राजेश मिश्रा के परिवार की कुंडली में खुला राज: घर में मिले ढेरों नोट, पुलिस थक गई गिनते-गिनते

 प्रतापगढ़

 उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ, जब किसी तस्करी के मामले में इतनी बड़ी रकम बरामद हुई कि नोट गिनने वालों के हाथ थक गए. पुलिसवालों को 22 घंटे लगातार बैठ कर पैसे गिनना पड़ा. 

सुबह करीब साढ़े आठ बजे प्रतापगढ़ के मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुन्दीपुर गांव में अचानक पुलिस की एक साथ कई गाड़ियां पहुंची. थाना प्रभारी के साथ भारी पुलिस बल एक पुराने पक्के मकान की ओर बढ़ा. सूचना थी कि यहीं से जेल में बंद राजेश मिश्रा अपना पूरा नेटवर्क चला रहा है. राजेश मिश्रा वही नाम, जो कभी शराब, फिर जमीन और अब नशे के कारोबार से प्रदेश भर में कुख्यात हो चुका है. राजेश इस वक्त जेल में बंद है, लेकिन पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि उसका गिरोह वहीं से चालू था. जेल के भीतर से  डील फाइनल होती, और बाहर से उसका परिवार डिलीवरी और कैश की वसूली संभालता.

22 घंटे तक चली गिनती

जब पुलिस ने राजेश मिश्रा के घर पर दबिश दी, तो सबसे पहले अंदर से दरवाजा बंद कर दिया गया. घर में रीना मिश्रा (राजेश की पत्नी), बेटा विनायक, बेटी कोमल, रिश्तेदार यश और अजीत मिश्रा मौजूद थे. जब दरवाजा खुलवाया गया, तो सामने जो दृश्य था, उसने हर किसी को चौंका दिया.  कमरे में चारों तरफ काले पन्नियों में लिपटे नोटों के बंडल, गत्तों में पैक गांजा, और लोहे के ट्रंक में रखी स्मैक. एक कोने में इलेक्ट्रॉनिक नोट गिनने की मशीन थी, जिससे साफ था कि गिरोह सिर्फ तस्करी ही नहीं, कमाई की गिनती का पूरा इंतजाम भी रखता था.

पुलिस ने जब गिनती शुरू की तो 2,01,55,345 रुपये की नकदी बरामद हुई. इसके अलावा 6.075 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक (हेरोइन) मिली. जिसकी अनुमानित कुल कीमत  3 करोड़ रुपये से अधिक है. कहने को बस तीन घंटे का ऑपरेशन था, लेकिन नोटों की गिनती पूरी करने में 22 घंटे लग गए.

फर्जी जमानत से लेकर करोड़ों की कुर्की तक

छानबीन में सामने आया कि रीना मिश्रा और उसका बेटा विनायक मिश्रा, राजेश की जेल से रिहाई के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत में जमानत करवा चुके थे. इस खुलासे के बाद उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि पहले भी इस परिवार की ₹3,06,26,895.50 रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. यह कुर्की भी राजेश और रीना के नाम पर दर्ज की गई थी. बावजूद इसके, गिरोह ने जेल से नेटवर्क चलाना जारी रखा.

रीना मिश्र: घर बैठी माफिया क्वीन

स्थानीय पुलिस के अनुसार, रीना मिश्रा सिर्फ नाम की गृहिणी नहीं थी. राजेश मिश्रा के जेल जाने के बाद उसने ही पूरा सिंडिकेट संभाला. गांव में उसका खौफ इस कदर था कि कोई भी उसके घर की ओर नजर उठाकर नहीं देखता था. लोगों का कहना है कि मकान में कभी-कभी ट्रक रुकते थे, फिर कुछ लोग आते-जाते दिखते थे. सबको मालूम था, मगर कोई बोलता नहीं था. रीना का रोल सिर्फ घर की देखरेख का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की बुक-कीपिंग का था. वह तय करती थी किस इलाके में कितना माल जाएगा और कितनी रकम वापस आएगी. जेल में बैठे राजेश से वह रोज़ बात करती, और उसी के कहने पर डील फाइनल करती थी.

जेल की दीवारों के भीतर से चलने वाला नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, राजेश मिश्रा पहले से ही कई गंभीर मामलों में अभियुक्त है. जेल से बाहर उसकी कमान उसकी पत्नी और बच्चों के पास थी. वह फोन और मुलाकातों के ज़रिए गिरोह को निर्देश देता था कि कहाँ से माल मंगाना है, कहाँ सप्लाई करनी है, और कौन पुलिसकर्मी कब ड्यूटी पर होता है. पुलिस का कहना है कि गिरोह अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय था. बिहार और मध्य प्रदेश तक इसके तार फैले हुए हैं. प्रतापगढ़, प्रयागराज और कौशांबी के कई गांव इस नेटवर्क के रूट बने हुए थे.

एसपी दीपक भूकर बोले- यह तो बस शुरुआत है

पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ हमारी लंबी रणनीति का हिस्सा है. इस गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं, लेकिन अब इनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा. जो भी इसमें शामिल है, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त गिरोहों की फाइलें अब डिजिटल रूप से ट्रैक की जा रही हैं. कई बैंक खातों और संपत्तियों की जांच भी चल रही है.

एनडीपीएस और गैंगस्टर एक्ट में दर्ज मामले

गिरफ्तार अभियुक्तों पर एनडीपीएस एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है. फर्जी जमानत के मामले में भी पुलिस ने अलग एफआईआर की है. 

गिरफ्तार अभियुक्तों की लिस्ट:

– रीना मिश्रा, पत्नी राजेश मिश्रा (40 वर्ष)

– विनायक मिश्रा, पुत्र राजेश मिश्रा (19 वर्ष)

– कोमल मिश्रा, पुत्री राजेश मिश्रा (20 वर्ष)

– यश मिश्रा, पुत्र अजीत कुमार मिश्रा (19 वर्ष)

– अजीत कुमार मिश्रा, पुत्र पवन कुमार मिश्रा (32 वर्ष)

सभी को मानिकपुर थाना पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया.

सवा तीन करोड़ की बरामदगी 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है. बरामद नकदी और ड्रग्स की कुल कीमत करीब ₹3 करोड़ 17 लाख है. इतनी भारी मात्रा में कैश की बरामदगी ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि राजेश मिश्रा का नेटवर्क सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर उसकी अंडरग्राउंड इन्वेस्टमेंट की जानकारी मिली है. कुछ को जमीन खरीद के नाम पर और कुछ को लॉजिस्टिक कंपनी के रूप में छिपाया गया था. जांच टीमें अब बैंक खातों, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन खंगाल रही हैं. 

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