हर दिन ‘जिंदा’ होने की पुष्टि नहीं की तो परिवार को भेज देगा मौत का मैसेज, वायरल ऐप की सच्चाई

 नई दिल्ली

अगर आपका फोन हर दो दिन में आपसे एक सवाल पूछे… 'क्या आप जिंदा हैं'?  और अगर आपने जवाब नहीं दिया, तो आपके परिवार को अलर्ट चला जाए. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन चीन में यही ऐप इस वक्त लाखों लोग डाउनलोड कर रहे हैं. ये ऐप अनोखे फीचर की वजह से वायरल भी हो रहा है. 

इस ऐप का नाम है 'Are You Dead?'. इसका काम बेहद सीधा है. यूज़र को हर 48 घंटे में एक बटन टैप कर के बताना होता है कि वह ठीक है. अगर लगातार दो बार चेक-इन नहीं हुआ, तो ऐप अपने-आप आपके चुने हुए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को मैसेज भेज देता है कि शायद कुछ गलत हुआ है.

यह ऐप खासतौर पर अकेले रहने वालों के लिए बना है. बड़े शहरों में काम करने वाले युवा, परिवार से दूर रहने वाले प्रोफेशनल्स, या वो बुज़ुर्ग जिनके बच्चे दूसरे शहरों में बस चुके हैं. टेक्नोलॉजी यहां सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की छोटी गारंटी बनकर सामने आई है.

सबसे दिलचस्प बात इसका नाम है. 'Are You Dead?' . सीधा लेकिन डार्क और चौंकाने वाला. यही वजह है कि यह ऐप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. कुछ लोग इसे मज़ाकिया मानते हैं, तो कुछ इसे आज के शहरी जीवन की कड़वी सच्चाई बताते हैं.

ऐप का इंटरफेस बेहद सिंपल है. कोई चैट, कोई सोशल फीचर, कोई लंबा प्रोफाइल नहीं. बस एक बड़ा बटन.  'I’m Alive'. टेक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही सादगी इसकी ताकत है. यूज़र पर कोई बोझ नहीं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अलर्ट सिस्टम काम करता है.

असल में यह ट्रेंड चीन के बदलते समाज की तरफ इशारा करता है. बड़े शहरों में लाखों लोग अकेले रहते हैं. परिवार दूर है. पड़ोसियों से बातचीत कम है. ऐसे माहौल में अगर किसी के साथ कुछ हो जाए, तो कई बार देर से पता चलता है. यही डर इस ऐप की मांग बना रहा है.

अब सवाल उठ रहा है, क्या टेक्नोलॉजी रिश्तों की जगह ले सकती है? क्या एक ऐप वो काम कर सकता है, जो पहले परिवार या समाज करता था?

कुछ लोग इसे लोनलीनेस टेक कह रहे हैं, यानी टेक्नोलॉजी जो अकेलेपन की समस्या को थोड़ा मैनेजेबल बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन साथ ही यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या हम ऐसी दुनिया की तरफ जा रहे हैं, जहां जिंदा होने का सबूत भी मोबाइल ऐप से देना पड़ेगा.

फिलहाल इतना तय है कि 'Are You Dead?' सिर्फ एक ऐप नहीं रहा. यह आज की शहरी ज़िंदगी, टूटते सोशल कनेक्शन और अकेलेपन की डिजिटल तस्वीर बन चुका है. और शायद यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ चीन की नहीं, बल्कि आने वाले वक्त में भारत जैसे देशों की भी बन सकती है.

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