बिरसा मुंडा जी की ‘अपना देश- अपना राज’ की अमर उद्घोषणा हर भारतीय के लिए प्रेरणा: मुख्यमंत्री

डबल इंजन सरकार में मिल रहा है जनजातीय समाज को सम्मान: मुख्यमंत्री

धरती आबा बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयन्ती पर सोनभद्र को मिली ₹548 करोड़ की 432 विकास परियोजनाओं की सौगात

बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर मुख्यमंत्री ने दी बधाई कहा, प्रभु राम और माता जानकी के पवित्र संबंध की तरह दोनों राज्यों का रिश्ता भी अटूट 

सोनभद्र में जनजातीय गौरव दिवस का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक धरोहर मंच पर जीवंत

अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित यूपी के जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने मोहा मन 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सम्मानित किया गया और वन अधिकार कानून के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को जमीन के पट्टे सौंपे गए

सोनभद्र केवल ऊर्जा राजधानी नहीं, बल्कि मानव इतिहास और प्रकृति की अद्भुत धरोहर का भी केंद्र 

सोनभद्र/ लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की डबल इंजन सरकार विकास, सुरक्षा और सुशासन को साथ लेकर आगे बढ़ रही है और जनजातीय समाज को मुख्यधारा के विकास का अग्रणी भागीदार बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही है। ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय बाहुल्य जनपद सोनभद्र के चोपन में आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर केवल स्मरण का नहीं, बल्कि जनजातीय गौरव को विकास से जोड़ने का है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा जी का संदेश ‘अबुआ देश, अबुआ राज’ आज के नए भारत में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के रूप में प्रकट हो रहा है। डबल इंजन की सरकार जनजातीय समाज की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों से प्रेरित होकर सोनभद्र और पूरे उत्तर प्रदेश का जनजातीय समाज राष्ट्र की एकता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा और विकास की मुख्यधारा में अग्रणी भागीदार बनेगा।

‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा जी को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 150 वर्ष पहले 1875 में जन्मे धरती आबा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जो संघर्ष छेड़ा, वह आज भी नए भारत के लिए मार्गदर्शक है। रांची जेल में यातनाओं के बीच उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, ब्रिटिश हुकूमत को जनजातीय समुदाय के अधिकारों को स्वीकार करने के लिए झुकना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्वतंत्र भारत में वही संघर्ष जनजातीय समाज के सम्मान, हिस्सेदारी और विकास के रूप में आगे बढ़ रहा है और डबल इंजन की सरकार इस विरासत को न्यायपूर्ण नीतियों और ठोस कार्यों में बदल रही है।

सोनभद्र की पावन धरती को उत्तर प्रदेश की ऊर्जा राजधानी, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के अद्वितीय संगम की संज्ञा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आयोजित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ कार्यक्रम में भारी संख्या में उपस्थित जनजातीय बहनों-भाइयों की सहभागिता, बदलाव की आकांक्षा और विश्वास का प्रतीक है। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सम्मानित किया गया और वन अधिकार कानून के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को जमीन के पट्टे सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोनभद्र को 548 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है, जो कनेक्टिविटी से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक, जनपद के समग्र विकास की नई दिशा तय करेंगी। 

इस अवसर पर सोनभद्र के पर्यटन स्थलों पर आधारित पुस्तिका तथा मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मीरजापुर की कुलपति द्वारा लिखित ‘धरती आबा बिरसा मुंडा’ पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिला पुलिसकर्मियों के लिए 25 स्कूटी को हरी झंडी दिखाई। ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के इस विशेष अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के जनजातीय समूह द्वारा याक नृत्य, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जनजातीय समूह तथा सोनभद्र के करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की बहुरंगी जनजातीय संस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। 

सोनभद्र की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल ऊर्जा राजधानी नहीं, बल्कि मानव इतिहास और प्रकृति की अद्भुत धरोहर का भी केंद्र है। सलखन फॉसिल पार्क में 140 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्मों के अवशेष विश्व समुदाय के लिए अद्वितीय आकर्षण हैं और यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया जाना सोनभद्र की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है। शिवद्वार पंचमुखी महादेव, ज्वालामुखी शक्तिपीठ, हाथी नाला और बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल यहां स्पिरिचुअल और इको-टूरिज्म की अपार संभावनाओं को उजागर करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली 15 जनजातियों में से 14 जनजातियां अकेले सोनभद्र में निवास करती हैं और यहां 4 लाख से अधिक जनजातीय बहन-भाइयों का जीवन मानव उद्गम और सभ्यता के इतिहास से जुड़ी एक जीवंत विरासत है।

