भारत का अगला फाइटर जेट गेम चेंजर! S-400 और THAAD भी इसके आगे पड़ेंगे फीके

बेंगलुरु

देश और दुनिया के हालात लगातार बदल रहे हैं. अमेरिका और इजरायल का ईरान पर हमला और रूस-यूक्रेन युद्ध ने सामरिक स्थिति को बदलकर रख दिया है. इधर, ऑपरेशन सिंदूर ने दक्षिण एशिया के नेशनल डिफेंस सिस्‍टम में हलचल पैदा कर दी है. इन्‍हें देखते हुए हर देश अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है. मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही एडवांस्‍ड फाइटर जेट डेवलप करने या फिर उसे खरीदने की प्रक्रिया तेज हो गई है. भारत की सीमा एक तरफ चीन और बांग्‍लादेश से लगती है तो दूसरी तरफ पाकिस्‍तान है, ऐसे में नेशनल सिक्‍योरिटी को अपग्रेड करने के साथ ही उसे मजबूत करना काफी जरूरी है. ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के आधार पर एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल को डेवलप करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

दूसरी तरफ, 5th जेनरेशन फाइटर जेट को देश में ही बनाने के लिए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप डिजाइन तैयार करने के लिए सरकार ने ₹15000 करोड़ का फंड भी आवंटित कर दिया है. अब इसके इंजन में ऐसी टेक्‍नोलॉजी एड की जा रही है, जिससे 6th जेनरेशन के फाइटर जेट बनाने की राह काफी आसान हो जाएगी. इस टेक्‍नोलॉजी की खासियत ऐसी है, जिसके सामने अमेरिकी फिफ्थ जेन जेट F-35 और चीन का J-35 जेट भी बौना साबित हो जाएगा.

AMCA प्रोजेक्‍ट को पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट डेवलप करने के लिए लॉन्‍च किया गया है. इसमें भारत-फ्रांस द्वारा संयुक्‍त रूप से डेवलप किए जाने वाले 120kN इंजन का इस्‍तेमाल किया जाएगा. अब इस शक्तिशाली जेट इंजन में एक और टेक्‍नोलॉजी एड किया जाने वाला है, जिससे यह 6वीं पीढ़ी के फाइटर जेट की कैटेगरी में आ जाएगा. इस एयरक्राफ्ट में यूज होने वाले इंजन को डीआरडीओ का गैस टर्बाइन रिसर्च इस्‍टेब्लिशमेंट (GTRE) और फ्रांस की डिफेंस कंपनी साफ्रान मिलकर डेवलप कर रहा है. इस इंजन में फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्‍टम एड किया जा रहा है. FADEC को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे परफॉर्मेंस बढ़ने के साथ ही इसका मेंटेनेंस कॉस्‍ट भी कम होगा. इसके अलावा इसका इस्‍तेमाल AMCA Mk1 और एडवांस्‍ड AMCA Mk2 फाइटर जेट में भी किया जा सकेगा.

FADEC सिस्‍टम की 4 प्रमुख विशेषताएँ

120kN इंजन के लिए अगली पीढ़ी की FADEC प्रणाली को इस तरह विकसित किया गया है कि यह AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) की स्टील्थ, सुपरक्रूज़ और मल्‍टीपल मिशन से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं. इस सिस्‍टम की ये खासियत काफी महत्‍वूर्ण हैं -:

डेटा कैप्चर और एनालिसिस: नई FADEC सिस्‍टम इंजन के सेंसर से कहीं अधिक मात्रा में डेटा एकत्र करने में सक्षम है, जिससे उसके संचालन की स्थिति की गहरी समझ प्राप्त होती है. उन्नत एनालिटिक्स के उपयोग से यह प्रणाली न केवल रखरखाव की जरूरतों का पहले से अनुमान लगा सकती है, बल्कि संभावित खराबियों की पहचान कर सकती है और डुप्लिकेट इनपुट सिग्नलों के बीच विसंगतियों को भी हल कर सकती है. यह पूर्वानुमानित रखरखाव क्षमता (predictive maintenance capability) AMCA की सर्विस उपलब्धता बढ़ाने और रखरखाव लागत घटाने में अहम भूमिका निभाएगी.

बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी: FADEC के अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर इंजन के पैरामीटर को मिशन की जरूरतों के अनुसार डायनामिक रूप से समायोजित करते हैं, जिससे ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है. सूत्रों के अनुसार, यह नई प्रणाली ईंधन बचत में उल्लेखनीय सुधार लाती है, जिससे AMCA की रेंज और उड़ान अवधि (endurance) बढ़ती है, विशेष रूप से Mach 1.3 की सुपरक्रूज़ गति पर बिना आफ्टरबर्नर के. यह क्षमता AMCA के लंबी दूरी के मिशनों और स्टील्थ प्रोफाइल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग: इस FADEC प्रणाली की कंप्यूटिंग क्षमता पहले के संस्करणों की तुलना में 10 गुना अधिक है. इससे इंजन का नियंत्रण अत्यधिक तेज़ और सटीक हो जाता है, जो सबसोनिक से सुपरसोनिक गति तक सभी उड़ान परिस्थितियों में इंजन को सक्षम बनाता है. इसका उन्नत हार्डवेयर जटिल एल्गोरिद्म को सुलझाने में सक्षम है, जिससे भारत की गर्म और ऊंचाई वाले इलाकों में भी इंजन का प्रदर्शन सर्वोत्तम रहता है.

