मिलेट्स की खेती से बढ़ रही किसानों की आय

रायपुर

दंतेवाड़ा में रागी उत्पादन की नई पहल

मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती कम लागत, कम पानी और बिना रसायनों के होने वाली एक अत्यधिक लाभदायक व पौष्टिक खेती है, जो 80-90 दिनों (जून-जुलाई से) में तैयार होती है। ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कुटकी जैसे मिलेट्स बंजर या कम उपजाऊ भूमि के लिए भी उपयुक्त हैं। दंतेवाड़ा जिला अब मिलेट्स उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा आधुनिक तकनीक मददगार        

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले में मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की जा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग के प्रयासों से अब किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मदद मिल रही है।

दांतेवाड़ा जिले के प्रगतिशील किसान उन्नत ‘ विधि’ से रागी (मडिया) की कर रहे हैं खेती        

दंतेवाड़ा जिले के कृषि इतिहास में पहली बार लगभग 300 प्रगतिशील किसान उन्नत ‘ विधि’ से रागी (मडिया) की खेती कर रहे हैं। इस नई पद्धति से रागी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पोषक अनाजों की खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। रागी को पोषण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम और आयरन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने किसानों में उत्साह       

इस पहल को सफल बनाने के लिए कृषि विभाग और भूमगादी की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दे रही है। किसानों को बुवाई की सही विधि, पौधों के बीच उचित दूरी, जैविक खाद का उपयोग और फसल प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है। इससे किसानों में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के प्रति उत्साह बढ़ रहा है।

जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने किया जा रहा है प्रेरित       

विधि’ से रागी की खेती कई तरह से लाभदायक मानी जाती है। इस पद्धति में बीज कम लगता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही पारंपरिक खेती की तुलना में पानी की आवश्यकता भी कम होती है, जो वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी है। पौधों को पर्याप्त जगह मिलने से उनका बेहतर विकास होता है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। यह पद्धति जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।

दंतेवाड़ा जिले में रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी अन्य फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।      

इस पहल से दंतेवाड़ा के किसान पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग करते हुए कृषि में नई पहचान बना रहे हैं। मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा मिलने से न केवल किसानों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

More From Author

पापों से मुक्ति दिलाने वाली पापमोचनी एकादशी: जानें 15 मार्च के व्रत की पूजा विधि और महत्व

ज्ञानवीर विश्वविद्यालय युवाओं के सामर्थ्य और सपनों को देगा नई ऊंचाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.