान इस दिशा में ऐतिहासिक कदम है. स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई शक्ति मिली है.

प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण केवल वर्तमान की चुनौतियों तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले शताब्दी वर्ष 2047 तक फैला हुआ है. आज का भारत अमृतकाल के महान संकल्पों से जुड़ चुका है. लालकिले के प्राचीर से उद्घोषित 'पंच प्रण' इन संकल्पों की आत्मा है, जिसकी पूर्ति में पूरा देश समवेत स्वर व एकनिष्ठ भाव के साथ अपनी भूमिका निभाने को तत्पर है. 'विकसित भारत@2047 का उनका स्वप्न केवल आर्थिक समृद्धि का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व, ज्ञान-विज्ञान में प्रगति, हरित ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में अग्रणी भूमिका निभाने का है. वे चाहते हैं कि भारत गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन से मुक्त होकर विश्व के नेतृत्व में पुनः स्थापित हो. इस लक्ष्य की प्राप्ति में वे युवा शक्ति, मातृशक्ति और श्रमबल को साझेदार बना रहे हैं. यही कारण है कि उन्होंने इसे केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर ‘सबका प्रयास’ का मंत्र दिया है. 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' का स्वप्न अब यथार्थ होने की ओर अग्रसर है.

मोदी जी की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि उन्होंने भारत के लोगों में आत्मविश्वास जगाया है. पहले भारत के नागरिक स्वयं को हीनभावना से ग्रसित मानते थे, लेकिन अब वे गर्व से कहते हैं कि वे भारतीय हैं. यह आत्मविश्वास ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है. यही आत्मविश्वास भारत को एक भारत-श्रेष्ठ भारत की दिशा में आगे बढ़ा रहा है. उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक सांस्कृतिक एकता की यह धारा प्रवाहित हो रही है. 

यह कितना सुंदर संयोग है कि सृष्टि शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती और एक भारत-श्रेष्ठ भारत के शिल्पी यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन एक ही दिवस पर होता है. दोनों ही सृजन के प्रणेता हैं, दोनों ही नवनिर्माण के संवाहक हैं. यह प्रधानमंत्री मोदी जी ही हैं, जिन्होंने हर भारतीय को भारत की डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी और डाइवर्सिटी की त्रिवेणी के महत्व को समझाया. भारत को उसके पोटेंशियल से परिचित कराया. 

राष्ट्र जागरण के इस यज्ञ के सुफल के रूप में ही 'नए भारत' की रचना संभव हुई. आज जब मोदी जी जीवन के अमृतकाल में प्रवेश कर रहे हैं, तो यह अवसर केवल उनके जीवन का पर्व नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का उत्सव है. यह वह क्षण है जब हम अतीत की तपस्या को प्रणाम करते हैं, वर्तमान की उपलब्धियों का स्मरण करते हैं और भविष्य के स्वप्न को संकल्पित करते हैं. प्रधानमंत्री जी के अमृतकाल के इस नवीन पर्व के शुभारंभ पर उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से उन्हें दीर्घायु होने और यशस्वी जीवन की अनंत शुभकामनाएं प्रेषित हैं. उनका नेतृत्व और मार्गदर्शन हमें इसी प्रकार प्राप्त होता रहे, यही कामना है.

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