डराने वाले आंकड़े! संयुक्त राष्ट्र ने कहा—हर 10 मिनट में एक महिला की होती है हत्या

नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) ने एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की है, जो बताती है कि वर्ष 2024 में, 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को, उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मार डाला गया. रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 मिनट में 1 लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है.हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है. 

83 हज़ार इरादतन हत्या के मामले

महिलाओं की हत्या – 2025 नामक यह रिपोर्ट, महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है.2024 में, 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई. 

रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में – हर 1 लाख में से 3 लड़की या महिला, और योरोप में सबसे कम दर्ज की गई हैं.जबकि, इसके उलट अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है.

संयुक्त राष्ट्र के 'इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वॉयलेंस अगेंस्ट विमेन' के मौके पर जारी 2025 फेमिसाइड रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों की हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनमें कोई वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 83,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या की गई, जिनमें से 60% यानी 50,000 महिलाएं और लड़कियां अपने करीबी साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मारी गईं. इसका मतलब है कि हर दस मिनट में एक महिला या लड़की घर के अंदर या परिवार के हाथों जान गंवा रही है.

इसके उलट पुरुषों की हत्याओं में केवल 11% मामलों में साथी या परिवार जिम्मेदार थे. यह अंतर हिंसा की प्रकृति और खतरे की गंभीरता को उजागर करता है. यूएन विमेन की नीति विभाग की निदेशक सारा हेंड्रिक्स ने कहा कि फेमिसाइड अकेले नहीं होता. यह अक्सर नियंत्रण, डराने-धमकाने, ऑनलाइन उत्पीड़न या डिजिटल हिंसा की शुरुआत से लेकर बढ़ते-बढ़ते जानलेवा रूप ले लेता है. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल हिंसा अक्सर ऑफलाइन भी फैलती है और कई बार महिलाओं की हत्या तक पहुंच जाती है.

यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में ‘घर’ महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बन चुका है. उन्होंने महिलाओं की हत्या को रोकने के लिए बेहतर रणनीतियों, मजबूत कानूनों और प्रभावी आपराधिक न्याय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.2025 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह हिंसा दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में मौजूद है. सबसे ज्यादा फेमिसाइड दर अफ्रीका (3 प्रति 1 लाख महिलाएं) में दर्ज की गई, जिसके बाद अमेरिका (1.5), ओशिआनिया (1.4), एशिया (0.7) और यूरोप (0.5) का स्थान आता है.

रिपोर्ट बताती है कि घर के बाहर यानी सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली फेमिसाइड का डेटा अभी भी सीमित है, जिसकी वजह से वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन करना मुश्किल है. डेटा की कमी दूर करने के लिए यूएन विमेन और यूएनओडीसी 2022 के सांख्यिकीय फ्रेमवर्क के आधार पर देशों के साथ काम कर रहे हैं ताकि ऐसी हत्याओं की बेहतर पहचान, रिकॉर्डिंग और वर्गीकरण किया जा सके.

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2024 में परिवार/साथी के हाथों मारी गई महिलाओं की संख्या (50,000) पिछली रिपोर्ट (51,100) से थोड़ी कम जरूर है, लेकिन यह गिरावट वास्तविक कमी का संकेत नहीं है, बल्कि कई देशों में डेटा उपलब्धता में बदलाव की वजह से ऐसा दिख रहा है.
16 Days Campaign क्या है? 

हर साल 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाला 16 Days of Activism अभियान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए UN Women की पहल है. 2025 में यह अभियान डिजिटल हिंसा को खत्म करने पर केंद्रित है, जिसमें ऑनलाइन उत्पीड़न, स्टॉकिंग, जेंडर्ड डिसइन्फॉर्मेशन, डीपफेक्स और बिना अनुमति निजी तस्वीरें शेयर करने जैसी समस्याएं शामिल हैं. यह सभी तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ तेजी से बढ़ रही हैं. UN Women ने सरकारों, टेक कंपनियों और समुदायों से अपील की है कि कानूनों को मजबूत बनाया जाए, डिजिटल हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ितों के लिए सुरक्षित व सहायक वातावरण तैयार किया जाए.

सुरक्षित रहने का अधिकार

यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती. यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान, यह उजागर करता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है. यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है.निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है. 

इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें.UNODC के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया भर में बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए घर, आज भी एक ख़तरनाक और कई बार जानलेवा जगह बने हुए हैं. 

महिलाओं की हत्याएँ घर के बाहर भी होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं. 

इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए, बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं.

सटीक डेटा बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझी जा सके, प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके.

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