इंदौर के चौराहे पर 23 मीटर की ऊंचाई पर लटका 400 टन लोहा, इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल

इंदौर
 
इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर के निर्माण में एक अहम उपलब्धि हासिल की गई है। यहां शहर की सबसे लंबी 65 मीटर की स्टील गर्डर को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। करीब 400 टन वजनी इस विशाल गर्डर को जमीन से 23 मीटर ऊंचाई पर लगाने की जटिल प्रक्रिया करीब 12 घंटे तक चली। इस गर्डर के जुड़ने से शहर में यातायात को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। 

तीन विंच मशीनों की मदद से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण काम
लवकुश चौराहे पर बो स्ट्रिंग स्पान के निर्माण के दौरान इस भारी गर्डर को हवा में ही जोड़ा गया। इसे सही जगह तक लाने के लिए तीन विंच मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से दो मशीनों से गर्डर को आगे की ओर खींचा गया, जबकि एक मशीन को पीछे से संतुलन बनाए रखने और रोकने के लिए लगाया गया था। अब जैक पुश तकनीक के जरिए इसे दूसरी तरफ के बो स्ट्रिंग स्पान पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। पहली गर्डर का काम पूरा होने के बाद अब दूसरी स्टील गर्डर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इंदौर विकास प्राधिकरण बना रहा भव्य फ्लाईओवर
इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा लवकुश चौराहे पर कुल 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जा रहा है। इस परियोजना में 19 सेगमेंटल स्पान, 4 कंपोजिट गर्डर स्पान और एक खास बो स्ट्रिंग स्पान शामिल है। जिस बो स्ट्रिंग स्पान पर यह गर्डर रखी गई है, उसकी लंबाई 65 मीटर है और यहां ऐसी दो स्टील गर्डर लगाई जानी हैं। पहली गर्डर का निर्माण कार्य पूरा कर उसे तय स्थान पर स्थापित कर दिया गया है।

रात भर चली गर्डर लगाने की प्रक्रिया
गर्डर को स्थापित करने की प्रक्रिया गुरुवार रात 11 बजे शुरू हुई, जो शुक्रवार सुबह 11 बजे पूरी हुई। गर्डर को खींचकर सही जगह तक लाने में ही करीब 5 घंटे लगे। पुलिंग शुरू करने से पहले गर्डर को रीले पर चढ़ाया गया और उसके संतुलन की पूरी जांच की गई। सुरक्षा के लिहाज से इस दौरान नीचे से गुजरने वाले यातायात को पूरी तरह बंद कर दिया गया, ताकि कोई हादसा न हो।

शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर पॉइंट बना आकर्षण
यह 400 टन वजनी गर्डर जिस बो स्ट्रिंग पर रखी गई है, उसकी ऊंचाई 23 मीटर है, जो इंदौर के सभी फ्लाईओवर में सबसे ज्यादा है। इस फ्लाईओवर की खास बात यह है कि इसके नीचे से मेट्रो और एक अन्य फ्लाईओवर गुजर रहा है। इसी वजह से गर्डर को ऊंचाई पर ही जोड़ना पड़ा। इस जटिल काम के लिए 900 टन की कुल क्षमता वाली दो क्रेन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन की क्रेन शामिल थी। इन्हीं क्रेन की मदद से भारी एंगल और निर्माण सामग्री को 23 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचाया गया। 

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