आजम खान की जेल की जिंदगी: बेटे को कम उम्र में चुनाव लड़ाना पड़ा महंगा, अब पासपोर्ट केस भी चर्चा में

रामपुर

समाजवादी पार्टी नेता आजम खान और उनके बेटा अब्दुल्ला आजम खान एक बार फिर सलाखों के पीछे हैं. बीते दिन  रामपुर की MP/MLA कोर्ट ने पैन कार्ड मामले में दोषी मानते हुए दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. आजम खान 55 दिन पहले 23 सितंबर को सीतापुर जेल से से बाहर आए थे. जेल से आने के बाद वह लगातार सुर्खियों में रहे. अब सामने आया है कि उनकी जेल में पहली रात कैसी गुजरी और क्या कुछ खाने को मिला. इतना ही नहीं उनके हाथ में एक खास चीज देखने को मिली.

 जैसे ही कोर्ट ने फैसला सुनाया तो पुलिस ने मौके पर ही बाप-बेटे को हिरासत में ले लिया. दोनों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट से एक किमी दूर गाड़ी से रामपुर जेल लेकर गई. आजम पुलिस की बोलेरो से जेल के बाहर उतरे तो एक हाथ में चश्मे का केस, दो पैकेट बिस्किट के पकड़े हुए थे. फिर अब्दुल्ला गाड़ी से उतरा. मगर, उसके हाथ खाली थे. आजम के साथ उनका बड़ा बेटा अदीब भी पीछे-पीछे गाड़ी से जेल के गेट तक पहुंचा. उसने पिता आजम के कान में कुछ कहा, लेकिन क्या कहा, यह क्लियर नहीं है. अदीब ने भाई अब्दुल्ला को गले लगाया तो दोनों भावुक हो गए.

आजम खान और अब्दुल्ला को रामपुर जिला कारागार के बैरक नंबर एक में रखा गया. इसी में दोनों ने करवटें बदलते हुए रात काटी. दोनों ही नेताओं को किसी भी तरह की कोई खास सुविधा नहीं दी गई. सामान्य कैदियों की तरह रखा गया. वहीं रात में खाना भी जेल में ही बना हुआ खाया. मसूर की दाल और आलू पालक की सब्जी के साथ रोटी खाई. इधर, आजम को सजा मिलने पर उनके समर्थन दुखी नजर आए. उनके घर की गलियां सुनसान थीं. कोई भी नजर नहीं आ रहा था.

बेटे को कम उम्र में चुनाव लड़ाना पड़ा आजम को महंगा, पहले जन्म प्रमाण पत्र, अब पैन कार्ड और अगली बारी पासपोर्ट की

 कद्दावर नेता आजम खान 23 महीने बाद 23 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए थे. लेकिन आजम की मुसीबतों का अभी अंत नहीं है. आजम की रिहाई को अभी दो महीने भी नहीं हुए थे, कि उन्हें फिर से जेल जाना पड़ गया. आजम खान को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और दो पैन कार्ड के मामले में सात साल की सजा हुई है.

वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राकेश कुमार मौर्या ने कहा कि अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड प्रकरण में कोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 420, 467, 468, 471 आईपीसी व 120 बी का दोषी माना है. दोनों लोगों को सात-सात साल की कैद व 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

कोर्ट ने आजम खान को इस मामले में सात साल जेल की सजा सुनाई है. अभी भी पासपोर्ट केस बाकी है. आजम खान पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप में दर्ज मामले में भी आरोपी हैं. ऐसे में लंबे समय के लिए उनका जेल से बाहर रह पाना मुश्किल ही है.

आजम खान पर केस की लंबी फेहरिश्त

आजम खान के खिलाफ कुल 104 मुकदमे दर्ज किए गए थे. इनमें से 93 मुकदमे रामपुर में ही दर्ज हैं, जिसमें से 11 मुकदमे राजस्व के हैं. आजम के खिलाफ दर्ज 104 में से एक दर्ज से अधिक मामलों में फैसला आ चुका है. कुछ में उन्हें सजा हुई है, तो कुछ मामलों में वह बरी भी हुए हैं.

