राज्यसभा चुनाव का असर संगठन पर भी? MP के कई दिग्गजों को राष्ट्रीय टीम में मिल सकता है बड़ा रोल

भोपाल
राज्यसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के संगठन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि 16 मार्च के बाद भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो सकता है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

राज्यसभा चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार बिहार, छत्तीसगढ़ समेत करीब दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर मंथन भी शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत बनाने के उद्देश्य से अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी टीम में जगह दी जा सकती है।

राष्ट्रीय संगठन में पहले से मजबूत है मध्य प्रदेश
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश को पहले से ही खास महत्व मिलता रहा है। वर्तमान में प्रदेश से कई नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं, जबकि ओमप्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी प्रदेश के नेताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। यही वजह है कि नई टीम में भी मध्य प्रदेश की मजबूत भागीदारी की संभावना जताई जा रही है।

नड्डा की टीम में भी था प्रदेश का प्रभाव
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की टीम में भी मध्य प्रदेश के चार नेताओं को जगह मिली थी। उस समय कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव के पद पर थे। बाद में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इससे पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव—बावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर—रह चुके हैं।
 
चार से पांच नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी
भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश से चार से पांच नेताओं को जगह मिल सकती है। इनमें एक-दो वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। कुछ नेताओं को विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में भी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

दरअसल, मध्य प्रदेश को भाजपा के लिए लंबे समय से एक मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। संघ और जनसंघ की जड़ों से जुड़ा यह प्रदेश पार्टी के लिए प्रयोगशाला की तरह रहा है। मजबूत संगठन और अनुभवी कार्यकर्ताओं के कारण यहां के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार अवसर मिलता रहा है। ऐसे में नई टीम में मध्य प्रदेश की भूमिका फिर अहम रहने की संभावना है।

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