F-35 और Su-57 के बिना भी सुपर पावर बनेगा IAF, ₹325000 करोड़ की डील से चीन-पाक को आया पसीना

बेंगलुरु 

 तमाम रिपोर्ट्स में फ्रांस की डसॉल्ट डिफेंस एविएशन कंपनी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राफेल फाइटर जेट डील पर आगे बढ़ने की बात कही जा रही है. अभी तक के सबसे बड़े लड़ाकू विमान खरीद करार के तहत 114 राफेल जेट खरीदने की बात कही जा रही है. इसके तहत 12 से 18 एयरक्राफ्ट फ्लाई-अवे यानी पूरी तरह से डेवलप कंडीशन में मिलेंगे, जबकि अन्‍य जेट का को-प्रोडक्‍शन भारत में होगा. रिपोर्टस की मानें तो यह डील ₹325000 करोड़ की है. तकरीबन डेढ़ दशक पहले भी सौ से ज्‍यादा राफेल जेट खरीदने को लेकर फ्रांस के साथ समझौता हुआ था, जिसे साल 2015 में रद्द कर दिया गया था. बाद में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के तहत 36 राफेल जेट खरीदे गए थे. इसकी डिलीवरी पूरी हो चुकी है. राफेल फाइटर जेट भारत के संवेदनशील एयरबेस पर तैनात हैं. इस जेट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं और उपयोगिता का प्रदर्शन किया था.

इसके बाद भारत अब 114 अतिरिक्‍त राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है. बता दें कि इंडियन नेवी के लिए 26 राफेल-M फाइटर जेट अलग से खरीदने का करार हुआ है, जो एडवांस स्‍टेज में है. अब सवाल उठता है कि 114 राफेल जेट को खरीदने का फैसला क्‍यों किया गया और यह डील पहले के खरीद समझौते से कैसे अलग होने वाला है. मौजूदा डील में दो सीक्रेट प्रोविजन किए गए हैं. इससे इंडियन एयरफोर्स साउथ एशिया रीजन में काफी शक्तिशाली हो जाएगी. एयर पावर कैलकुलस भी बदल जाएगा. चीन-पाकिस्‍तान जैसे देश भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले हजार बार सोचेंगे.

इंडियन एयरफोर्स के लिए फिलहाल 42 स्‍क्‍वाड्रन तय किया गया है, पर यह संख्‍या चिंताजनक तरीके से 30 से नीचे आ चुका है. इस गैप न केवल भरने कोशिश की जा रही है, बल्कि सैंक्‍शन्‍ड स्‍क्‍वाड्रन को 42 से बढ़ाकर 50 तक करने की प्‍लानिंग है, ताकि पश्चिमी और उत्‍तरी सीमा को अभेद्य बनाया जा सके. इन सबके बीच फ्रांस के रक्षा विमानन पोर्टल avionslegendaires.net की एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें दावा किया गया है कि भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित राफेल लड़ाकू विमान सौदा केवल 114 नए राफेल F4 फाइटर जेट की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कहीं बड़ा और व्यापक हो सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस पैकेज में भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में पहले से शामिल 36 राफेल F3R (3FR) स्‍टैंडर्ड के जेट्स को भी अत्याधुनिक F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जा सकता है. इससे भारतीय वायुसेना के अधिकांश राफेल विमान एक ही उन्नत तकनीकी स्तर पर आ जाएंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित 114 नए राफेल विमानों में से कम से कम 24 विमान भविष्य के राफेल F5 स्टैंडर्ड के हो सकते हैं, जिनका उत्पादन 2030 के बाद शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, इन 24 राफेल F5 विमानों का निर्माण पूरी तरह फ्रांस में ही किया जा सकता है, न कि भारत में प्रस्तावित लोकर प्रोडक्‍शन लाइन के तहत.

राफेल F4 vs राफेल F5

राफेल F4 राफेल F5
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मिशन को आसान बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल, जिससे पायलट पर काम का बोझ कम होगा और आसपास की स्थिति बेहतर समझ में आएगी. नया फाइटर जेट अब बिना पायलट वाले ड्रोन (UCAV) के साथ मिलकर काम करेगा. यह ड्रोन ‘लॉयल विंगमैन’ की तरह जेट के साथ उड़ान भरकर दुश्‍मन पर हमला करेगा.
एडवांस एवियोनिक्स: कॉकपिट में बड़े डिस्प्ले, आधुनिक होलोग्राफिक HUD और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम, जिससे जानकारी तेजी से साझा होगी. इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल ASN4G लगाने की तैयारी है, जो बहुत तेज रफ्तार से गहराई तक हमला (डीप अटैक) करने में सक्षम होगी.
नई और ताकतवर हथियार क्षमता: MICA NG मिसाइल (नई पीढ़ी) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसके अलावा AASM हैमर बम भी होगा. इस जेट में 1,000 किलो तक का बम ले जाने की क्षमता के साथ दूर से सटीक हमला करना संभव होगा. जेट में अब और ताकतवर रडार (RBE2XG) और खास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे दुश्‍मन के छिपे हुए विमान या स्‍टील्‍थ फाइटर जेट भी पकड़े जा सकेंगे.
TALIOS पॉड: AI से लैस उन्नत टारगेटिंग सिस्टम, जिससे निशाना ज्यादा सटीक होगा. TALIOS पॉड को बेहतर बनाया गया है, जिससे निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट को पहचानने की क्षमता बढ़ेगी.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: SPECTRA सिस्टम को और मजबूत किया गया है, जो दुश्मन के खतरों और मिसाइलों को जल्दी पहचानकर बचाव करेगा. नए डाटा लिंक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पायलट को युद्ध के दौरान फैसले लेने में आसानी होगी.
कनेक्टेड कॉम्बैट: रियल टाइम में सेना की अन्य इकाइयों के साथ डेटा शेयर करने की सुविधा. SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्‍टम को और मजबूत किया गया है, ताकि दुश्‍मन के रडार और मिसाइल से बेहतर बचाव हो सके.
साइबर सुरक्षा: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर साइबर प्रोटेक्शन. इसमें नई मिसाइलें और हथियार जोड़े जाएंगे, जो दुश्‍मन के एयर डिफेंस को नष्‍ट करने में मदद करेंगे.
ट्रेनिंग सुविधा: विमान में ही एडवांस ट्रेनिंग के लिए सिमुलेशन सिस्टम. जेट में अब ज्‍यादा ताकतवर इंजन लगाए जाने की उम्‍मीद है, जिससे इसकी रफ्तार और ताकत बढ़ेगी.
अपग्रेड में आसानी: पुराने राफेल F3 वर्जन को आसानी से F4 में बदला जा सकता है. यह विमान पूरी तरह पांचवीं पीढ़ी का स्‍टील्‍थ जेट नहीं है, लेकिन पुराने मॉडल की तुलना में इसे इंटरसेप्‍ट करना आसान नहीं होगा, जिससे दुश्‍मन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होगा.