जनजातीय गौरव के संरक्षण के लिए डबल इंजन सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बलरामपुर जनपद के इमलिया कोडर में जनजातीय संग्रहालय और छात्रावास की स्थापना की जा चुकी है तथा इसी प्रकार का ‘जनजातीय गौरव संग्रहालय’ इस कमिश्नरी क्षेत्र में भी स्थापित किया जाएगा, ताकि जनजातीय समाज की कला, लोकवाद्य, जीवनशैली और परंपराओं को संरक्षित कर अगली पीढ़ियों को प्रेरणा दी जा सके। सोनभद्र में आयोजित प्रदर्शनी में जनजातीय समाज से जुड़े वाद्ययंत्रों, लोकसामग्री और सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रदर्शन इसी दृष्टि का प्रमाण है।

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई ‘पीएम जन मन योजना’ के अंतर्गत ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ उत्तर प्रदेश के जनजातीय बहुल 517 गांवों में बुनियादी सुविधाओं और समग्र विकास का नया अध्याय लिख रहा है। प्रदेश में लगभग 11 लाख की जनजातीय आबादी सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, चित्रकूट, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, बहराइच सहित विभिन्न जनपदों में निवास करती है और इन सभी क्षेत्रों में योजनाओं को संतृप्तिकरण के लक्ष्य के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रह जाए।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून में सुधार के बाद जहां पूर्ववर्ती सरकारें निर्णय लेने से बचती रहीं और जनजातीय समुदाय का शोषण होता रहा, वहीं वर्तमान सरकार ने स्पष्ट नीति अपनाते हुए वास्तविक दावेदारों को वन भूमि के पट्टे देने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम में 1,000 से अधिक जनजातीय परिवारों को वन अधिकार पट्टे सौंपे गए हैं और इससे पहले 23,000 से अधिक पट्टे स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे जनजातीय परिवारों को न केवल भूमि पर मालिकाना हक मिला है, बल्कि दशकों पुराना भय और उत्पीड़न का चक्र भी टूट रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता है कि हर जनजातीय परिवार के पास जमीन का पट्टा, सुरक्षित आवास, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत का कार्ड, घर में शौचालय और पात्रता के अनुसार वृद्धावस्था या निराश्रित महिला पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं हों। बच्चों के लिए आंगनबाड़ी से लेकर स्कूल तक सुदृढ़ व्यवस्था, और किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, साथ ही आवास, ऊर्जा, वित्तीय समावेशन और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक संतृप्त रूप से पहुंचाया जा रहा है।

शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में सोनभद्र को मॉडल के रूप में पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किया गया है, जो पूर्णतया आवासीय है और जिसमें 240 छात्र-छात्राएं (120 बालक, 120 बालिकाएं) आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए विकासखंड रॉबर्ट्सगंज में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय, विकासखंड नगवा में आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय तथा अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्राओं हेतु रॉबर्ट्सगंज में राजकीय छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। जनपद में चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से तीन बालकों और एक बालिकाओं के लिए हैं।

उन्होंने कहा कि सोनभद्र के सभी विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें कक्षा 6 से 8 तक के बजाय अब कक्षा 12 तक के लिए विस्तारित कर दिया गया है, ताकि बालिकाओं को एक ही परिसर में सुरक्षित आवासीय सुविधा और निरंतर शिक्षा का अवसर मिल सके। ‘अभ्युदय’ कोचिंग जैसी पहलें जनजातीय और वंचित तबके के प्रतिभाशाली युवाओं को नीट और आईआईटी-जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में सहायक साबित हो रही हैं। बीओसीडब्ल्यू बोर्ड से जुड़े श्रमिकों के बच्चों और अपने कानूनी अभिभावक को खो चुके बच्चों के लिए सोनभद्र में अटल आवासीय विद्यालय का संचालन भी किया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय और संवेदनशील शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जनजातीय युवा शक्ति को स्थानीय संसाधनों से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने सोनभद्र की वन संपदा और औषधीय पौधों के भंडार का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म की दृष्टि से क्षेत्र के विकास के साथ-साथ यहां के जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड के रूप में तैयार किया जा रहा है। परंपरागत जनजातीय वैद्य, औषधि और जड़ी-बूटी विशेषज्ञों को प्रोत्साहित कर स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार और वन औषधियों के संग्रहण की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि हो और उनकी पारंपरिक ज्ञान-संपदा भी सुरक्षित रहे।

