राजधानी से दूरस्थ जनजातीय अंचल नागलवाड़ी तक होने लगे हैं नीतिगत निर्णय

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल प्रशासन में उनके द्वारा मंत्रि-परिषद की बैठकों के आयोजन के लिए नवाचार करते हुए विभिन्न अंचलों में इन्हें करने की पहल की गई। विकास और जनकल्याण से जुड़े नीतिगत निर्णय सिर्फ मंत्रालय, भोपाल में ही नहीं प्रदेश के सुदूर अंचलों में भी लिए जाने लगे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में गत सवा 2 वर्ष में राजधानी भोपाल के अतिरिक्त कई स्थानों पर मंत्रि-परिषद बैठक किये जाने संबंधी नवाचार हुआ है। मध्यप्रदेश में किया गया ये नवाचार आम जनता द्वारा भी काफी सराहा गया है। भोपाल के साथ ही जबलपुर, दमोह, खरगौन, नर्मदापुरम्, छतरपुर और बड़वानी जिलों में मंत्रि- परिषद की बैठकें हो चुकी है। इन बैठकों में जनकल्याण से जुड़े बहुआयामी निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य कैबिनेट के साथ ही कृषि कैबिनेट भी प्रदेश के प्रत्येक अंचल में करने का निर्णय लिया है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कैबिनेट प्रस्तावित है।

जबलपुर और सिंग्रामपुर से हुई पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व ग्रहण करने के पश्चात सर्वप्रथम ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व के जीवन से नागरिकों को परिचित करवाने की पहल की जिनके बारे में प्रदेश के जन-जन को जानकारी होना चाहिए। स्वाधीनता संग्राम से लेकर प्रदेश के विकास में संलग्न रही ऐसी हस्तियों के जीवन और कार्यों से युवा पीढ़ी को परिचित करवाया जा रहा है जिससे वे प्रेरणा ग्रहण कर सकें। ऐसे प्रयासों में विभिन्न गौरवशाली व्यक्तित्व की स्मृति में कार्यक्रमों के आयोजन के साथ, भोपाल के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर मंत्रि-परिषद की बैठकों का आयोजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे पहले जबलपुर में हुई मंत्रि-परिषद बैठक से यह पहल प्रारंभ की।

राजधानी भोपाल के अलावा इन स्थानों पर हुईं बैठकें

मंत्रि-परिषद बैठक के आयोजन के लिए रानी दुर्गावती और देवी अहिल्याबाई की स्मृति से जुड़े स्थानों का भी ध्यान रखा गया। प्रदेश में ऐसे व्यक्तित्व चयनित किए गए जिनके शासन क्षेत्र और सेवा क्षेत्र के स्थानों पर बैठकों के आयोजन हों। इस कड़ी में ऐसे स्थानों में दमोह जिले का सिंग्रामपुर, खरगौन जिले का महेश्वर, नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी, छतरपुर जिले का खजुराहो और इंदौर का राजवाड़ा स्मारक आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जनजातीय संस्कृति के प्रमुख केंद्र बड़वानी जिले में मंत्रि-परिषद की बैठक का आयोजन किया। यह इस वर्ष की प्रथम कृषि कैबिनेट भी थी। प्रदेश के विभिन्न स्थानों से जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क का कार्य भी इससे आसान हुआ है। राजधानी में ही जन हित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते रहे हैं, इस नवाचार से अब प्रदेश के छोटे से ग्राम नागलवाड़ी से भी जन कल्याण के महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं।

स्थानों पर हुई मंत्रि-परिषद की बैठकों में लिए गए प्रमुख निर्णय

3 जनवरी 2024 : जबलपुर के शक्ति भवन में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के सम्मान में पुरस्कार शुरु करने का निर्णय। यह पुरस्कार विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर सफल होने वाली समाजसेवी महिलाओं को दिया जाता है। रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के प्रेरणादायी विषय स्कूल, कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत- अन्न-कोदो-कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा आदि के उत्पादक किसानों को प्रति किलो 10 रुपये की राशि खाते में करने का निर्णय। तेन्दूपत्ता संग्राहक दर में एक हजार रुपये प्रति बोरा की वृद्धि करते हुए इसे 4 हजार रुपये प्रति बोरा किया गया। ग्वालियर व्यापार मेले में मोटरयान कर दर पर 50 प्रतिशत छूट का निर्णय। प्रदेश में बुनियादी सिंचाई सुविधाएं विकसित करने के लिए दृष्टि से 32 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति।

5 अक्टूबर 2024 : दमोह जिले के सिंग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के सम्मान में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना में में 3900 रुपये प्रति हैक्टेयर अतिरिक्त सहायता राशि मंजूर। जबलपुर स्थित मदन महल पहाड़ी पर 100 करोड़ रुपये की लागत से रानी दुर्गावती स्मारक एवं उद्यान विकसित करने के लिए स्वीकृति।

