भारत की ओर रुख: L1 वीजा छोड़ अमेरिका से लौटी महिला ने साझा किया अपने फैसले का कारण

बेंगलुरु 
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक महिला ने अमेरिका में अपना L1 वीजा छोड़ने के अपने फैसले को अब तक का सबसे बेहतरीन कदम बताया। उन्होंने यह फैसला H-1B वीजा की तीन लॉटरी में असफल होने के बाद लिया। बता दें कि L1 वीजा, एक तरह का इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर वीजा है, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने कर्मचारियों को भारत से अमेरिकी शाखाओं में शिफ्ट करने की अनुमति देता है।
  
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्केले की पूर्व छात्रा राधिका अग्रवाल ने X पर एक पोस्ट में अपना अनुभव शेयर किया, जो अब वायरल हो रहा है। उन्होंने लिखा, "अमेरिकी वीजा सिस्टम के साथ मेरा एक पूरा अनुभव रहा: H-1B लॉटरी में तीन बार चूक, इस दौरान एक क्रॉस-बॉर्डर लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप, आखिरकार L1 वीजा की मंजूरी और फिर 2019 में घर वापस लौटने का फैसला, उस L1 वीजा को छोड़ देना जिसे मैं इतनी शिद्दत से चाहती थी।"

अग्रवाल ने स्वीकार किया कि वह अब भी पूरी तरह से यह नहीं बता पाती कि उन्होंने यह अवसर क्यों छोड़ा, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि यह सही निर्णय था। उन्होंने कहा, "मैं आज भी पूरी तरह से यह नहीं समझा सकती कि मैंने 6 साल पहले घर वापस आने के लिए L1 क्यों छोड़ा, लेकिन मैं अब कह सकती हूं कि यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन फैसला था।"

उन्होंने अपने इस फैसले के 4 मुख्य कारण गिनाए-
    भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम से सीखने का मौका।
    जीवन के महत्वपूर्ण पलों में अपने माता-पिता के करीब रहना।
    बाहरी जैसा महसूस किए बिना एक मजबूत समुदाय का हिस्सा बनना।
    वीजा की स्थिति की चिंता किए बिना करियर में जोखिम लेने की आजादी।

अग्रवाल ने उन लोगों को भी प्रोत्साहित किया जो भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, "यदि आप नए H-1B घोषणा (या सामान्य माहौल) को देख रहे हैं और सोच रहे हैं कि 'क्या मुझे वापस चले जाना चाहिए?' तो यह आपके लिए एक संकेत है कि इसका जवाब 'हां' है।"

पिछले छह वर्षों में अग्रवाल ने भारत में विशेष रूप से कंज्यूमर टेक और कंज्यूमर ब्रांड्स के क्षेत्र में संस्थापकों, ऑपरेटरों और निवेशकों का एक मजबूत नेटवर्क बनाया है। उन्होंने उन लोगों को अपनी पृष्ठभूमि के साथ उनसे संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह उन्हें अपने नेटवर्क के लोगों से जोड़कर उनके लिए यह बदलाव आसान बना देंगी।

यूजर्स की प्रतिक्रियाएं
उनकी पोस्ट पर कई उपयोगकर्ताओं ने प्रतिक्रिया दी। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “मैंने भी अपना L1A छोड़ा था, इसलिए मैं आपकी बात पूरी तरह समझ सकता हूं। लेकिन जब आप यह फैसला अपनी मर्जी से लेते हैं और जब आपको यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इसमें बहुत बड़ा अंतर होता है। बहुत से लोगों के लिए निराशा का कारण बाद वाली स्थिति होती है। उनमें से कुछ के पास लोन है, कुछ के बच्चे हैं, और कुछ रिश्ते में हैं। उन्हें फैसले लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।"

एक अन्य उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की, "आपकी यात्रा बताती है कि करियर के विकल्पों को व्यक्तिगत मूल्यों और जीवन की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना कितना महत्वपूर्ण है। यह देखना प्रेरणादायक है कि आपने घर वापस आकर कैसे तरक्की और समुदाय पाया।” एक उपयोगकर्ता ने H-1B धारकों के लिए दांव को बहुत ऊंचा बताया। उन्होंने कहा, "अधिकांश H-1B धारकों के लिए यह जीवन या मृत्यु का मामला है, क्योंकि अमेरिका में नौकरी खोने और घर लौटने के सामाजिक परिणाम बहुत अधिक हैं – परिवार और समाज से बहिष्कृत होने का डर। यह 100k डॉलर का मामला नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक परिणामों से भी लड़ना पड़ता है।"

H-1B वीजा की फीस
यह सब ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B कार्यक्रम के आवेदनों पर 100,000 अमेरिकी डॉलर (88 लाख रुपये से अधिक) का वार्षिक शुल्क लगाने का आदेश दिया था। घोषणा में कहा गया था कि मौजूदा वीज़ा धारकों सहित कर्मचारियों को तब तक प्रवेश से वंचित रखा जाएगा जब तक कि उनके नियोक्ता यह राशि भुगतान नहीं करते। सार्वजनिक चिंता और भ्रम के बाद, व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि नया शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होता है, वर्तमान धारकों पर नहीं।

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