 ऊर्जा सुरक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 2,51,000 से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिए गए हैं और उत्तर प्रदेश सरकार दीपावली तथा होली पर निःशुल्क रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराकर परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक राहत दे रही है। सोनभद्र में 6,50,000 से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, जिससे गंभीर बीमारी की स्थिति में गरीब परिवारों को निशुल्क उपचार की सुविधा मिली है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 8,000 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को सस्ती ऋण सुविधा दी गई है। अटल पेंशन योजना के 1,08,324, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के 6,86,087 और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के 3,49,796 लाभार्थी सामाजिक सुरक्षा की मजबूत छतरी के दायरे में आए हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 8,30,570 बैंक खाते खोले गए हैं, जबकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 1,38,393 लाभार्थियों को 893 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्रदान किया गया है। स्वामित्व योजना के अंतर्गत 9,000 से अधिक परिवारों को अपने आवासीय भूखंडों के स्वामित्व के दस्तावेज दिए गए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 2,35,573 किसानों को अब तक 712 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है और पीएम कुसुम योजना के तहत 2,646 किसानों को सोलर पैनल उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत सोनभद्र में 8,324 बेटियों का विवाह सम्मानजनक ढंग से संपन्न कराया गया है। 75,709 वृद्धजन, 26,432 निराश्रित महिलाएं और 11,017 दिव्यांगजन प्रति वर्ष 12,000 रुपये की पेंशन सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। ‘बीसी सखी’ जैसी पहलों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं गांव-गांव तक बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की सुविधाएं पहुंचा रही हैं, जिससे ग्राम स्तर पर आर्थिक गतिविधि और जागरूकता दोनों बढ़ी हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशजों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार पट्टों का वितरण केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि इतिहास के ऋण से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सोनभद्र के लिए आज 532 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं, जनजातीय समुदाय के लिए चलाई जा रही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को उन्होंने समग्र विकास के रोडमैप का हिस्सा बताया।

गत दिवस घोषित बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की ऐतिहासिक जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार साझा संस्कृति, साझा विरासत और साझा संकल्प के प्रतीक हैं। प्रभु राम और माता जानकी के पवित्र संबंध की तरह दोनों राज्यों का रिश्ता भी अटूट और सुदृढ़ है। वहां की जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर यह संदेश दिया है कि विकास, सुशासन और स्थिरता के लिए डबल इंजन की सरकारों पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित व विकास की नीतियों को जनता का सशक्त समर्थन प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड ने मुख्यमंत्री को जनजातीय समाज की पहचान ‘तीर-धनुष’, वाद्य यंत्र ‘मांदर’ और पारंपरिक टोपी भेंट की। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सदस्य विधान परिषद चौधरी भूपेन्द्र सिंह, प्रभारी मंत्री रविन्द्र जायसवाल, समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में लोकार्पित प्रमुख परियोजनाएं:
घोरावल-शिल्पी-कोड़ारी मार्ग स्थित सोन नदी के कोलियां घाट पर सेतु, बलुई-मीतापुर मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, उरमौरा–राजपुर रोड वाया बसौली-बहुआर-रघुनाथपुर-सिन्दूरी मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, 48वीं वाहिनी पीएसी में 200 व्यक्तियों की क्षमता वाली बैरक तथा पुलिस लाइन में 150 पुलिसकर्मियों हेतु हॉस्टल/बैरक निर्माण।

जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई:
जिला ग्राम्य विकास संस्थान का आवासीय/अनावासीय भवन, नवीन समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, घोरावल-कोहरथा-शिवद्वार मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, नवसृजित तहसील ओबरा में आवासीय भवन, थाना जुगैल में टाइप-ए के 3 तथा टाइप-बी के 23 आवास, नगर पालिका परिषद सोनभद्र में कल्याण मंडप।

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