वसुंधरा राजे सिंधिया ने महाकाल मंदिर में नंदी हाल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद

उज्जैन
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में आज यानी बुधवार को सुबह राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया दर्शन करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने नंदी हाल से भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर में दर्शन व्यवस्था की जमकर सराहना भी की। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद भगवान वीरभद्र और महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का भी पूजन किया। नंदी हाल में नंदी का पूजन कर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया।

मंदिर प्रबंधन ने निभाई परंपरा

मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल एवं सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने सिंधिया का स्वागत एवं सत्कार किया गया। वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि राजस्थान के लोग बड़ी संख्या में महाकाल मंदिर में आते हैं, भगवान महाकाल का हम सब पर आशीर्वाद रहा है। सुखी-दुख में हम भगवान शिव के पास आते हैं। महाकाल मंदिर में भक्तों को सुलभ दर्शन मिल रहे हैं।

होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं

इधर, होली पर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चंद्रग्रहण के कारण 3 और 4 मार्च को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं, लेकिन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने 2 और 3 मार्च को पारंपरिक रूप से होली मनाने का कार्यक्रम तय किया है।

महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल के दरबार में ग्रहण का विशेष प्रभाव नहीं होता। ग्रहण काल में भी दर्शन व्यवस्था निरंतर जारी रहती है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम को होली सजाई जाएगी और सांध्य आरती में बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद शाम 7 बजे विधिवत होलिका दहन किया जाएगा। 3 मार्च की सुबह होने वाली भस्म आरती में भी प्रतिदिन की तरह पूजन-अर्चन होगा, लेकिन विशेष रूप से बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर होली का पर्व मनाया जाएगा।  

हर्बल गुलाल और शक्कर की माला चढ़ेगी

विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष भी परंपरानुसार 2 मार्च को संध्या आरती के बाद होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, संध्या आरती में बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और शक्कर की माला चढ़ाई जाएगी। इसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन के साथ होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए दर्शन करें और पर्व को श्रद्धा व अनुशासन के साथ मनाएं।

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