आजम के खिलाफ अब भी 80 से ज्यादा केस पेंडिंग हैं. पेंडिंग मामलों में पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला भी है.  कोर्ट ने जिस आधार पर जन्म प्रमाण पत्र और पैन कार्ड मामले में सात-सात साल की सजा सुनाई है, उसी से जुड़ा हुआ पास्पोर्ट का भी मामला है. 

आजम और उनके बेटे पर कैसे कसा शिकंजा

दरअसल, 2017 का विधानसभा चुनाव होना था. आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम की उम्र चुनाव लड़ने की नहीं थी. ऐसे में अब्दुल्ला आजम की उम्र बढ़ाकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया. अब्दुल्ला आजम 2017 का चुनाव लड़े और जीतकर विधायक भी बन गए, लेकिन इस मामले को लेकर आकाश सक्सेना ने अदालत में केस दायर कर दिया.  कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र मामले में अब्दुल्ला आजम के साथ आजम खान को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई, 

जन्म प्रमाण के मामले में अब्दुल्ला आजम सिर्फ चुनाव ही नहीं लड़े बल्कि दो पैनकार्ड भी बनवा लिए. यह दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों से ही बनवाए गए थे और पासपोर्ट भी बनवाया गया. अब्दुल्ला के नामांकन दाखिल करते ही आजम के सियासी विरोधियों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी. नामांकन के अगले ही दिन अब्दुल्ला की जन्म तिथि पर विवाद हो गया था.

सियासी विरोधी सक्रिय हुए तो एक के बाद एक झूठ की बुनियाद पर सियासत की सीढ़ी बनाने वाले आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला की परत-दर-परत खुलने लगी. पहले दो जन्म प्रमाणपत्र और दो पासपोर्ट के बाद दो पैन कार्ड का मुद्दा गर्माया.  जन्म प्रमाण पत्र और पैन कार्ड का मामला अदालत में साबित भी हो गया और पासपोर्ट का मामला अब भी पेंडिग है. 

आजम खा को किस मामले में कब हुई सजा

साल 2022- आजम खान को 2019 के लोकसभा चुनाव के समय प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण के मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था. इस मामले में आजम खान को तीन साल की सजा सुनाई गई थी.

साल 2023– आजम खान को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई.

साल 2024– डुंगरपुर में जबरन जमीन बेदखली के मामले में रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को 10 साल की सजा सुनाई.

साल 2024- आजम खान को सड़क जाम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई.

साल 2024– मशीन चोरी के मामले में कोर्ट ने आजम खान को सात साल की सजा सुनाई.

गौरतलब है कि आजम खान के साथ ही उनके पुत्र और अन्य परिजनों को भी मिला लें, तो कुल करीब पौने दो सौ मामले दर्ज हैं. इनमें से करीब दर्जनभर मामलों में ही अभी फैसला आया है. ऐसे में देखें तो करीब 150 से अधिक मामलों में अभी सुनवाई चल ही रही है. इनमें पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का केस भी शामिल है.

क्या है मामला?
आजम खान 2017 में अखिलेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे. उन्होंने अपने रसूख के दम पर लखनऊ नगर निगम से बेटे का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) बनवाया. उसी के आधार पर फर्जी पैन कार्ड बनवाकर अब्दुल्ला को चुनाव लड़वाया था. रामपुर कोर्ट का यह फैसला आजम के खिलाफ दर्ज 104 मुकदमों में से एक है. अब तक अदालत 11 मामलों में फैसला सुना चुकी है. इनमें से 6 मामलों में आजम को सजा हो चुकी है. वहीं, 5 मामलों में उन्हें बरी किया गया. 2 महीने पहले ही सभी केस में जमानत मिलने के बाद आजम सीतापुर जेल से बाहर आए थे. अब फिर से जेल पहुंच गए.

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