शाह की कड़ी चेतावनी: गलत इरादे से भारत आए तो US-यूक्रेनी नागरिकों को नहीं बख्शेंगे

नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  स्पष्ट किया कि हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिकों से भारत को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि ये लोग आतंकी प्रशिक्षण के लिए भारत का इस्तेमाल केवल म्यांमार पहुंचने के एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में कर रहे थे।

विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और उनकी मंशा
हाल ही में NIA ने कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से एक समूह को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री ने बताया कि यह समूह मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाने की फिराक में था। म्यांमार में मौजूद विद्रोही गुटों के शिविरों का इस्तेमाल यूक्रेनी नागरिकों को आतंकी प्रशिक्षण देने के लिए किया जाना था।

कैसे पकड़े गए?
विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश करने के लिए 'एडवांस परमिट' (अग्रिम अनुमति) की आवश्यकता होती है। इन लोगों ने यह परमिट नहीं लिया था, जिसके कारण ये सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में आ गए।

भारत सरकार का कड़ा रुख
यह पहली बार है जब सरकार के किसी शीर्ष अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि इस समूह का मुख्य लक्ष्य म्यांमार था और भारत महज उनके रास्ते का एक पड़ाव था। अमित शाह ने कहा- इनसे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। लेकिन हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कोई भी विदेशी नागरिक किसी भी गलत काम या इरादे से भारत आता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की रिमांड 10 दिन और बढ़ाई
इस बीच नई दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार के हथियारबंद गुटों और प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों को कथित तौर पर हथियार, ड्रोन और ट्रेनिंग मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार 7 विदेशी नागरिकों की कस्टडी 10 दिनों के लिए बढ़ा दी है। जांच एजेंसी एनआईए ने कुल 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 3 यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से, 3 लखनऊ से और 1 अमेरिकी नागरिक कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के नाम हैं।

    मैथ्यू आरोन वान डाइक (अमेरिकी नागरिक)
    हुरबा पेट्रो (यूक्रेनी नागरिक)
    सिल्वियाक तारास (यूक्रेनी नागरिक)
    इवान सुकमानोवस्की (यूक्रेनी नागरिक)
    स्टीफंकिव मैरियन (यूक्रेनी नागरिक)

    होनचारुक मक्सिम (यूक्रेनी नागरिक)
    कामिन्स्की विक्टर (यूक्रेनी नागरिक)

क्या हैं मुख्य आरोप?
जांच एजेंसी का आरोप है कि ये विदेशी नागरिक वैध वीजा पर भारत आए और फिर संरक्षित क्षेत्र 'मिजोरम' में प्रवेश कर गए। वहां से उन्होंने म्यांमार में घुसपैठ की और जातीय विद्रोही गुटों से संपर्क साधा। इन पर आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में ट्रेनिंग ली और फिर वहां के विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दी। ये गुट भारत के प्रतिबंधित विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। साथ ही, आरोप है कि वे भारत के रास्ते यूरोप से भारी मात्रा में 'ड्रोन' की खेप लेकर आए थे। इन पर आतंकी हार्डवेयर, हथियार सप्लाई करने और एके-47 (AK-47) राइफल ले जाने वाले अज्ञात आतंकवादियों से सीधे संपर्क में होने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ यूएपीए (UAPA) की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अदालत में हुई सुनवाई और दलीलें
सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए, विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष इन आरोपियों को एनआईए मुख्यालय में ही पेश किया गया। जांच एजेंसी ने अदालत से 10 दिन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग करते हुए बताया कि मामले की पूछताछ के दौरान कुछ और संदिग्ध भारतीयों और विदेशियों के नाम सामने आए हैं। उनके आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इन पहलुओं की गहराई से जांच के लिए रिमांड की आवश्यकता है।

इससे पहले 11 दिन की रिमांड देते हुए अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एफआईआर में राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराधों का कोई जिक्र न हो। यानी इस मामले में सीधे तौर पर यूएपीए की धारा 18 लागू होती है। एनआईए की दलीलों से सहमत होते हुए जज प्रशांत शर्मा ने सातों आरोपियों की कस्टडी 10 दिन और बढ़ा दी है।

नक्सलवाद के खात्मे पर सरकार की रणनीति
जब गृह मंत्री से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च, 2026 की समय सीमा के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि यह हार या जीत का विषय नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य हमलों और बम विस्फोटों पर पूरी तरह से रोक लगाना है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद पर काफी हद तक लगाम लगाई गई है। अब तिरुपति-पशुपतिनाथ कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले सभी आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुंच रहे हैं।

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