ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने दी धमकी, 8 राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग

तेहरान 
   
ईरान में पिछले 18 दिन से जारी विरोध-प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं जिनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इन मौतों के बीच अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है कि अगर ईरान के खामेनेई शासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी सख्ती नहीं रोकी तो वो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हाल ही में ट्रंप ने अगवा करवा लिया था और ऐसे में ईरान को लेकर उनकी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है. इस बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान से कहा है कि वो राजनीतिक कैदियों को भी जल्द से जल्द रिहा करे.

ट्रंप प्रशासन के फारसी भाषा के एक्स अकाउंट से एक ट्वीट में ईरान से राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग की गई है. ट्वीट में लिखा गया, 'हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे तो ये न समझा जाए कि हमने उन राजनीतिक कैदियों को भुला दिया है, जिन्हें इन विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था.'

ट्वीट में ईरान की जेल में बंद आठ राजनीतिक कैदियों के नाम लिखे गए हैं जिनमें शामिल हैं- नरगिस मोहम्मदी, सपीदेह गोलियान, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नाजेमी, रजा खंदान, मजीद तवक्कोली, शरीफेह मोहम्मदी, हुसैन रोनागी. 

ट्रंप प्रशासन की तरफ से ट्वीट में आगे लिखा गया, 'इन लोगों को लगातार हिरासत में रखा गया है जो गंभीर चिंता का विषय है. हम मांग करते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक का शासन इन सभी कैदियों को तुरंत रिहा करे.'

कौन हैं वो 8 राजनीतिक कैदी जिन्हें जेल से छोड़ने की मांग कर रहा अमेरिका?
नरगिस मोहम्मदी

2023 में शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली नरगिस मोहम्मदी ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं. 53 साल की नरगिस मोहम्मदी एक लेखिका हैं और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (डीएचआरसी) की उप निदेशक भी हैं.

महिला अधिकारों के अलावा वो अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर भी काम करती हैं जिनमें मृत्युदंड के खिलाफ कैंपेन चलाना और भ्रष्टाचार के विरोध की मुहिम शामिल है.

2023 में 'ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकार व स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के संघर्ष' के लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया.

नरगिस मोहम्मदी पर ईरान का खामेनेई शासन हमलावर रहा है और वो कई बार जेल जा चुकी है. जब उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया था तब भी वो जेल में ही थीं. मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें जेल से बाहर रखा गया था लेकिन फिर पिछले साल दिसंबर में एक स्मृति सभा से दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और फिलहाल वो राजधानी तेहरान की एविन जेल में बंद हैं.
सपीदेह गोलियान

ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता गोलियान खामेनेई शासन के निशाने पर रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं. गोलियान एक लेखिका और फ्रीलांस जर्नलिस्ट भी हैं जो कि महिला अधिकारों और महिला श्रम के क्षेत्र में काम करती हैं.

हड़ताल कर रहे श्रमिकों के समर्थन के लिए गोलियान को पहली बार 2018 में गिरफ्तार किया गया था और 11 जून 2025 को रिहा कर दिया गया. हालांकि, मोहम्मदी के साथ इन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि ये भी स्मृति सभा का हिस्सा थीं.
जवाद अली

कोर्दी- अली-कोर्दी ईरान के मानवाधिकार वकील, यूनिवर्सिटी लेक्चरर और सिटी काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं. 1 मार्च 2025 को इन्हें मशहद स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया गया और ईरान के खिलाफ प्रोपेगेंडा के आरोप में हिरासत में लिया गया. उन्हें 11 अगस्त 2025 को रिहा किया गया, लेकिन अधिकारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कंट्रोल में रखा गया.

उनके भाई और सहकर्मी खोसरो अली-कोर्दी की दिसंबर में मौत हो गई थी जिसके लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ही नरगिस मोहम्मदी और गोलियान को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की.

10 दिसंबर को जवाद अली-कोर्दी को मशहद की क्रांतिकारी अदालत ने तलब किया और 12 दिसंबर 2025 को उन्हें उनके ऑफिस से सुरक्षा बलों ने हिंसक तरीके से गिरफ्तार कर लिया. उनके खिलाफ 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ सभा करने और साजिश रचने' तथा 'राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा' के आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है.

पूरान नाजेमी

नाजेमी ईरान के करमान प्रांत से हैं और महिला और नागरिक अधिकारों के लिए काम करती हैं. इन्हें भी नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के साथ गिरफ्तार किया गया था. 
रजा खंदान

खंदान ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ग्राफिक डिजाइनर हैं. इन्होंने हिजाब आंदोलन के दौरान प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था और मौत की सजा के खिलाफ भी आवाज उठाते रहे हैं.

इन्हें 2018 और 2021 के बीच कई बार जेल भेजा जा चुका है. 14 दिसंबर 2024 को ईरानी अधिकारियों ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया और अभी वो जेल में ही हैं
मजीद तवक्कोली 

तवक्कोली ईरान के स्टूडेंट लीडर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से जेल में हैं. छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना के लिए 2009 में पहली बार वो जेल गए थे. ईरानी शासन की आलोचना को लेकर फिलहाल वो 9 साल की कैद में हैं.
शरीफेह मोहम्मदी

मोहम्मदी ईरान की सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है. 22 वर्षीय ईरानी छात्रा महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में सितंबर 2022 से देशव्यापी आंदोलन शुरू हुए थे.

हुसैन रोनागी

रोनागी ईरान के ब्लॉगर, इंटरनेट की आजादी के हिमायती और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. इन्हें भी कई बार जेल भेजा जा चुका है. ईरानी शासन की आलोचना के लिए पहली बार 13 दिसंबर 2009 को इन्हें जेल भेजा गया था. 15 साल की सजा हुई लेकिन 2019 में रिहा कर दिए गए.

फिर फरवरी 2022 में गिरफ्तार हुए और जल्द ही छोड़ दिए गए. हिजाब आंदोलन के दौरान फिर से गिरफ्तार हुए और खराब सेहत के बावजूद अब भी जेल में कैद हैं.

More From Author

विवाह निमंत्रण पत्र की ये चूक बन सकती है वैवाहिक जीवन में बाधा

पानी का प्रदूषण: हाईकोर्ट ने कहा- नालों में सीवेज मिलना बंद हो, पॉल्युशन बोर्ड की रिपोर्ट में 99 मिलियन लीटर सीवेज का खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.