भविष्य के वैरिएंट्स के लिए स्केलेबिलिटी: FADEC की मॉड्यूलर डिज़ाइन इसे भविष्य के अपग्रेड्स के साथ संगत बनाती है. यह AMCA Mk1 (जो प्रारंभ में GE F414 इंजन से संचालित होगी) और Mk2 (जिसमें 120kN इंजन एकीकृत किया जाएगा) दोनों के लिए उपयुक्त है. इसे संभावित 6वीं पीढ़ी के फीचर्स जैसे डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन्स (निर्देशित ऊर्जा हथियार) और स्वॉर्म ड्रोन नियंत्रण प्रणाली के साथ इंटीग्रेट करने के लिए भी तैयार बनाती है. इनका उपयोग AMCA Mk2 में साल 2040 तक किए जाने की योजना है.

6th जेनरेशन फाइटर जेट

भारत के स्वदेशी 120 किलोन्‍यूटन (kN) श्रेणी के इंजन के लिए विकसित किया जा रहा नया FADEC (Full Authority Digital Engine Control) सिस्टम एयरो-इंजन टेक्नोलॉजी में नया मानक स्थापित करने जा रहा है. यह अत्याधुनिक प्रणाली 5वीं और संभावित रूप से 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए तैयार की जा रही है. FADEC आधुनिक एयरो-इंजनों का सबसे अहम हिस्सा है, जो इंजन के परफॉर्मेंस को नियंत्रित करता है. यह फ्यूल फ्लो, थ्रस्ट और इंजन की वैरिएबल ज्योमेट्री जैसे मानकों को डिजिटल तरीके से सटीकता से नियंत्रित करता है. ‘idrw.org’ के अनुसार, नए FADEC में अपने पिछले वर्जन की तुलना में 10 गुना अधिक कंप्यूटिंग क्षमता होगी. इससे यह बेहद जटिल एल्गोरिद्म को प्रोसेस करने और रीयल-टाइम डेटा को अत्यंत सटीकता से प्रबंधित करने में सक्षम होगा. इससे इंजन के परफॉर्मेंस का ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल लागत में कमी जैसे लाभ मिलेंगे. यह बढ़ी हुई कम्प्यूटिंग क्षमता एडवांस्ड एनालिटिक्स के एकीकरण को भी संभव बनाती है, जिससे इंजन अपने आप प्रदर्शन सुधारने और भविष्य की मेंटेनेंस जरूरतों का अनुमान लगाने में सक्षम होगा.

AMCA और TEDBF कार्यक्रम को मिलेगी ताकत

120kN श्रेणी के इस इंडो-फ्रेंच इंजन का विकास भारत और फ्रांस की कंपनी सैफरन (Safran) के सहयोग से हो रहा है. यह परियोजना एक सरकार-से-सरकार समझौते (G2G) के तहत संचालित है, जिसमें इंजन की पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) भारत के पास रहेंगे. इसका अर्थ है कि भारत भविष्य में इस तकनीक को स्वतंत्र रूप से विकसित और अनुकूलित कर सकेगा. नया FADEC सिस्टम भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और नौसेना के ट्विन इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) जैसे कार्यक्रमों के लिए गेमचेंजर साबित होगा. इसकी मदद से विमान लंबे समय तक ऑपरेशनल में रह सकेंगे और मेंटेनेंस लागत एवं डाउनटाइम में भारी कमी आएगी.

चीन के J-20 और J-35 का जवाब

इंजन में इस्तेमाल की जा रही सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट्स (CMC) और सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड्स जैसी आधुनिक तकनीकें उच्च तापमान पर भी बेहतर कूलिंग और टिकाऊपन सुनिश्चित करेंगी. इससे न केवल इंजन की उम्र बढ़ेगी बल्कि 5वीं पीढ़ी के जेट्स के लिए आवश्यक थर्मल एफिशिएंसी भी हासिल होगी. AMCA को तैयार करने का लक्ष्य 2035 तक रखा गया है. नया FADEC सिस्टम भारतीय फाइटर बेड़े को ऐसी क्षमता देगा, जिससे वह चीन के J-20 और J-35 जैसे स्टील्थ फाइटर्स का प्रभावी जवाब दे सके. FADEC का फोकस फ्यूल एफिशिएंसी और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस पर है. इससे ऑपरेशनल लाइफ-सायकल लागत (estimated $6-7.2 billion) दोनों को बैलेंस करने में मदद मिलेगी.

 

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