नर्मदापुरम में बनेगा सिक्योरिटी पेपर, 1788 करोड़ के निवेश से करारे नोटों के कागज तैयार होंगे

नर्मदापुरम
 मध्य प्रदेश का नर्मदापुरम अब नोटों के कागज बनाने के मामले में पूरे देश में नई पहचान दर्ज कराएगा. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने नर्मदापुरम की सिक्योरिटी पेपर मिल (SPM) यानि प्रतिभूति कागज कारखाना के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए कुल 1788 करोड़ रुपये की राशि को संसद में मंजूर किया है. इस राशि से SPM में पूरे कागज कारखाने का अपग्रेडेशन होगा. वहीं नोटों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नई मशीन भी लगाई जायेगी.

लंबे समय से उठ रही थी मांग
नर्मदापुरम नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से नर्मदापुरम के प्रतिभूति कागज कारखाना के आधुनिकीकरण और विस्तार की मांग उठाई थी. उन्होंने इस बात को लोकसभा में वित्त मंत्रालय के समक्ष भी उठाया था. लंबे समय से इसकी मांग चल रही थी. इसी मांग के चलते केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सहमति के बाद अब SPM नर्मदापुरम के विकास और नई पेपर मशीन की स्थापना की मांग को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने SPM के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 1788 करोड़ की राशि स्वीकृत कर दी. इस राशि का उपयोग कारखाने की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए होगा. इस परियोजना से SPM का विकास होगा, जिसका उद्देश्य देश में बैंक नोटों और अन्य सुरक्षा-संबंधित कागजात की बढ़ती मांग को पूरा करना है. जो क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.

देश को करारे नोटों का कागज देता है मध्य प्रदेश का मिल

जिन करारे रंगीन करेंसी को लेकर लोग इतराते फिरते हैं वो मध्य प्रदेश की एक खास मिल से निकलती है. यहां के जैसा पेपर देश की कोई भी मिल में जेनेरेट नहीं हो पाती. खासियत ऐसी की जानकर चौक जाएंगे. यह पेपर जो बाद में नोट में तब्दील हो जाते हैं इन्हे बनाने के लिए रुई है. जी हां कॉटन और गोंद के बेहतरीन ब्लेंड से तैयार होते हैं भारतीय नोट. ये नोट हमारे और आपके घर की ही नहीं बल्की देश की इकॉनमी रन करते हैं.

क्या है नोटों वाले कॉटन के पेपर की खासियत

भारतीय रिजर्व बैंक के इन नोटों वाले पेपर की खूबी ऐसी है कि इन पर पानी को अपना रंग दिखाने में लंबा वक्त लगता है. भीगने के बाद भी ये तत्काल नहीं गलता. पसीने का तो इन पर कोई बड़ा असर नहीं होता. बिना मिलावट वाला शुद्ध कॉटन ही इस कागज और साथ ही नोट को वो रुप देता है जिससे इसमें सारी खासियतें आती हैं और ये बेहद टिकाऊ बन जाते हैं.

कब से तैयार हो रहा नर्मदापुरम में करारे नोटों का कागज

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिसे अब नर्मदापुरम कहते हैं वहां 1967 में करेंसी नोट के लिए कागज तैयार करने का काम शुरु हुआ. इसके लिए पहला कारखाना खोला गया. अब यहां सरकार नए सिरे से इंवेस्टमेंट कर रही है. यहां अब 1788 करोड़ रुपए का इंवेस्टमेंट किया जा रहा है. यही वो कारखाना है जिसमें देश की विदेशी कागज पर नोटों की निर्भरता खत्म की थी.

SPMCIL की प्रमुख इकाई है SPM
नर्मदापुरम का प्रतिभूति कागज कारखाना भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (SPMCIL) की एक प्रमुख इकाई है, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील कागज आवश्यकताओं की पूर्ति करती है. यहां वर्तमान में संचालित पुरानी मशीनों के स्थान पर नवीन अत्याधुनिक पेपर मशीन की स्थापना से उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इस परियोजना से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ होगी, बल्कि नर्मदापुरम क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, औद्योगिक सुदृढ़ीकरण, स्थानीय युवाओं को तकनीकी अवसर तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी.

इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल एवं शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया गया है. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि, ''यह निर्णय नर्मदापुरम को औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने वाला सिद्ध होगा.''

 नर्मदापुरम के प्रतिभूति कागज कारखाना के PRO संजय भावसार ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''इस यूनिट की स्थापना के लिए कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है. इस बारे में अभी हमारे यहां अभी विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. इस यूनिट की स्थापना होने से SPM के साथ ही क्षेत्र और देश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि रहेगी.''

1967 में हुई थी स्थापना की शुरुआत
SPM, भारत का प्रमुख औद्योगिक संस्थान है, यह भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (SPMCIL) की एक इकाई है. जो भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. इसकी स्थापना औपचारिक शुरुआत 9 मार्च 1967 को तत्कालीन भारत के उप प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा की गई थी. इसमें उत्पादन कार्य 1968 में प्रारंभ हुआ. इस कारखाने का मुख्य कार्य बैंक नोटों के लिए उच्च सुरक्षा वाले कागज, गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर और पासपोर्ट के लिए कागज का निर्माण करना है.

यहां उत्पादित कागज का उपयोग देवास (BNP) और नासिक (CNP) के करेंसी नोट प्रेस द्वारा नोट छापने के लिए किया जाता है. यह वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत गैर-वाणिज्यिक उपक्रम के रूप में अधिसूचित किया गया था. यह एक भारत की उच्च गुणवत्ता वाले बैंक नोट और अन्य सुरक्षा कागजात बनाने का काम करती है. 2006 में निगमीकरण के समय यह एसपीएमसीआईएल की एक इकाई बन गई. 

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