8th Pay Commission: कर्मचारियों के हाथ में कितनी बढ़त, बेसिक सैलरी पर नया असर

नई दिल्ली
. केंद्र सरकार ने अपने 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनधारकों के लिए आठवें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है. अब आठवें वेतन पैनल को 18 महीने में अपनी सिफारिशें सरकार को देनी होगी. पैनल बताएगा कि फिटमेंट फैक्टर कितना रखा जाए और इसी से नई बेसिक सैलरी तय होगी. यानी अभी सैलरी कितनी बढ़ेगी यह नहीं पता चलेगा. यह 18 महीने बाद समझ आएगा. रिपोर्ट के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर 1.86 फीसदी से लेकर 2.47 फीसदी तक रह सकता है. 1 जनवरी 2026 से आठवें वेतन आयोग को लागू माना जाएगा. उसके बाद जितनी देरी नया वेतन लागू होने में होगी वह एरियर के तौर पर जुड़ता जाएगा.

पहले समझे हैं कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस क्या होता है? ToR आयोग के कामकाज का दिशानिर्देश दस्तावेज है. यह आयोग के दायरे (scope), उद्देश्यों (objectives) और सीमाओं (boundaries) को परिभाषित करता है. इसमें यह तय होता है कि आयोग क्या-क्या समीक्षा करेगा, जैसे सैलरी स्ट्रक्चर, अलाउंस, पेंशन आदि. बिना ToR के आयोग का काम शुरू नहीं हो सकता.
कितनी बढ़ेगी सैलरी?

सैलरी बढ़ाने के लिए एक तय फॉर्मूला है जिसमें सबसे बड़ा किरदार फिटमेंट फैक्टर अदा करता है. सातवें वेतन आयोग में यह 2.57 फीसदी था. तब न्यूनतम बेसिक सैलरी 6000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हो गई थी. इस बार अगर 2.47 फीसदी का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो नई बेसिक सैलरी 30000 रुपये के करीब पहुंच सकती है. आइए कैलकुलेशन के जरिए इसे समझने की कोशिश करते हैं. मान लीजिए कि आपकी बेसिक पे अभी 18000 रुपये है तो 2.47 फीसदी के फिटमेंट फैक्टर के साथ यह सैलरी बढ़कर 44460 रुपये हो जाएगी. हालांकि, अगर फिटमेंट फैक्टर 1.86 फीसदी रहता है तो नया बेसिक पे 33480 रुपये होगा.

रंजना प्रकाश देसाई, जो बनीं 8वें वेतन आयोग की चेयरपर्सन; दो मेंबर भी होंगे

भारत सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देते हुए 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही केंद्रीय कर्मचारियों के वेतनमान और भत्तों में इजाफा होगा। यही नहीं राज्य सरकारों के कर्मचारी भी इस वेतन आयोग के आधार पर भविष्य में वेतन बढ़ोतरी की राह देख रहे हैं। आयोग का चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को बनाया गया है। वह सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस हैं और परिसीमन आयोग का भी वह नेतृत्व कर चुकी हैं। गुजरात सरकार ने भी उनकी सेवाएं ली थीं। उन्हें समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सिफारिशें देने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।

वह सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर 2014 में सेवानिवृत्त हुई थीं, लेकिन उसके बाद भी किसी ना किसी भूमिका में सक्रिय रही हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्हें बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष का पद मिला था। इसके अलावा परिसीमन आयोग का भी नेतृत्व किया और उनके ही मार्गदर्शन में जम्मू-कश्मीर में सीटों का पुनर्गठन हुआ है। उनकी अध्यक्षता में 7 नई सीटों का गठन हुआ और जम्मू-कश्मीर में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गई। यही नहीं लोकपाल चयन समिति का भी वह नेतृत्व कर चुकी हैं।

रंजना प्रकाश देसाई के अलावा वेतन आयोग में दो सदस्य भी बनाए गए हैं। आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर पुलक घोष इसके सदस्य के तौर पर काम करेंगे। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव पंकज जैन को सदस्य-सचिव के नाते जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका प्रशासन का लंबा अनुभव है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को हुआ था। उन्होंने 1970 में एल्फिंस्टन कॉलेज से कला स्नातक और 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से लॉ ग्रैजुएट की डिग्री हासिल की थी।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई 30 जुलाई 1973 को कानूनी पेशे में शामिल हुईं, जब न्यायमूर्ति प्रताप बार में थे तब उन्होंने उनके कनिष्ठ के रूप में काम किया। यहां उन्हें कई दीवानी और आपराधिक मामलों में पेश होने का अवसर मिला। उन्होंने अपने पिता एसजी सामंत के साथ भी काम किया, जो एक मशहूर क्रिमिनल लॉयर थे। 1979 में उन्हें सरकारी वकील नियुक्त किया गया।

कितनी होगी ग्रॉस सैलरी

ग्रॉस सैलरी में बेसिक सैलरी के साथ हाउस रेंट अलाउंस और डीए भी जुड़ता है. डीए यानी डियरनेस अलाउंस महंगाई के अनुसार दिया जाता है. यह साल में 2 बार अपडेट किया जाता है. अभी की कैलकुलेशन के लिए डीए को शून्य मान लेते हैं. हाउस रेंट अलाउंस भी 3 श्रेणियों में बांटा जाता है. मेट्रो सिटी में रहने वालों को बेसिक का 30 परसेंट, टियर-2 सिटी के लोगों को 20 परसेंट और टियर-3 सिटी के लोगों को 10 परसेंट हाउस रेंट अलाउंस मिलता है. अब ग्रॉस सैलरी कुछ इस तरह होगी.

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