सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर करबला तालाब निर्माण रोक, वेटलैंड अथॉरिटी ने कलेक्टर को निर्देशित किया

रायपुर

छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने राजधानी के करबला तालाब में किए जाने वाले डेढ़ करोड़ के नए निर्माण कार्य और अन्य कार्यों पर तत्काल रोक लगाने रायपुर कलेक्टर को रायपुर नगर निगम आयुक्त को आदेशित किया है. यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर की गई है.

दरअसल, करबला तालाब के साथ अन्य तालाब जैसे बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध और अन्य तालाबों की जांच के लिए छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को मई 2023 में आदेशित किया था. रायपुर कलेक्टर ने रायपुर वन मंडल अधिकारी की अध्यक्षता में रायपुर के बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध और अन्य तालाबों को दरकिनार कर सिर्फ करबला तालाब के लिए जांच दल गठित किया था.

रायपुर वन मंडल अधिकारी ने करबला तालाब की जांच रिपोर्ट जुलाई 2023 में कलेक्टर को सौप दी. लेकिन यह रिपोर्ट आज तक कलेक्टर ने वेटलैंड अथॉरिटी को नहीं सौंप है. इस पर रायपुर शहर के ईएनटी विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राकेश गुप्ता ने सूचना का अधिकार के तहत कलेक्टर कार्यालय से जानकारी मांगी. इस पर डॉ. राकेश गुप्ता ने सितम्बर 2025 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य सचिव को जांच रिपोर्ट के साथ शिकायती पत्र भेजा.

जांच रिपोर्ट में करबला तालाब पर निजी कंपनी द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत 1,13,61,323.00 रुपए के कई कार्य वेटलैंड रुल के विरुद्ध कराए जाने प्रस्तावित पाए गए, इसलिए जांच दल ने इन कार्यों को न करने की सलाह दी थी. उसके बावजूद भी फरवरी-मार्च 2024 में प्रतिबंधित कार्य कराए गए, जिनमें हाईएस्ट फ्लड लेवल (अधिकतम बाढ़ स्तर) से 50 मीटर के अंदर पेवर लगाना इत्यादि.

डॉक्टर गुप्ता ने शिकायत पत्र में बताया कि अब करबला तालाब पर डेढ़ करोड़ रुपए लागत की नई रिटेनिंग वॉल और अन्य कार्य करना प्रस्तावित किया गया है, जो कि वेटलैंड के नियमों के विरुद्ध है. इस पर वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को आदेश जारी कर करबला तालाब की 2023 की जांच रिपोर्ट तलब करने के साथ करबला तालाब में प्रस्तावित निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने रायपुर नगर निगम आयुक्त को निर्देशित करने कहा गया है.

क्या है प्रतिबंधित गतिविधियां
वेटलैंड रूल्स 2017 के अनुसार 2007 से आज तक के औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल से 50 मीटर के अन्दर कोई भी स्थाई प्रकृति का निर्माण नहीं कराया जा सकता है जैसे कि पानी के चारों और बनाई जाने वाली रिटेनिंग वाल, मेड पर पाथवे, पेवर, सड़क, भवन इत्यादि. डॉ. गुप्ता ने बताया कि चूंकि करबला तालाब, बूढा तालाब, महाराज बंध, तेलीबांधा जैसे अन्य तालाब जो कि क्षेत्रफल में 2.25 हेक्टेयर से बड़े हैं पर मान. सर्वोच्च न्यायलय के आदेश अनुसार पुराने नियम (2010 के) लागू होते है सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस लिए औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल साल 2000 से निकालने होंगे.

क्या पाया गया 2023 की जांच में
2023 की जांच रिपोर्ट में लिखा है कि करबला जलाशय में सौंदरीकरण हेतु निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है. जिसके अंतर्गत पार्किंग व्यवस्था, सीसी रोड, रेलिंग मरम्मत, रिटेनिंग वाल मरम्मत, प्रसाधन भवन इत्यादि कार्य प्रस्तावित है. मौका स्थल जांच उपरांत पाया गया कि उक्त कार्य के क्रियांनवयन से जलाशय के जल धारण क्षमता, जल क्षेत्रफल प्रभावित क्षेत्र कम होने के साथ-साथ जलाशय पर आश्रित जीव जंतुओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है जिससे आद्र भूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 में उल्लेखित नियम का उल्लंघन होगा. साथ ही इससे जलाशय का जल क्षेत्रफल गैर आद्र भूमि उपयोग हेतु परिवर्तित हो जायेगा.

वेटलैंड अथॉरिटी को आरटीआई का सहारा लेने दिया सुझाव
डॉ. गुप्ता ने वेटलैंड अथॉरिटी को सलाह दी कि चूंकि कलेक्टर रायपुर करबला जलाशय की जुलाई 2023 की जांच रिपोर्ट उनके बार-बार रिमाइंडर देने के बावजूद वेटलैंड अथॉरिटी को प्रस्तुत नहीं कर रहे है, और अन्य व्यक्तियों को आरटीआई में दे चुके हैं इसलिए वेटलैंड अथॉरिटी को भी कलेक्टर कार्यालय में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत कर करबला जलाशय की जांच रिपोर्ट प्राप्त कर लेनी चाहिए. दूसरा आवेदन वेटलैंड अथॉरिटी को कलेक्टर कार्यालय में यह जरूर लगाना चाहिए कि वेटलैंड अथॉरिटी के मई 2023 के आदेश के बावजूद और बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी कलेक्टर बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराज बंध और रायपुर के अन्य तालाबों की जांच क्यों नहीं कर रहे हैं?

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