योगी सरकार ने 9 साल में श्रमिकों के विकास की दिशा बदली, करोड़ों श्रमिकों को मिली ताकत

योगी सरकार ने 9 वर्षों में श्रमिकों के उत्थान की लिखी नई इबारत, प्रदेश के करोड़ों श्रमिकों को मिला संबल

योगी सरकार ने “श्रमेव जयते” की भावना को किया साकार, पिछले 9 वर्षों में प्रदेश के श्रमिक हुए सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त

ई-श्रम पोर्टल पर 8.42 करोड़ पंजीकरण कर यूपी बना देश में प्रथम, योगी सरकार के 9 वर्षों में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के हुए बहुआयामी प्रयास

योगी सरकार के 9 वर्षों में 13,148 रोजगार मेलों का आयोजन, 15.96 लाख से अधिक युवाओं को मिले नौकरी के अवसर 

पीएम श्रमयोगी मानधन योजना के तहत 7,04,865 श्रमिकों का हुआ पंजीकरण, अटल पेंशन योजना के माध्यम से 93 लाख से अधिक लोग लाभान्वित

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते 9 वर्षों में श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्र में व्यापक एवं बहुआयामी प्रयास किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “श्रमेव जयते” की भावना को केंद्र में रखते हुए संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, निर्माण श्रमिकों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं, जिनके सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक संबल प्राप्त हुआ। यही नहीं, वर्तमान में प्रदेश के नव निर्माण के आधार श्रमिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को साकार करने की दिशा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व के 9 वर्षों में प्रदेश में श्रमिकों के सशक्तीकरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में यूपी का देश में प्रथम स्थान पर पहुंचना रहा। इसके तहत यूपी में ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 8.42 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है। ई-श्रम पोर्टल न केवल श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करता है, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का भी आधार बनता है। इसके साथ ही प्रदेश में 9.52 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जनधन खाते खोले गए हैं, जिससे उन्हें सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करना संभव हुआ है।

प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने “उ.प्र. रोजगार मिशन” का गठन किया, जिसके तहत युवाओं को देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रोजगार मिशन के तहत प्रदेश के 5,978 से अधिक निर्माण श्रमिकों को विदेश (इज़राइल) में रोजगार दिलाया गया है। वहीं, सेवामित्र पोर्टल पर 59,602 कुशल श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी किया गया है। इसी क्रम में निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए आयोजित 13,148 रोजगार मेलों के माध्यम से 15.96 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी के अवसर मिले हैं। इसके अतिरिक्त 28,621 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों के जरिए 32 लाख से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान किया गया है। सरकार का उद्देश्य न केवल रोजगार देना है, बल्कि युवाओं को कौशल प्रशिक्षण व अन्य सहयोग प्रदान कर स्वरोजगार के लिए भी सक्षम बनाना है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में श्रमिकों को सामाजिक एवं जीवन सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं। इस क्रम में पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने की स्थिति में ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु की स्थिति में ₹2 लाख की सहायता दी जा रही है। यही नहीं, अपंजीकृत असंगठित श्रमिकों के लिए भी सरकार ने सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में ₹2 लाख, जबकि आंशिक विकलांगता की स्थिति में ₹1 लाख की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा विकलांगता की स्थिति में ₹2 लाख से ₹4 लाख तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। वहीं कार्यस्थल पर मृत्यु हो जाने की स्थिति में ₹5 लाख की सहायता और अंतिम संस्कार हेतु ₹25,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया है।

योगी सरकार की ओर से श्रमिक परिवार के सदस्यों के सामाजिक कल्याण की दिशा में भी कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनके तहत पंजीकृत श्रमिकों की पुत्रियों के विवाह हेतु ₹55,000 तक की सहायता, अंतरजातीय विवाह पर ₹61,000 की सहायता देने का प्रावधान है। वहीं मातृत्व, शिशु एवं बालिका सहायता योजना के अंतर्गत 6 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं, बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत निराश्रित और गंभीर रूप से बीमार कामकाजी बच्चों को प्रति माह ₹1,000 (बालक) और ₹1,200 (बालिका) की सहायता दी जा रही है। साथ ही श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और उद्देश्यपरक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम श्रमिक तकनीकी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से उन्हें तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रदेश के श्रमिकों को आवासीय सुविधा और जीवन स्तर में सुधार के लिए भी पिछले 9 वर्षों में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सफाई कर्मियों को निःशुल्क आवास देने की प्रक्रिया जारी है, जबकि निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता योजना के तहत बैंकों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही श्रमिकों के लिए श्रम अड्डों के निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है। वहीं पीएम श्रमयोगी मानधन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 7,04,865  श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना के तहत 16,457 छोटे व्यापारियों को जोड़ा गया है। अटल पेंशन योजना के माध्यम से प्रदेश में अब तक 93 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त 7 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों को राशन कार्ड और फैमिली आईडी प्रदान कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया गया है। यही नहीं, योगी सरकार के 9 वर्षों में श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने, उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए व्यापक और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों ने न केवल श्रमिकों को सशक्त बनाया है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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