मंदिर में दीपक न जलाने पर हाईकोर्ट नाराज़, दरगाह विवाद फिर सुर्खियों में

चेन्नई 
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने बुधवार को एक तीखे शब्दों वाला अवमानना आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि अधिकारियों ने तिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित विवादित पत्थर स्तंभ- दीपथून पर कार्तिगई दीपम त्योहार का दीपक जलाने के उसके पहले के निर्देश का पालन नहीं किया। यह स्थान लंबे समय से हिंदू मंदिर प्रशासन और बगल में स्थित मुस्लिम दरगाह के बीच विवाद का केंद्र रहा है। थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर और सिकंदर बधूसाह दरगाह स्थित है।

सोमवार को न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामिनाथन ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था कि दीपथून पर परंपरा के अनुसार दीपक जलाया जाए। यह स्थान दरगाह के पास स्थित पहाड़ी का निचला शिखर है। बुधवार शाम 6 बजे इस आदेश के पालन न होने पर न्यायाधीश ने अधिकारियों को जानबूझकर अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि आदेश स्पष्ट था और इसे लागू न करना न्यायालय की प्रतिष्ठा को चुनौती देना है। अवमानना की कार्रवाई के तहत न्यायालय ने याचिकाकर्ता और उनके साथ दस लोगों को CISF सुरक्षा में दीपथून पर चढ़कर दीपक जलाने की अनुमति दी। अदालत ने इसे प्रतीकात्मक लेकिन आवश्यक कदम बताया।

ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख
अपने सोमवार के आदेश में न्यायमूर्ति स्वामिनाथन ने 1920 के एक दीवानी वाद और प्रिवी काउंसिल के पुराने फैसलों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा कि विवादित स्तंभ मंदिर की भूमि पर स्थित है, न कि दरगाह के नियंत्रण क्षेत्र में। अदालत के अनुसार पहाड़ी दो शिखरों में विभाजित है- ऊपरी शिखर पर दरगाह और निचले शिखर पर दीपथून है। न्यायाधीश ने लिखा था कि निचले शिखर पर दीप जलाने से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

CISF की तैनाती से बढ़ी संवेदनशीलता
श्रद्धालुओं के एक वर्ग और तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर प्रबंधन के बीच गतिरोध के बाद मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा घेरे में पहाड़ी के प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने का निर्देश दिया। अदालत के पूर्व के निर्देश के बावजूद, बुधवार शाम ‘कार्तिगई दीपम’ के अवसर पर यहां तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह के पास प्राचीन स्तंभ पर दीप नहीं जलाया गया, जिसके कारण दक्षिणपंथी संगठन हिंदू मुन्नानी के कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दीप को प्राचीन स्तंभ ‘दीपथून’ पर जलाया जाए जैसा कि पीठ ने निर्देश दिया था।

एक याचिका के बाद, अदालत ने उच्च न्यायालय पीठ से संबद्ध सीआईएसएफ कमांडेंट को याचिकाकर्ता की सहायता के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करने का निर्देश दिया, जिन्हें आदेश का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 10 अन्य कर्मियों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद, सीआईएसएफ सुरक्षा के साथ तिरुप्परनकुंद्रम आए याचिकाकर्ता राम रविकुमार और अन्य लोगों को पुलिस ने पहाड़ी की ओर बढ़ने से रोक दिया, क्योंकि मदुरै जिलाधिकारी ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्ष संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की थी।

तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई
तिरुप्परनकुंद्रम में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब कुछ लोगों ने पुलिस अवरोधक तोड़कर पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस धक्का-मुक्की में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के प्रबंधन को तीन दिसंबर को ‘कार्तिगई दीपम’ पर दीप जलाने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

अदालत के निर्देश के बावजूद, तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप नहीं जलाया गया। इसे तमिल महीने कार्तिगई (नवंबर-दिसंबर) में मनाए जाने वाले ‘कार्तिगई दीपम’ उत्सव के तहत, हमेशा की तरह उच्ची पिल्लैयार मंदिर के मंडपम में जलाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी दीप जलाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ने लगे लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें पहाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया। मंदिर प्रबंधन ने शाम छह बजे होने वाले बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले अदालत में अपील दायर की, जिसमें दावा किया गया कि इस कदम से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अदालत से मंदिर प्रबंधन के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।

पहाड़ी के आसपास के क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू
न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने निर्देश दिया कि शाम छह बजे तक दीप प्रज्वलित कर दिए जाएं, अन्यथा शाम 6.05 बजे अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाएगी, और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई की अपील स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और मदुरई पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
 

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