AI फोटो-वीडियो डालना अब जोखिम भरा? आज से लागू हुए इंटरनेट के 3 नए नियम, जानना जरूरी

नई  दिल्ली

अगर आप सोशल मीडिया पर एआई (AI) से बनी तस्वीरें या वीडियो शेयर करने के शौकीन हैं तो आज से आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित 'आईटी (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021' के नए संशोधन आज यानी 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। अब इंटरनेट पर किसी भी भ्रामक या एआई कंटेंट को बिना लेबल के पोस्ट करना आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता है।

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI Impact Summit' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट को समाज के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने साफ किया कि एआई कंटेंट के लिए 'वॉटरमार्किंग' और सोर्स स्टैंडर्ड तय करना अब समय की मांग है। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी पर और ज्यादा सतर्क रहने पर जोर दिया।

क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट (SGI)?
नए नियमों के अनुसार एआई या कंप्यूटर द्वारा तैयार या मॉडिफाई किया गया कोई भी कंटेंट जो किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना जैसा दिखता हो उसे SGI माना जाएगा। ऐसे कंटेंट को शेयर करने से पहले 'वॉटरमार्क' या लेबल लगाना अनिवार्य है ताकि लोग समझ सकें कि यह असली नहीं है। सामान्य फोटो या वीडियो एडिटिंग को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

लागू हुए ये 3 बड़े बदलाव
    अनिवार्य लेबलिंग: एआई कंटेंट पर लगा 'AI Label' एक बार लगने के बाद हटाया नहीं जा सकेगा।
    
    प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म्स को एआई कंटेंट पहचानने के लिए विशेष टूल्स बनाने होंगे। बिना वेरिफिकेशन के ऐसा कंटेंट अपलोड नहीं होगा।

    नियमित चेतावनी: सोशल मीडिया कंपनियां हर 3 महीने में अपने यूजर्स को एआई के गलत इस्तेमाल पर होने वाली सजा और जुर्माने के बारे में अलर्ट भेजेंगी।

नो-गो जोन: इन पर है सख्त पाबंदी
सरकार ने कुछ श्रेणियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट, फर्जी दस्तावेज, हथियार बनाने की जानकारी और किसी की छवि बिगाड़ने वाले डीपफेक वीडियो बनाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

सख्त कानून और भारी जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। अगर सरकार किसी कंटेंट को हटाने का निर्देश देती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा (जो पहले 36 घंटे था)। शिकायतों पर रिस्पॉन्स देने की समय सीमा को घटाकर मात्र 12 घंटे कर दिया गया है।

 

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