क्या लॉटरी सिस्टम तय करेगा मुंबई का अगला मेयर? शिंदे मॉडल पर सियासी हलचल

मुंबई 
महाराष्ट्र के नगर महापालिका परिषद चुनाव नतीजों की चर्चा दिल्ली तक हो रही है, लेकिन सभी की निगाहें मुंबई के मेयर पद पर लगी हुई हैं. पिछले 28 सालों से बीएमसी पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को करारी मात खानी पड़ी है. ऐसे में बीजेपी को पहली बार मुंबई में मिली भारी जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि देश की सबसे समृद्ध माने जाने वाली महानगर पालिका बीएमसी के मेयर कौन बनेगा? 

मुंबई नगर महापालिका चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो शिंदे के शिवसेना के साथ बीएमसी पर अपना कब्जा जमाए रखने का नंबर गेम भी हैं. इसके बाद भी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में वक्त लगेगा, इसलिए इस बीच कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं. 

बीएमसी के नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा.  मुंबई नगर प्रशासन द्वारा नवनिर्वाचित पार्षतों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में यह चुनाव होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा? 

शिंदे के 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा मेयर
मुंबई में बीएमसी का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (शहरी विकास विभाग) के द्वारा तय होता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण का फैसला शिंदे के विभाग के द्वारा तय किया जाना है.  

बीएमसी में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग मेयर पद के श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है. 

मेयर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया को चुनाव के पहले तय नहीं किया. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. ऐसे में मुंबई के मेयर का पद भी तय नहीं है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है.

माना जा रहा है कि इसी हफ्ते अब एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाला शहरी विकास विभाग मेयर पद के आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपना सकता है. ऐसे में पहले शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर का आरक्षण तय होगा. सूत्रों की मानें तो 22 जनवरी को आरक्षण तय हो सकता है और उसके बाद मेयर ही कौन बनेगा, उसे लेकर फैसला होगा. 

महाराष्ट्र में कैसे होगा नए मेयरों का चुनाव
मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएमसी के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है. 

बीएमसी मेयर को काफी ताकतवर माना जाता है और इस पद के लिए दावेदारी भी बड़ी होती है. मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद (नगर सेवक) चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, वही मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है. 

नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं. मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है.

बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा. हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है. 

मेयर के साथ उपमेयर का भी होगा चुनाव
शहरी विकास विभाग (यूडीडी) इसी हफ्ते मेयर पद के आरक्षण को लेकर लॉटरी निकालेगा. इसमें यह तय होगा कि मेयर पद सामान्य वर्ग, महिला या किसी आरक्षित श्रेणी के लिए होगा. आरक्षण की घोषणा के बाद पात्र पार्षद नामांकन दाखिल करेंगे और उसके कुछ दिनों बाद मेयर का चुनाव कराया जाएगा. इस तरह मेयर चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होना तय माना जा रहा है. मेयर के साथ उपमेयर का भी चुनाव होगा. इसके अलावा स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन के पद भी सभी की निगाहें हैं. 

बीएमसी में भले ही मेयर का पद सबसे बड़ा हो, लेकिन असली ताकत किसी और के पास होती है. सबसे अमीर नगरपालिका में दो विंग होती है, पहली राजनीतिक विंग और दूसरी प्रशासनिक विंग. राजनीतिक विंग के मुखिया मेयर होते है जबकि प्रशासनिक विंग को नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) हेड करते हैं. ऐसे में बीजेपी के पास अपने दम पर मेयर बनाने का नंबर नहीं है, जिसके चलते शिंदे के समर्थन से ही बीएमसी पर कब्जा जमा सकता है. इस वजह से शिंदे की बार्गेनिंग पावर बढ़ गई है और उनकी नजर भी बीएमसी के अहम पद है. 

बीजेपी और एकनाथ शिंदे में होगी शह-मात
मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं. साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है. हालांकि, किसी दल के पास अगर स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है.

मुंबई में इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर नामांकित पार्षदों की संख्या पांच से बढ़ाकर दस कर दी गई थी. माना जा रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को नामांकित पार्षदों में बड़ा हिस्सा  मिल सकता है, जिससे मेयर चुनाव के नतीजों पर असर पड़ सकता है.  ऐसे में देखना होगा कि मेयर पद के शह-मात के खेल में कौन किस पर भारी पड़ता है? 

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