सरकार कर सकती है मोबाइल डेटा पर नया टैक्स, हर GB डेटा के लिए एक्स्ट्रा चार्ज का सुझाव

 नई दिल्ली

सरकार इंटरनेट को महंगा करने की तैयारी में है। दरअसल रिपोर्ट्स की मानें, तो अब हर GB डेटा के इस्तेमाल के साथ आपकी जेब से ज्यादा पैसे कट सकते हैं। फिलहाल सरकार में इस पर मंथन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार की कमाई को बढ़ाने के अनोखे तरीके के रूप में 'डेटा यूसेज टैक्स' लाने का प्रस्ताव चर्चा में है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हालिया समीक्षा बैठक में इस पर चर्चा हुई। इस बारे में पता चलते ही टेक जगत में हलचल मच गई है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि इसका सीधा असर लोगों के मोबाइल रिचार्ज प्लान के बजट पर पड़ सकता है।

भारत में आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करना महंगा हो सकता है. सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने के विकल्प को देख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में Department of Telecommunications (DoT) से कहा गया है कि वह इस पर स्टडी करे और बताए कि क्या डेटा यूज़ पर टैक्स लगाना संभव है या नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर की एक रिव्यू मीटिंग में यह मुद्दा सामने आया. इसके बाद DoT को कहा गया कि वह यह जांच करे कि मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर टैक्स लगाया जा सकता है या नहीं और अगर लगाया जाए तो उसका मॉडल क्या होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिस विकल्प को देख रही है उसमें ₹1 प्रति GB डेटा पर टैक्स लगाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो हर बार जब कोई यूजर मोबाइल डेटा इस्तेमाल करेगा तो उस पर यह अतिरिक्त चार्ज जुड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि अगर ₹1 प्रति GB का टैक्स लागू होता है तो इससे सरकार को हर साल लगभग ₹22,900 करोड़ तक की कमाई हो सकती है. हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

भारत दुनिया के उन देशों में है जहां मोबाइल डेटा काफी सस्ता है. सस्ते इंटरनेट की वजह से भारत में डेटा की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और रील्स देखने की वजह से मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।

एक और अहम बात यह है कि अभी भी मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर 18% GST लिया जाता है. यानी यूजर्स पहले से ही टेलीकॉम सर्विस पर टैक्स दे रहे हैं. अगर भविष्य में डेटा पर अलग से टैक्स लगाया जाता है तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा एक नया चार्ज हो सकता है।

सरकार यह प्रस्ताव इस मकसद से ला रही है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए हो। दूरसंचार विभाग DoT को सितंबर 2026 तक रिपोर्ट सबमिट कर यह बताने के लिए कहा गया है कि ऐसा कर पाना संभव है या नहीं? इस टैक्स का एक मकसद बच्चों और युवाओं में बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' को कम करना है।

सरकार एक ऐसा मॉडल बनाना चाह रही है जिससे पॉजिटिव डेटा कंजम्पशन बढ़े। इस टैक्स के जरिए सरकार इंटरनेट की लत और बढ़ते स्क्रीन-ऑन टाइम पर काबू पाना चाहती है। हालांकि यह देखना होगा कि सरकार शिक्षा और मनोरंजन के बीच डेटा के इस्तेमाल पर अंतर कैसे तय करेगी।

क्या ऐसा कर पाना मुमकिन है?
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि डेटा पर टैक्स लगा पाना न सिर्फ नामुमकिन है बल्कि यह देश में डिजिटल सेवाओं को बाधित भी कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार,(REF.) इससे डिजिटल इनोवेशन रुक जाएंगे और डिजिटल क्षेत्र में भारत की वैश्विक बढ़त खतरे में पड़ सकती है। गौर करने वाली बात है कि फिलहाल मोबाइल रिचार्ज पर 18% GST लगता है, ऐसे में डेटा पर अलग से कर लगाना यूजर्स के लिए दोहरी मार जैसा साबित हो सकता है।

अगर टैक्स लगा, तो होगी कितनी कमाई?
रिपोर्ट्स के अनुसार अब स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस के अलावा सरकार कमाई का नया तरीका तलाश रही है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत की मोबाइल डेटा खपत लगभग 229 अरब GB थी। ऐसे में अगर हर GB पर सरकार 1 रुपये का मामूली टैक्स भी लगाती है, तो इससे सरकार को सीधे 22,900 करोड़ रुपये का फायदा होगा। ऐसे में एक तर्क है कि यह रकम देश के विकास के काम आ सकती है, वहीं सच ये भी है कि इससे महंगे इंटरनेट का बोझ आम लोगों पर पड़ सकता है।

फिलहाल सरकार ने DoT से कहा है कि वह इस प्रस्ताव की पूरी स्टडी करे और इसके फायदे-नुकसान को समझे. रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार तय करेगी कि भारत में मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जाएगा या नहीं।

सराकर की तरफ से हालांकि अभी इसे लेकर कोई भी ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से रेडिट से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर सूत्रों के हवालें से ये खबर चल रही है। 

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