24 जनवरी 2025 को लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी महेश्वर (जिला खरगौन) में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। प्रदेश में उज्जैन, महेश्वर, मैहर, ओरछा, अमरकंटक जैसे 19 नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा को प्रतिबंधित किए जाने की स्वीकृति। प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में वर्तमान में प्रचलित मुख्यमंत्री कृषक योजना के अंतर्गत सोलर कृषि पंप शामिल किए जाने की स्वीकृति। मध्यप्रदेश एनीमेशन, मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी नीति-2025 जारी किए जाने की मंजूरी। भोपाल में बावड़ियाकला चौराहा से ऑशिमा मॉल तक रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति। प्रदेश के 3 नए जिलों मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा जिला चिकित्सालय के संचालन के लिए 424 नवीन पदों की स्वीकृति।

20 मई 2025 : लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300 वें जयंती वर्ष पर इंदौर के राजवाड़ा में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में 3 हजार 867 करोड़ रुपये की योजना एवं निर्माण कार्यों की स्वीकृति। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना शुरु करने की मंजूरी। मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 को स्वीकृति करने का निर्णय। अधिनिय़म लागू होने के बाद महानगर योजना समिति एवं महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। इन्दौर, उज्जैन, देवास, धार एवं भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ब्यावरा (राजगढ़) महानगरीय क्षेत्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन कार्यक्रम की वित्तीय वर्ष 2028-29 तक निरंतरता की स्वीकृति। उज्जैन, पीथमपुर, मालनपुर घिरौंगी और मंडीदीप स्थित 4 औद्योगिक क्षेत्र में 249 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण की मंजूरी। ओंकरेश्वर में एकात्म धाम परियोजना अंतर्गत आचार्य शंकर संग्रहालय अद्वैत लोक के निर्माण के लिए 2195 करोड़ रुपये से अधिक की पुनरीक्षित स्वीकृति। महाराजा यशवंत राव चिकित्सालय परिसर इन्दौर और श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के उन्नयन के लिए 1095 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति।

3 जून 2025 : नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी के राजभवन में राजा भभूत सिंह के शौर्य को समर्पित मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। मध्यप्रदेश में एग्रीटेक हब/इनोवेशन हब फॉर एग्रीकल्चर, परियोजना की स्थापना का अनुमोदन। नर्मदापुरम जिले में मैसर्स केसर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक लि. द्वारा क्रियान्वित कम्पोजिट लॉजिस्टिक हब पवारखेड़ा परियोजना को मेसर्स डी.पी. वर्ल्ड मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक प्रा.लि. को हस्तांतरित किए जाने का निर्णय। प्रमुख राजस्व आय़ुक्त एवं आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालयों के पुनर्गठन की मंजूरी। श्रम कानूनों में सरलीकरण के लिए 3 श्रम कानूनों में संशोधन की अनुमति।

9 दिसंबर 2025 : छतरपुर जिले के खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में मंत्रि परिषद की बैठक आयोजित की गई। सागर जिले के मसवासी ग्रंट की स्थापना के प्रस्ताव के तहत उद्योगों को अनेक सुविधाओं की स्वीकृति। सागर से दमोह 76 किलोमीटर फोरलेन मार्ग निर्माण के लिए 2059 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति। दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स पदों की स्वीकृति। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को चीतों के रहवास के लिए विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति। दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ से अधिक की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना को स्वीकृति। प्रदेश के 11 जिलों में 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन और 348 पदों की स्वीकृति। प्रदेश में अग्निश्मन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 397.54 करोड़ रुपए की स्वीकृति। पिछड़ा वर्ग के 600 युवाओं को 2 वर्ष में रोजगार के लिए जापान और जर्मनी भेजने का निर्णय।

2 मार्च 2026 : बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसान कल्याण के लिए 25 हजार 678 करोड़ रुपए की योजनाओं को स्वीकृति। बड़वानी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2068 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति। प्रदेश में प्रत्येक अंचल में कृषि कैबिनेट करने का निर्णय। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 की स्वीकृति। पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपए की स्वीकृति। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपए की स्वीकृति। राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन को आगामी 5 वर्षों की निरंतता के लिए 1150 करोड़ रुपए की स्वीकृति। सूक्ष्म खाद्य उद्यम उननयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रुपए की स्वीकृति। पौधशाला उद्यान के लिए 1 हजार 739 करोड़ रूपए की स्वीकृति। किसान कल्याण एवं कृषि विकास की 20 परियोजनाओं के लिए 3 हजार 52 करोड़ रुपए की स्वीकृति। "सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता" योजना के लिए 1 हजार 975 करोड़ रुपए की स्वीकृति। कृषकों को अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3 हजार 909 करोड़ रुपए की स्वीकृति। सहकारिता की विभिन्न योजनाओं के लिए 1,229 करोड़ रुपए की स्वीकृति। पशुधन विकास के लिए 656 करोड़ रुपए की स्वीकृति। पशु स्वास्थ्य रक्षा तथा पशु संवर्धन एवं संरक्षण के लिए 1723 करोड़ रुपए की स्वीकृति। पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की 11 योजनाओं के लिए 6 करोड़ 518 करोड़ रुपए की स्वीकृति। बड़वानी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए 2067.97 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति।

 

 

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