‘आक्रमणकारी चले गए, आस्था बची रही’— सोमनाथ मंदिर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

सोमनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं की स्मृति में निकाली गई, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। यात्रा को साहस, बलिदान और वीरता का प्रतीक बताया गया। शौर्य यात्रा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इसे अपना बड़ा सौभाग्य मानते हैं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस स्वाभिमान पर्व की सेवा का अवसर मिला। उन्होंने देश और दुनिया से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए “जय सोमनाथ” का उद्घोष किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव अपने आप में अद्भुत है। एक ओर भगवान महादेव की उपस्थिति, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रोच्चार की गूंज और भक्तों की आस्था, यह सब मिलकर इस पर्व को दिव्य बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गौरव, गरिमा और आध्यात्मिक अनुभूति का संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने 72 घंटे तक चले अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने बताया कि ड्रोन शो के जरिए सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्षों के इतिहास को दर्शाया गया, जिसमें वैदिक गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की प्रस्तुति अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रही, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

1000 साल पुराने इतिहास का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और विश्वास की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आक्रांता यह सोचते रहे कि उन्होंने सोमनाथ को नष्ट कर दिया, लेकिन हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर उसी शान से खड़ा है और भारत की शक्ति का प्रतीक बना हुआ है।

'आक्रांता इतिहास बन गए, सोमनाथ आज भी अडिग' : पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक जिन आक्रांताओं ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश की, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर तट पर अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का अर्थ ही अमरता और शक्ति से जुड़ा है, जो विनाश के बाद भी पुनर्निर्माण का संदेश देता है।

सोमनाथ का इतिहास हार नहीं, विजय का है
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल विध्वंस की याद नहीं, बल्कि हजार वर्षों की यात्रा और भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह वर्ष विशेष है, क्योंकि एक ओर सोमनाथ पर पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं 1951 में हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।

आजादी के बाद मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध हुआ था
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद कुछ लोगों ने सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों से दूरी बनाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इतिहासकारों और नेताओं ने आक्रांताओं के अत्याचारों को छिपाने का प्रयास किया और धार्मिक हमलों को केवल लूट तक सीमित बताया गया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा सोमनाथ के पुनर्निर्माण की घोषणा का भी विरोध हुआ था और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं।

'आज भी भारत को बांटने की ताकतें सक्रिय' : पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि जो ताकतें पहले तलवारों से हमला करती थीं, वे आज अलग-अलग रूपों में भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट और सतर्क रहकर ऐसी साजिशों का मुकाबला करना होगा।

भारत ने दिल जीतने का रास्ता दिखाया
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत की सभ्यता घृणा नहीं, बल्कि प्रेम और सृजन का मार्ग दिखाती है। भारत ने दुनिया को दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतना सिखाया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का हजार साल का इतिहास हमें आने वाले हजार वर्षों के लिए भी प्रेरणा देता रहेगा।

 

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