25 साल बाद इंदौर में, 10 साल बाद भोपाल में रिकॉर्ड तोड़ा गया, मध्य प्रदेश में ठंड का कहर जारी

भोपाल 

मध्य प्रदेश में अब मौसम साफ होने के साथ ही धीरे-धीरे ठंड अपना पैर पसारने लगी है. बुधवार-गुरुवार रात प्रदेश के कई शहरों के न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई. इस दौरान राजगढ़ जिले का न्यूनतम तापमान सबसे कम 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अतिरिक्त शाजापुर के गिरवर में 11.6 डिग्री तो वहीं इंदौर में 12.1 डिग्री और राजधानी भोपाल में 13 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार अक्टूबर के आखिरी में जमकर बारिश का दौर देखा गया. हालांकि, इसका असर आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंड वह कोहरे के रूप में देखने को मिलेगा.

1 हफ्ते पहले ही पड़ने लगी भीषण ठंड

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार ठंड का असर नवंबर के दूसरे सप्ताह की बजाय एक सप्ताह पहले ही महसूस होने लगा है। आमतौर पर मध्य प्रदेश में नवंबर के दूसरे पखवाड़े से सर्दी तेज होती है, जो जनवरी तक बनी रहती है, लेकिन इस साल रिकॉर्ड गिरावट के साथ ठंड ने पहले ही दस्तक दे दी है।
उत्तर-पूर्वी दिशा से आ रही ठंडी हवाएं

प्रदेश में ठंड का मुख्य कारण उत्तर-पूर्वी दिशा से आ रही ठंडी हवाएं हैं। मानसून के बाद जैसे-जैसे नमी कम होती है, रातें जल्दी ठंडी होने लगती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद बर्फ पिघलती है और ठंडी हवा मैदानों तक पहुँचती है। हवा का रुख इस बार दक्षिण-पश्चिमी से उत्तर-पूर्वी दिशा में होने के कारण पूरे प्रदेश में ठंड की तीव्रता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले दो रातों में प्रदेश के कई शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया।

इस साल नवंबर के पहले सप्ताह से ही ठंड बढ़ी मौसम विशेषज्ञों की माने तो प्रदेश में आमतौर पर ठंड की दस्तक नवंबर के दूसरे पखवाड़े से होती है। यानी 15 नवंबर से ठंड का असर तेज होता है, जो जनवरी तक रहता है, लेकिन इस बार तेज सर्दी का असर एक सप्ताह पहले से ही हो रहा है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि मानसून के बाद जैसे-जैसे नमी घटती है, रातें जल्दी ठंडी होने लगती हैं। पहाड़ों पर बर्फबारी होती है, बर्फ पिघलती है और ठंडी हवा मैदानों तक आती है। हवा का रुख दक्षिण-पश्चिमी से उत्तर-पूर्वी दिशा में होता है, जिसे ‘विंड पैटर्न सेट होना’ कहा जाता है। इन सभी वजहों से प्रदेश में ठंड का असर बढ़ा है।

झाबुआ में तेज ठंड, स्कूलों का समय बदला झाबुआ में तीन दिन के दौरान न्यूनतम तापमान में 8.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। ठंड बढ़ने से कलेक्टर नेहा मीना ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। इसके अनुसार, नर्सरी से कक्षा 3 तक की कक्षाएं सुबह 9 बजे से पहले और कक्षा 4 से कक्षा 12 तक की कक्षाएं सुबह 8 बजे से पहले नहीं लगेंगी। यह आदेश झाबुआ जिले की सभी शैक्षणिक संस्थाओं पर लागू होगा।

ठंड के साथ कोहरे का असर भी बढ़ेगा मौसम विभाग के मुताबिक अब ठंड के साथ कोहरा भी बढ़ेगा। फिलहाल, देर रात और अलसुबह ठंड का असर ज्यादा है। वहीं सुबह हलका कोहरा भी है, जो आने वाले दिनों में बढ़ जाएगा। अभी मंडला में सबसे कम 1-2 किलोमीटर विजिबिलिटी मंडला में देखने को मिली है। जबलपुर, रीवा और सतना में यह 2 से 4 किलोमीटर रही।

पिछले 10 साल से नवंबर में ठंड का ट्रेंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। अबकी बार भी ऐसा ही मौसम रहेगा। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है।

वहीं, भोपाल में दिन ठंडे रहे। 30 अक्टूबर को दिन का तापमान 24 डिग्री रहा। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 25 साल में अक्टूबर का यह सबसे ठंडा दिन रहा। उज्जैन, छतरपुर, नरसिंहपुर समेत कई शहरों में पारा 24 डिग्री के नीचे ही रहा।


अभी से टूट रहे रिकॉर्ड

 सबसे ठंडा शहर राजगढ़ रहा, जहां तापमान एक ही रात में 2 डिग्री की गिरावट के बाद 9 डिग्री पर आ गया। इंदौर में पारा 10.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो नवंबर महीने के पिछले 10 साल के रिकॉर्ड में सबसे कम है। साल 2015 से 2024 के बीच इंदौर में इतना कम न्यूनतम तापमान कभी नहीं दर्ज हुआ था। साल 2017, 2020 और 2022 में पारा करीब 11 डिग्री के आसपास ही रहा था।
राजधानी भोपाल का हाल कुछ ऐसा…

भोपाल में तापमान 2 डिग्री गिरकर 11 डिग्री हो गया। पिछले 10 साल में पांच बार ही तापमान इतना नीचे आया है। वहीं, ग्वालियर में 11.3 डिग्री, जबलपुर में 14.6 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम की इस अचानक बदलाव ने आम नागरिकों के साथ-साथ स्कूल और कार्यालयों की दिनचर्या भी प्रभावित की है। झाबुआ में स्कूलों की टाइमिंग बदली जा चुकी है ताकि बच्चों को ठंड में परेशानी न हो।
पहले से भी खतरनाक ठंडी पड़ेगी

 विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की तेज सर्दी सामान्य से पहले और तीव्र है। इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों में हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ज्यादा ठंड महसूस हो रही है। लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है।

प्रदेशवासियों को ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े, चाय और हीटिंग उपकरण का उपयोग करने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रात का तापमान और नीचे गिर सकता है। इसलिए लोग विशेष सतर्क रहें। इस तरह से मध्य प्रदेश में इस बार की कड़ाके की ठंड का दौर लंबे समय तक जारी रह सकता है।

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