मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरातत्व, दस्तावेज प्रबंधन और संग्रहालयों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया था। यह उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण का ही प्रभाव था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाने का डॉ. वाकणकर का प्रयास अद्भुत और अनुकरणीय था। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, काव्य लेखन एवं संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से काल गणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई। उन्होंने बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालीन घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में होने वाला शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन उत्तर की ओर खिसक कर डोंगला में हुआ। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण किया था। शंकु की सहायता से उन्होंने कर्क रेखा की नई स्थिति का पता लगाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने शिलाओं और गुफाओं में छिपे प्रमाणों के माध्यम से भारतीय सभ्यता की उस कहानी को दुनिया के सामने रखा, जो लिखित इतिहास से भी पहले की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति तथा 2 लाख रुपये का चैक भेंट कर 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2022-2023 से सम्मानित किया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक सुश्री स्मिता नागदेव एवं कवि लेखक श्री राहुल शर्मा ने सितार और कविता की जुगलबंदी से डॉ. वाकणकर द्वारा रचित कविता "इतिहास के पटल पर" का राग बैरागी भैरव में गायन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा डॉ. वाकणकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947, दुर्लभ अभिलेख और छाया चित्रों की प्रदर्शनी" पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया तथा एक स्टॉल पर कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण कर भारतीय संस्कृति, कला एवं शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन 11 जनवरी तक चलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्र 30 हजार वर्ष पुराने माने जाते हैं। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1957 में भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन और गहन अध्ययन कर न केवल इन प्राचीन स्थलों पर प्रकाश डाला, बल्कि भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। आज भीमबेटका केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित किया जा रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने महेश्वर, मंदसौर, नावड़ाटौडी, इंद्रगढ़, मनोटी, आवरा, कायथा, आजादनगर, इंदौर, दंगवाड़ा और रूनिजा जैसे विभिन्न पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन और अध्ययन का नेतृत्व किया। डॉ. वाकणकर का मानना था कि ऋग्वेद में वर्णित सरस्वती नदी कोई मिथक नहीं, बल्कि एक वास्तविक, विशाल प्राचीन नदी थी। उन्होंने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर यह दिखाने का प्रयास किया कि आज की घग्गर-हकरा नदी प्रणाली ही प्राचीन सरस्वती का अवशेष है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर भारत तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने भारत, यूरोप और अमेरिका में 4 हजार से अधिक शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. वाकणकर के इस अद्वितीय योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारों से ओत-प्रोत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. वाकणकर द्वारा पद्मश्री सम्मान ग्रहण करने के समय का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. वाकणकर ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के गणवेश का प्रमुख अंग 'ब्लैक कैप' धारण करके ही पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस विरासत को संजोते हुए हम विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उनके सम्मान में रातापानी अभ्यारण्य का नाम डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर रखकर राज्य सरकार ने महान इतिहासदृष्टा को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में पुरातत्व संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। आज से 1000 साल पहले गुजरात के सोमनाथ महादेव मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद आज हमारी आस्था का यह केंद्र भव्य और गौरवशाली रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव की शुरुआत करने जा रही है। राज्य सरकार उज्जैन में पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर की स्मृतियों और उनके द्वारा एकत्रित पुरातत्व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण करते हुए संग्रहालय को भी वर्तमान तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पुरातत्वविद डॉ. मठपाल को राष्ट्रीय सम्मान, पुरातत्व एवं शैल चित्र अध्ययन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. मठपाल एक वरिष्ठ पुरातत्वविद, चित्रकार, क्यूरेटर और शैल चित्र संग्रहण विशेषज्ञ हैं। डॉ. मठपाल ने पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की है। मध्यप्रदेश के पुरातत्व कला और संस्कृति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। शैल चित्र संरक्षण की वैज्ञानिक पद्धतियों के विकास में उनके योगदान ने भारत की प्रागैतिहासिक विरासत के अध्ययन और संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा प्रदान की है। कार्यक्रम में सचिव पर्यटन श्री टी. इलैयाराजा तथा आयुक्त पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय श्रीमती उर्मिला शुक्ला तथा राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विचारक तथा विशेषज्ञ उपस्थित थे।

More From Author

अशोक लीलैंड के नए प्लांट से बढ़ा भरोसा, धरातल पर दिख रहा योगी सरकार के प्रयासों का असर

राज्य सरकार सैनिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.