सरदार पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में सीएम योगी ने किया एकता यात्रा का शुभारंभ

 

गोरखपुर,

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न से विभूषित एवं लौह पुरुष के नाम से विख्यात सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में सोमवार को प्रदेशभर के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के लिए एकता यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जहां सरदार पटेल के राष्ट्र के प्रति योगदान को श्रद्धा भाव से याद किया तो वहीं वंदे मातरम में संशोधन और विरोध को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस राष्ट्र गीत, वंदे मातरम ने आजादी के आंदोलन में भारत की सोयी हुई चेतना को जागृत किया, उसमें पहले कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए संशोधन किया और आज फिर कुछ लोग वंदे मातरम का विरोध कर रहे हैं।
          मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, मत या मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता। व्यक्तिगत आस्था यदि राष्ट्र के आड़े आए तो उसे एक छोर पर रख देना चाहिए। पर, कुछ लोगों के लिए आज भी उनका व्यक्तिगत मत और मजहब बड़ा है। सपा के एक सासंद द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग जिन्ना को सम्मान देने के लिए होने वाले कार्यक्रम में तो शामिल होते हैं लेकिन लौह सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं होते।

वंदे मातरम भारत की सोयी चेतना को जगाने वाला गीत
नगर निगम परिसर के रानी लक्ष्मीबाई पार्क से निकली एकता यात्रा के पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद अवसर है कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के कार्यक्रम तो प्रारंभ हुए ही हैं, साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम के भी 150वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। सीएम ने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान वंदे मातरम भारत की सोयी चेतना को जगाने वाला गीत था। 1876 के बाद हर क्रांतिकारी, बच्चे, विद्यार्थी, युवा, अधेड़, बुजुर्ग, महिला, पुरुष ने इसका उद्घोष किया और आजादी आंदोलन में कूद पड़ा था। तब हर उम्र के व्यक्ति के लिए वंदे मातरम उसके जीवन का मंत्र बन गया था। देखते ही देखते वंदे मातरम का यही उद्घोष विदेशी दासता से भारत को मुक्त करने का मंत्र बन गया।

कांग्रेस ने किया संशोधन का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम का जो मंत्र भारत की आजादी का कारण बना हो, उस मंत्र को भी सांप्रदायिक बताकर कांग्रेस ने उसमें संशोधन करने का प्रयास किया। कांग्रेस ने कहा यह पांच और छह छंद का क्यों पढ़ना है, दो छंद में ही हो इसे पूरा किया जाए। जिस वंदे मातरम को कांग्रेस के 1896-97 के अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने स्वर में गाया था, उसका 1923 के अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर ने विरोध किया। वंदे मातरम का गान शुरू होते ही जौहर अध्यक्ष के पद से उठकर के चले गए। उन्होंने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। वंदे मातरम का इस प्रकार का विरोध भारत के विभाजन का दुर्भाग्यपूर्ण कारण बना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अगर उस समय मोहम्मद अली जौहर को अध्यक्ष पद से बेदखल करके वंदे मातरम के माध्यम से भारत की राष्ट्रीयता का सम्मान किया होता तो भारत का विभाजन नहीं हुआ होता।

धरती माता की उपासना का गीत है वंदे मातरम
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में कांग्रेस ने वंदे मातरम में संशोधन के लिए एक कमेटी बनाई। 1937 में उसकी रिपोर्ट आईम कांग्रेस ने कहा कि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारत माता को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इनका संशोधन कर दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि यह गीत धरती माता की उपासना का गीत है। भारत का ऋषि तो हमेशा सबका आह्वान करता रहा है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। पुत्र होने के नाते अगर मां के सम्मान में कहीं कोई चुनौती आती है हमारा दायित्व बनता है कि हम उसके खिलाफ खड़े हों।

राष्ट्रीय एकता में बाधक आस्था को रख दें एक ओर
सीएम योगी ने कहा कि मेरा यह मानना है कोई व्यक्ति हो, कोई जाति, मत या मजहब हो, वह किसी राष्ट्र से बढ़कर नहीं हो सकता है। हम सब भारतवासियों को इस बारे में ध्यान रखना होगा कि हमारी आस्था अपनी जगह है। अगर हमारी आस्था, हमारी राष्ट्रीय एकता और एक अखंडता में बाधक बन रही है तो हमें उस आस्था को एक ओर करना होगा। सबसे पहले अपनी राष्ट्रीय अखंडता के लिए प्राणपण से जूझने के लिए तैयार होना होगा। भारत के एक नागरिक के रूप में यह हमारा दायित्व है।

