महिला नसबंदी का कैंप चर्चा में: धार में 180 महिलाओं को ऑपरेशन के बाद जमीन पर लिटाया गया

धार

मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र धार जिले में महिला नसबंदी कैंप की शर्मनाक तस्वीर आई सामने आई है। यहां करीब 180 महिलाओं का बुनियादी सुविधाओं के बिना नसबंदी ऑपरेशन कर दिया गया। ऐसा बताया जा रहा है कि यहां डॉक्टर द्वारा हर 2 मिनट में एक महिला की नसबंदी कर दी गई। लापरवाही सामने आने के बाद 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर जांच शुरू कर दी गई है। ऑपरेशन के बाद कैंप में जमीन पर लेटी महिलाओं के वीडियो भी सामने आए हैं।

धार जिले के आदिवासी क्षेत्र बाग में नसबंदी कैंप में महिलाओं के साथ हुई लापरवाही ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 180 आदिवासी महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिजनों के साथ बाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नसबंदी कैंप में पहुंची थीं। महिलाओं को उम्मीद थी कि सरकारी शिविर में उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक चिकित्सा सुविधा मिलेगी, लेकिन यहां का नजारा बेहद शर्मनाक और चिंताजनक नजर आया। कैंप में न पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी और ना ही बैठने की उचित इंतजाम। कैंप में जिन महिलाओं की नसबंदी की गई, उन्हें भी ऑपरेशन के बाद खुले आसमान के नीचे धूप में जमीन पर ही लिटा दिया गया। इस दौरान ऑपरेशन कराने वाली महिलाएं गर्मी और दर्द से बेचैन और परेशान नजर आईं, जबकि उनके परिजन कपड़ों से हवा कर उन्हें राहत देने की कोशिश करते दिखाई दिए।

वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि नसबंदी केंद्र के बाहर कुछ महिलाएं और पुरुष छोटे-छोटे बच्चों को कपड़े की झोली लगाकर झूला झूल रहे थे, जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक नसबंदी नहीं हो पाई। लिहाजा भूखे-प्यासे परेशान होकर बाहर बैठे रहे। उन्होंने सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं में सुधार किए जाने की मांग की।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे

स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी डॉ. वीर बहादुर सिंह मुवेल कैंप के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। स्टाफ द्वारा जानकारी देने के बाद वह मौके पर पहुंचे और बैठक में होने की बात कही, जबकि उनके ही क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 180 से अधिक महिलाओं की नसबंदी की जा रही थी। अब इस मामले में 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है और जांच जा जारी है।

जानकारी के अनुसार, पता चला है कि स्वास्थ्य केंद्र पर एक ही प्राइवेट डॉक्टर है, जिसके जिम्मे करीब 180 ऑपरेशन सौंप दिए गए थे। प्राइवेट डॉक्टर डॉ. राकेश डावर द्वारा तेजी से ऑपरेशन किए जा रहे थे। वहीं अस्पताल के मैनेजर बसंत अजनार ने दावा किया कि वे मात्र 2 मिनट में एक नसबंदी कर देते हैं। सभी ऑपरेशन इतनी तेजी से किए गए कि अब सुरक्षा और मेडिकल प्रोटोकॉल पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल में सिर्फ एक परमानेंट डॉक्टर

बता दें कि, बाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही परमानेंट डॉक्टर डॉ. हरिसिंह के भरोसे संचालित हो रहा है। यहां दो डॉक्टर कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड पर हैं और दो डॉक्टर संविदा पर नियुक्त किए गए। एक ही डॉक्टर के भरोसे इतना बड़ा स्वास्थ्य केंद्र संचालित होने से अब इस पर सवाल उठना लाजिमी है। सीएमओ डॉ. वीरभद्र सिंह मुवेल का कहना है डॉक्टर्स की कमी की बात जिला मुख्यालय के अधिकारियों को बता दी गई है।

स्वास्थ्य केंद्र के स्टोर-कीपर बसंत अजनार ने बताया कि कैंप 180 से अधिक मरीज पहुंचे हैं और बेड्स की कमी के कारण ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर ही लिटाना पड़ा। उनका कहना था कि डॉक्टर विशेषज्ञ हैं और समय की कोई समस्या नहीं है, लेकिन व्यवस्थाओं की यह कमी खुद स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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