ED ने पेश की अंतिम चार्जशीट, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के 59 और आरोपी शामिल, ट्रायल की तैयारी

रायपुर 

छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का अंतिम चरण पूरा कर लिया है। लगभग तीन हजार करोड़ रुपये के इस मामले में ईडी ने अदालत के समक्ष अंतिम चालान पेश कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप यह चार्जशीट निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा की गई। ईडी द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट में करीब 29 हजार 800 से ज्यादा पन्ने शामिल हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर दस्तावेज़, लेन-देन के विवरण और डिजिटल साक्ष्य जोड़े गए हैं। इस पूरे मामले में अब तक कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। शुरुआत में 22 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, जबकि अब 59 और नाम जोड़े गए हैं। इन नए आरोपियों में आईएएस अधिकारी सौम्या चौरसिया, पूर्व आबकारी प्रमुख निरंजन दास, एफएल-10 लाइसेंसधारक व शराब डिस्ट्रीब्यूटर समेत कई आबकारी अधिकारी शामिल बताए गए हैं।

ED ने  59 नए आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सौम्या चौरसिया, निरंजन दास, एफएल-10 लाइसेंस धारक, डिस्टिलर्स और आबकारी अधिकारी शामिल हैं। इस घोटाले में अब तक कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पहले 22 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट सबमिट की गई थी।

ईडी के वकील सौरभ पांडे के मुताबिक, 315 पन्नों की विस्तृत प्रॉसिक्यूशन समरी तैयार की गई है। इसमें बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल चैट्स, संपर्कों के विवरण और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी गतिविधियों के प्रमाण जोड़े गए हैं। उनका कहना है कि जांच में यह सामने आया कि घोटाले की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए पद नियुक्तियाँ तक प्रभावित की गईं।

80 से ज्यादा आरोपी चार्जशीट के दायरे में

इस अंतिम चालान में 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें पूर्व अधिकारी-कारोबारी, शराब सिंडिकेट से जुड़े लोग और कथित तौर पर लाभ पहुंचाने वाले अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वसूली, सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पेश हुआ चालान

यह चार्जशीट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समय पर दाखिल की गई है और इसमें डिजिटल सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और गवाहों के बयान शामिल हैं।

चार्जशीट पेश होने के बाद अब ट्रायल होगा शुरू

अंतिम चार्जशीट पेश होने के बाद अब कोर्ट ट्रायल शुरू करेगा। आरोपियों को चार्ज फ्रेम किए जाएंगे और उसके बाद गवाहों के बयान और सबूतों की सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जशीट की लंबाई और आरोपियों की संख्या के कारण यह केस लंबा और जटिल हो सकता है।

ईडी ने अदालत को बताया कि आबकारी विभाग में पूर्व पदस्थ अधिकारी की जगह निरंजन दास को इसलिए बैठाया गया क्योंकि वे कथित तौर पर इस अवैध सिस्टम को सहजता से चलाने के लिए ‘अनुकूल’ माने गए। उनके कार्यकाल में किसी तरह की सख्त कार्रवाई न होने से यह कथित तंत्र लगातार संचालित होता रहा।

चार्जशीट दाख़िल होने के साथ ही मामला अब अदालत की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। ईडी का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों का विवरण भी संबंधित प्राधिकरणों को भेजा गया है। आने वाले समय में इस हाई-प्रोफाइल केस पर अदालत में विस्तृत सुनवाई शुरू होगी।  

चैतन्य बघेल के खिलाफ रायपुर कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश

इससे पहले 22 दिसंबर सोमवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। यह इस प्रकरण में 8वीं चार्जशीट है। EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि चैतन्य बघेल को घोटाले से 200-250 करोड़ रुपए मिले हैं।

EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि सिंडिकेट के माध्यम से अवैध उगाही की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर चैतन्य बघेल से जुड़ा है। घोटाले में चैतन्य बघेल की सीधे संलिप्तता है। जांच में चैतन्य बघेल की भूमिका तत्कालीन समय में आबकारी विभाग में वसूली तंत्र (सिंडिकेट) को खड़ा करने और संरक्षक के रूप में पाई गई है।

शराब घोटाला केस…सौम्या चौरसिया को ED ने किया गिरफ्तार

वहीं इस मामले में ED ने 16 दिसंबर मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के मुताबिक, पिछली सरकार के दौरान राज्य में हुए कई घोटालों में पैसों के मैनेजमेंट में उनकी अहम भूमिका रही।

ED ने पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयान के आधार पर सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया। ED को सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर-चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स में कई अहम सबूत भी मिले हैं।

ED का दावा है कि सौम्या लीकर स्कैम नेटवर्क में को-ऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रही थीं। घोटाले से उन्हें करीब 100 करोड़ रुपए मिलने की जानकारी है।

अब जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। शराब घोटाला मामले में ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। जिसमें 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि, तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।

A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

    डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।

    खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।

    शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।

    डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

    देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में बांटा। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नए सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।

    एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा।

    EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।

More From Author

हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई तो आंदोलन तय, बांग्लादेशी प्रशासन को चेताया गया

10 घंटे की यातना: कोहरे में फंसी राजधानी एक्सप्रेस, यात्रियों को मिली सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13695/1

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.