मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का दावा, सचिवालय को विधानसभा जैसा बनाने से प्रदेश पहुंचेगा नई ऊंचाई

भोपाल
मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। 22 विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के बिना ही सरकार ने वर्ष 2026-27 का बजट पारित करने के लिए विनियोग विधेयक प्रस्तुत किया। कांग्रेस के सदस्यों ने चर्चा के अवसर न दिए जाने के विरोध में बहिर्गमन कर दिया। इस बीच 4,38,417 करोड़ का बजट पारित कर दिया गया।

इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जितना अच्छा विधानसभा सचिवालय है, यदि उतना अच्छा सरकार का सचिवालय भी हो जाए तो पता नहीं यह प्रदेश किस ऊंचाई तक पहुंच जाए। प्रदेश की विधानसभा की परंपरा बहुत उच्चकोटि की रही है, जिसकी चर्चा सारे देश में की जाती है।

पूर्व के मंत्री रहे हैं, चाहे इधर बैठने वाले हों या उधर बैठने वाले हों, सबने हमेशा अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार काम किया है, पर विधान सभा की गरिमा को ठेस लगे ऐसा कोई काम नहीं किया। हमने आपस में एक दूसरे के खिलाफ सड़क पर कितनी भी लड़ाई लड़ी, सदन में भी हमने एक दूसरे के खिलाफ वार्तालाप किया हो, बहस की हो, पर जब हम बाहर निकलते हैं तो एक दूसरे के प्रति जो संबंध है, जो मित्रता है, इस पर मुझे गर्व है कि मैं मप्र की विधान सभा का सदस्य हूं।

25 विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा प्रस्तावित थी

विधानसभा में शुक्रवार को 25 विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा प्रस्तावित थी। सदन की कार्यवाही शांति के साथ चल रही थी। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक एवं धर्मस्व विभाग की अनुदान मांगों पर दो घंटे चर्चा हुई और प्रस्ताव पारित किए गए लेकिन इसके बाद मुखबंद का उपयोग करते हुए शेष 22 विभागों की अनुदान मांगों को एक साथ प्रस्तुत कर पारित कराया और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने विनियोग विधेयक प्रस्तुत कर दिया।

इसके पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि निर्धारित समय सीमा में अनुदान मांगें स्वीकृत होना आवश्यक है और कार्य दिवस कम हैं इसलिए वर्ष 2026-2027 के आय-व्ययक में सम्मिलित अनुदानों की मांगों का प्रस्ताव एक साथ रखा जाएगा।

हमें बार-बार औकात याद दिलाई गई

सत्र की समाप्ति पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि हमने जब इंदौर में दूषित जल से 35 लोगों की मौत पर सवाल किया तो जवाबदेही के स्थान पर औकात याद दिलाई गई। स्वच्छ जल पर चर्चा के लिए अनुरोध किया तो सरकार ने विपक्ष के नेताओं को जनता से जुड़े मुद्दे पर सवाल करने पर औकात याद दिलाई। जब कैग की रिपोर्ट में सामने आए भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग की फिर औकात दिखाई।

चाहे सदन के अंदर हो या बाहर, सरकार और उससे जुड़े लोग हर दिन प्रदेशवासियों को उसकी औकात याद दिला रहे हैं। सिंगरौली के धिरौली कोल परियोजना के विस्थापित आदिवासियों और नियम ताख पर रखकर अदाणी को जमीन देने का मुद्दा उठाया तो सरकार ने झूठ फैलाना शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायक दल ने प्रदेश की जनता के हर मुद्दे पर मुखर होकर अपनी बात रखी और आगे भी रखते रहेंगे।

अध्यक्ष बोले- सदन में मतभेदों के बावजूद मनभेद की स्थिति नहीं बनी

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमारी दलीय निष्ठाएं भिन्न हो सकती हैं, परंतु लक्ष्य सदैव जनहित ही रहता है। संसदीय लोकतंत्र में सहमति-असहमति, समर्थन-विरोध तथा दलीय प्रतिबद्धताएं स्वाभाविक हैं। मतभेद लोकतंत्र की एक शक्ति हैं, परंतु यह संतोष का विषय है कि मतभेदों के बावजूद मनभेद की स्थिति नहीं बनी।

सत्र के दौरान अनेक विषयों पर गहन एवं कभी-कभी तीव्र बहस भी हुई, किंतु सभी कार्य लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुए। वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी कहा कि सत्र अत्यंत सार्थक, परिणामकारी एवं जन भावनाओं के अनुरूप रहा।

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