प्रदेश की दीदियों के बनाए उत्पाद अब अमेजन सहेली, इंडिया पोस्ट और अन्य ई-प्लेटफार्म पर होंगे उपलब्ध

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ एकता की शक्ति का सजीव उदाहरण है। बहनों द्वारा एकजुटता से किए जा रहे प्रयास 'बंद मुट्ठी लाख की' के भाव को चरितार्थ करते हुए देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। बहनें आज ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चलाने के साथ गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे कार्य भी कर रही हैं। कैफे संचालन से लेकर मार्केट का टारगेट पूरा करने में अव्वल बहनें अचार, पापड़ निर्माण सहित कई छोटे उद्योगों से बेहतर कमाई कर रही हैं। भारतीय संस्कृति में मातृ सत्ता का विशेष महत्व है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बहनें सशक्त हो रही हैं। प्रदेश के 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 65 लाख से अधिक दीदियां जुड़कर सशक्त हुई हैं। इनमें से 12 लाख से अधिक दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। राज्य सरकार प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में विभिन्न कंपनी और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। मध्यप्रदेश, देश का सर्वाधिक प्राकृतिक खेती वाला राज्य है। हमारे स्व-सहायता समूहों की 50 हजार बहनें प्राकृतिक खेती में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में महिला बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। साथ ही बजट का कुल 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में स्वसहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ कर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, कौशल विकास मंत्री  गौतम टेटवाल और पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के स्व सहायता समूहों की दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न उत्पादों के स्टालों का अवलोकन कर दीदियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी स्थल पर ग्राम छावनी पठार के मिलेट्स कैफे पर स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के 7 वाहनों को झंडी दिखाकर रवाना किया। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदीयों द्वारा तैयार स्पेशल होली हैम्पर को लाँच किया गया। इसमें प्राकृतिक रंग, देशी घी, मिष्ठान, गोकाष्ठ, पूजन सामग्री और टीशर्ट जैसे 10 उत्पाद शामिल हैं। उज्जैन, सागर, कटनी, सीहोर, रीवा जिले की दीदीयों द्वारा तैयार होली हैम्पर पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी) का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रशिक्षण केन्द्र पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका मार्ट ग्वालियर, जबलपुर एयरपोर्ट पर स्व-सहायता समूहों के रिटेल आउटलेट और संभागीय एवं जिला स्तर पर होली मेलों का वर्चुअली शुभारंभ किया।

कार्यशाला में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ (एमपीएसआरएलएम) इंडिया पोस्ट, अमेजन सहेली, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विस, बुद्धा इंस्टीट्यूट, टीआरआईएफ और साइटसेवर संस्थान के साथ एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट कार्य करने वालीं स्व-सहायता समूहों की 5 दीदियों को सम्मानित किया। कार्यशाला में विपणन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली गुना जिले की मती मीनाक्षी फरागते ने अपनी सफलता की कहानी सभी के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता के इतिहास का आज स्वर्णिम दिन है। पारिवारिक स्तर पर मां-बेटियों-बहनों के हाथों से बने व्यंजन पूरे परिवार में आनंद का संचार करते हैं और यह व्यंजन ही त्यौहार की प्रसन्नता का आधार बनते हैं। आजीविका मिशन द्वारा हमारी बहनों के हाथों से बनी सामग्री को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल सराहनीय है। भारतीय संस्कृति में ऋतुओं से व्यंजनों तथा अन्य उपयोगी सामग्री बनाने का विशेष संबंध है। क्षमतावर्धन की आज की कार्यशाला हमारी बहनों के हुनर और कर्मठता को नई दिशा प्रदान करेगी। घर से निकलकर बैंकों और शासन के सहयोग से स्वयं को व्यापारिक गतिविधियों में सफलतापूर्वक स्थापित करने की बहनों की पहल ने ग्राम स्तर पर विकास को नई गति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार बहनों को प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है। बहनें अपने समूह की शक्ति को बढ़ाएं और नई मंजिलें प्राप्त करें, राज्य सरकार सदैव उनके साथ है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वसहायता समूहों की दीदियों ने सफलता का मुकाम हासिल किया है। हमारी मातृ शक्ति अपनी क्षमता के बल पर आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश के विकास में दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में बहनों का महत्वपूर्ण योगदान होगा। मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर महिलाओं की सफलता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रमाण आँकड़ों और जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बहनों से बदलती तकनीक के साथ स्वयं को अपडेट रखते हुए आगे बढ़ने का आव्हान किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से देश के बीच में स्थित है, देश का अधिकांश आवागमन मध्यप्रदेश से होता है, इस स्थिति का लाभ उठाते हुए हमें अपने व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने के हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आजीविका मिशन के डाक विभाग के साथ हुए एमओयू के संबंध में कहा कि इससे समूहों के उत्पादकों की सप्लाई चेन मजबूत होगी। मंत्री  पटेल होली के अवसर पर नशा और अकर्मण्यता की बुराई को जलाने का सभी से आहवान किया।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विभिन्न जिलों के स्व-सहायता समूहों की दीदियों को उत्पादन और मार्केटिंग में सहायता व मार्गदर्शन प्रदान करेगी। इस कार्यशाला से प्रदेश के विभिन्न जिलों से समूहों को अपने उत्पाद राजधानी भोपाल में प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना में प्रदेश के 6 जिले- बैतूल, विदिशा, राजगढ़, कटनी, ग्वालियर एवं भोपाल से 7 एजीईवाय गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई गई है। यह गाड़ियां दूर-दराज के क्षेत्रों में दीदियों को आवागमन और उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगी। समूह की दीदियों को सीएलएफ के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में अभी 43 रूरल मार्ट संचालित हैं। राज्यमंत्री मती राधा सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव मती दिपाली रस्तोगी, सचिव कृषि  निशांत वरवड़े, चीफ पोस्ट मास्टर जनरल (एमपी सर्कल)  विनोद माथुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित स्व-सहायता समूहों की दीदियां बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।

 

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