SIR केस पर CJI का कड़ा रुख: ‘ऐसी याचिका बर्दाश्त नहीं’, कोर्ट में जताई नाराजगी

नई दिल्ली
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज (मंगलवार, 10 मार्च को) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहीं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी पर CJI भड़क गए। दरअसल, 28 फरवरी को प्रकाशित हुई पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती दी गई थी, जिसकी वह पैरवी कर रही थीं। याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उनके नाम SIR से पहले मतदाता सूची में थे और उन्होंने मतदाता के तौर पर नाम शामिल करने तथा बने रहने के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे लेकिन जरूरी डॉक्यूमेंट्स स्वीकार न करने की वजह से वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया है।

ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर आपको भरोसा नहीं है?
बहस के दौरान गुरुस्वामी ने कहा, "ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने लगभग 7 लाख दावों पर फैसला किया है। 63 लाख पर फैसला हो रहा था। 57 लाख अभी बाकी हैं।" इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, "हमें पता था कि जब ज्यूडिशियल ऑफिसर्स अपॉइंट होंगे तो आप लोग भाग जाएँगे। HC के चीफ जस्टिस ने हमें बताया है कि 10 लाख पर फैसला हो चुका है। आज सुबह हमें बताया गया।" इसके बाद CJI ने् भड़कते हुए कहा, “आपका एप्लीकेशन प्रीमैच्योर है और इससे लगता है कि आपको ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर भरोसा नहीं है। आपने ऐसी याचिका डालने की हिम्मत कैसे की? किसी को भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।”

'CJI के रूप में इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा'
इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल नहीं कर रहे हैं। इस पर CJI ने कहा, "हो सकता है आपने न किया हो। लेकिन सवाल हैं। भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।" इसके बाद गुरुस्वामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल नहीं उठा सकता। हम चीफ जस्टिस के सामने पेश हुए हैं और उनके सामने पेश होना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के पास अब मोटे तौर पर 50 लाख केस हैं जिन पर फैसला होना है। लगभग 48 लाख मैप्ड वोटर हैं.. हम कहते हैं कि वे मैप्ड हैं क्योंकि वे 2002 के इलेक्टोरल रोल में थे और उन्होंने वोट दिया है..

वोटिंग से एक दिन पहले तक…
CJI ने कहा, “इसीलिए SIR हैं। सभी असली वोटर शामिल किए जाएंगे। सभी अनऑथराइज्ड वगैरह नहीं होंगे। इस पर ज्यूडिशियल ऑफिसर्स विचार कर रहे हैं। हमें इस पर क्यों विचार करना चाहिए। वोटिंग से एक दिन पहले तक अगर किसी वोटर पर से बादल हट जाता है तो वह वोट दे सकता है।” इसी बीच CJI ने दूसरे वकील की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मुझे वह एप्लीकेशन ढूंढने दीजिए। उस पर कंटेम्प्ट जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, "क्या आपने इसे फाइल किया है?"

अगर हम सजा देना चाहते तो…
बार एंड बेंच के मुताबिक, इस पर सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा, "नहीं माय लॉर्ड। हमने नहीं किया है। चिंता यह है कि बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट पब्लिश करनी होगी।" इस पर CJI ने कहा, "तो हमें इसे ढूंढने दीजिए।" इसी दौरान एडवोकेट गुरुस्वामी ने फिर से CJI से अनुरोध करते हुए कहा, प्लीज 48 लाख मैप्ड वोटरों को सजा न दें। इतना सुनते ही बेंच के दूसरे जज जस्टिस बागची ने कहा कि अगर हम सजा देना चाहते तो हम इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा कि हम तारीख के करीब आने पर स्थिति का जायज़ा लेंगे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच "विश्वास की कमी" और सहयोग के अभाव का उल्लेख करते हुए इस स्थिति को "असाधारण" बताया था और मतदाता सूची में "तार्किक विसंगतियां" श्रेणी से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे की निगरानी के लिए सेवारत और सेवानिवृत्त जिला एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ज्यूडिशियल ऑफिसर्स) की तैनाती का निर्देश दिया था।

 

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