 राफेल F4 अपग्रेड: मौजूदा फ्लीट में बड़ा बदलाव

मीडिया रिपोर्ट में किया गया यह दावा यदि सही साबित होता है तो भारतीय वायुसेना के पास तब राफेल के तीन अलग-अलग वर्जन (F3R, F4 और भविष्य में F5) एक साथ सेवा में होंगे, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के 36 राफेल F3R विमानों को F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाना एक साधारण सुधार नहीं, बल्कि एक गहरा और व्यापक आधुनिकीकरण होगा. इस अपग्रेड में एवियोनिक्स, सेंसर, हथियारों का इंटीग्रेशन, कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम और रखरखाव ढांचे में बड़े बदलाव शामिल होंगे. F4 अपग्रेड का सबसे अहम हिस्सा उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम है. इसमें पहले से लगे RBE2 AESA रडार को नई क्षमताएं दी जाएंगी. जैसे सिंथेटिक अपर्चर रडार और ग्राउंड मूविंग टारगेट की पहचान व ट्रैकिंग. इससे राफेल खराब मौसम या बादलों के बीच भी लंबी दूरी पर जमीनी टारगेट की साफ तस्वीर बना सकेगा. इसके अलावा फ्रंट सेक्टर ऑप्ट्रॉनिक्स सिस्टम में नई पीढ़ी का इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सेंसर जोड़ा गया है. इससे कम रडार सिग्नेचर वाले या स्टील्थ विमानों का बिना रडार चालू किए पता लगाया जा सकेगा. यह क्षमता सीक्रेट और साइलेंट इंटरसेप्शन मिशनों में राफेल को बड़ी बढ़त देती है.

पायलट के लिए स्मार्ट कॉकपिट

राफेल F4 में स्कॉर्पियन हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले शामिल किया गया है, जिससे पायलट सिर्फ लक्ष्य की ओर देखकर ही हथियार और सेंसर को निर्देश दे सकता है. इससे हवाई लड़ाई में प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है. कॉकपिट में बड़े और हाई-रिजोल्यूशन साइड डिस्प्ले भी लगाए गए हैं, जिससे पायलट को एक साथ कई जानकारियां साफ तौर पर मिलती हैं. इन सभी सुधारों से राफेल F4, F3R की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट, तेज और जानकारी से भरपूर लड़ाकू विमान बन जाता है. राफेल F4 की एक खास पहचान इसका नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध के लिए तैयार होना है. यह विमान आधुनिक कॉम्बैट क्लाउड का हिस्सा बनकर काम करता है, जहां यह रियल-टाइम में अन्य विमानों, जमीनी सेनाओं, नौसेना प्लेटफॉर्म और कमांड सेंटर से डेटा साझा कर सकता है.

F4 स्टैंडर्ड में थेल्स कंपनी का CONTACT सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो लगाया गया है, जो सुरक्षित और मजबूत संचार सुनिश्चित करता है. सैटेलाइट कम्युनिकेशन के साथ मिलकर यह प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के माहौल में भी प्रभावी रहती है. साथ ही बेहतर इंट्रा-पैट्रोल डाटा लिंक की मदद से कई राफेल विमान एक-दूसरे के साथ सेंसर और लक्ष्य की जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे वे एक टीम की तरह लड़ते हैं.
राफेल F5: दुश्‍मनों के लिए काल

इस रिपोर्ट में राफेल F5 का जिक्र भारत की दीर्घकालिक वायुसेना योजना (Long Term Air Force Plan) को और दिलचस्प बना देता है. माना जा रहा है कि F5 स्टैंडर्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेंसर फ्यूजन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, मानव रहित ड्रोन के साथ मिलकर ऑपरेशन करने की क्षमता और नई पीढ़ी के हथियार शामिल होंगे. हालांकि, F5 से जुड़ी कई जानकारियां अभी गोपनीय हैं, लेकिन इसे भविष्य की छठी पीढ़ी की लड़ाकू प्रणालियों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अगर भारत 24 राफेल F5 विमान खरीदता है, तो उसे दुनिया के सबसे उन्नत नॉन-स्टील्थ लड़ाकू विमानों में से एक मिलेगा.

यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो राफेल कार्यक्रम भारत और फ्रांस के बीच एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले लेगा. इससे भारतीय वायुसेना को 2040 के दशक तक एक आधुनिक, नेटवर्क सेंट्रिक और लगातार विकसित होने वाला लड़ाकू बेड़ा मिलेगा, जो बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा हालात में भारत की एयर पावर को मजबूत करेगा.

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