कुछ लोगों के लिए मत और मजहब भारत की एकता व अखंडता से बढ़कर
सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोगों के लिए आज भी भारत की एकता और अखंडता से बढ़कर उनका मत और मजहब बड़ा हो जाता है। उनकी व्यक्तिगत निष्ठा महत्वपूर्ण हो जाती है। वास्तव में ऐसे ही इस तरह के लोग संदेह के दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के विरोध का कोई औचित्य नहीं है।

जिन्ना के सम्मान के कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं वंदे मातरम का विरोध करने वाले
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 1947 में देश के विभाजन का कारण बनी। और, आज भी हम सब यह मानते थे कि जो लोग भारत के अंदर हैं, सभी भारत के प्रति निष्ठावान होकर के भारत की एकता और अखंडता के लिए कार्य करेंगे। पर, जब अखिल भारतीय स्तर पर वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजन प्रारंभ हुए तो फिर वही विरोध के स्वर फूटना प्रारंभ हो गए। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने फिर से विरोध करना प्रारंभ कर दिया। सीएम ने कहा कि यह वही लोग हैं जो भारत की अखंडता के शिल्पी लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती के कार्यक्रम में शामिल में नहीं होते लेकिन जिन्ना को सम्मान देने के किसी कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं। हम सबको याद रखना होगा अगर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान न मिला तो हमारा देश कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि उग्रवाद, नक्सलवाद, आतंकवाद से लगातार भारत की एकता और अखंडता को चुनौती मिल रही है। जो लोग भारत के राष्ट्रीय महापुरुषों, क्रांतिकारियों का अपमान करते हैं, वह प्रकारांतर में उन अलगाववादी ताकतों के दुस्साहस को बढ़ाने का ही कार्य करते हैं जिनके कारण भारत की एकता और राष्ट्रीयता को चुनौती मिलती है।

पैदा होने से पहले ही दफन कर देना होगा नए जिन्ना को
सीएम योगी ने कहा कि हमारा दायित्व बनता है हम उन कारणों को ढूंढें जो समाज को बांटने वाले हैं। जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर विभाजन नए जिन्ना को पैदा करने की साजिश का हिस्सा है। हमे ध्यान रखना होगा कि भारत के अंदर फिर से कोई जिन्ना न पैदा होने पाए। अगर जिन्ना पैदा होने का साहस करता है तो हमे उससे राष्ट्रीय एकता को चुनौती मिलने से पहले ही दफन कर देना होगा। इसके लिए भारत के हर नागरिक को खड़ा होना होगा।

प्रदेश के हर शैक्षणिक संस्थान में अनिवार्य कराएंगे वंदे मातरम का गायन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम राष्ट्र गीत के प्रति सबके मन में सम्मान का भाव होना होना चाहिए। इसके लिए वह उत्तर प्रदेश के हर विद्यालय, हर शैक्षणिक संस्थान में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कराएंगे। ताकि उत्तर प्रदेश के अंदर हर नागरिक के मन में भारत माता के प्रति, अपनी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव जागृत हो सके।

सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी
इस अवसर पर सीएम योगी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि सरदार पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी हैं। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का अहसास वर्तमान पीढ़ी को कराने के लिए सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे और व्यपाक फलक देते हुए सरदार पटेल जयंती, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए सरदार सरोवर डैम बनवाया। इसके साथ ही देशभर से लोहा एकत्र कराकर देश की माटी और लोहे से सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित कराई। सरदार पटेल की यह प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पूरी दुनिया की सबसे विशाल और विराट प्रतिमा है। यह भारत की एकता की मूर्ति के रूप में पूरे देश को मार्गदर्शन देने का माध्यम भी है।

एकता यात्रा से पूर्व मंचीय कार्यक्रम को प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह और भाजपा के महानगर संयोजक राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व राज्यसभा सदस्य जयप्रकाश निषाद आदि प्रमुख रूप से मंच पर मौजूद रहे।

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