माँ नर्मदा के आशीर्वाद से प्रदेश में बह रही है विकास की नई धारा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा है और उनके आशीर्वाद से मध्यप्रदेश में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भी होलकर साम्राज्य ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से कठिन परिस्थितियों में सनातन संस्कृति को सशक्त बनाए रखा और देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर घाट, धर्मशालाएं एवं अन्नक्षेत्र विकसित किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा परियोजनाओं को नई गति मिली है। सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से गुजरात, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र सहित व्यापक भू-भाग में जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे कृषि, उद्योग एवं पेयजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर में आयोजित नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर शहर को पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिये मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के तहत अमृत 2.0 योजना में 1356 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन । इससे शहर की पेयजल आपूर्ति संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और नागरिकों को बेहतर जलापूर्ति सुविधाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री इंदौर के रामसर साइट सिरपुर में 62.72 करोड़ रूपये लागत से निर्मित एसटीपी प्लांट का लोकार्पण भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकल्प से समाधान अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर संचालित किए गए इस संकल्प से समाधान अभियान के तहत इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “संकल्प से समाधान” अभियान में इंदौर जिले में एक लाख 44 हजार 912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया है। यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रभावी रूप से संचालित हुआ। प्रदेश में अब “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग पौने तीन लाख कुएं, बावड़ी, तालाब एवं नहरों का निर्माण एवं जल संरचनाओं पुनर्जीवित किया जाएगा। यह अभियान गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हो गया है, जो गंगा दशमी तक जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के 25 जिलों को लाभ मिलेगा, वहीं पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना से मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के 13 जिलों में सिंचाई एवं पेयजल की सुविधाएं सुदृढ़ होंगी। उन्होंने शिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालु शिप्रा के स्वच्छ जल में स्नान कर सकेंगे। इसके लिए बड़े पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण एवं निरंतर जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कान्ह नदी के जल को शुद्ध कर कृषि कार्यों में उपयोग हेतु उपलब्ध कराया जाएगा। प्रत्येक बूंद जल के संरक्षण के माध्यम से प्रदेश को समृद्ध बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे इंदौर शहर के लिए आगामी 25 वर्षों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई गई है, जिससे क्षेत्र में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो रहा है। आने वाले समय में यह क्षेत्र लगभग डेढ़ करोड़ की आबादी के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनेगा।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज का दिन इंदौर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। यह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वर्णिम भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2040 तक इंदौर की अनुमानित 65 लाख जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की अग्रिम तैयारी करना नगर निगम की दूरदर्शिता का प्रतीक है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा परियोजना का इतिहास संघर्ष और संकल्प से भरा हुआ है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के उस ऐतिहासिक क्षण को याद किया जब नर्मदा परियोजना के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था। उस समय वैज्ञानिकों ने इंदौर तक नर्मदा जल लाने की चुनौती को असंभव बताया था, लेकिन इंजीनियर्स और विशेषज्ञों के प्रयासों से यह संभव हो सका। यह देश की एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल अत्यंत मूल्यवान है और इसे व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। जल संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और इसका सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इंदौर के सतत विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शहरवासियों को 1356 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण जल परियोजना की सौगात पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह योजना इंदौर के विकास और भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसका लक्ष्य लगभग 900 एमएलडी जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। मंत्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल संसाधनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। पिछले लगभग दो वर्षों में करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विस्तार किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है, जिसे अगले एक वर्ष में बढ़ाकर लगभग 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028-29 तक राज्य में 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रदेश के कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को इंदौर के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल वर्तमान, बल्कि भविष्य के इंदौर की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि इसी स्थान पर उन्होंने नर्मदा परियोजना के पहले चरण का लोकार्पण किया था, जिसने इंदौर को नई गति दी। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण के माध्यम से आज करीब 450 एमएलडी पानी इंदौर पहुंच रहा है, जिससे 35 लाख से अधिक आबादी को जलापूर्ति हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिषद के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अमृत-2 योजना के तहत प्रारंभिक 1100 करोड़ रुपये की परियोजना को बढ़ाकर 2600 करोड़ रुपये का व्यापक स्वरूप दिया गया। इस योजना के माध्यम से वर्ष 2045 तक इंदौर की जल आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चौथे चरण के पूर्ण होने पर वर्ष 2029 तक 900 एमएलडी पानी इंदौर पहुंचेगा, जिससे लगभग 65 लाख नागरिकों को जलापूर्ति सुनिश्चित होगी। यह योजना शहर के औद्योगिक विकास और “हरित इंदौर” के विजन को भी सशक्त बनाएगी। सीवरेज प्रबंधन के संबंध में महापौर भार्गव ने बताया कि सिरपुर तालाब (रामसर साइट) में प्रदूषण रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो चुका है, जिसका लोकार्पण भी आज किया गया है।

कार्यक्रम को विधायक श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ तथा सुमित मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक रमेश मेंदोला, महेन्द्र हार्डिया, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, सुउषा ठाकुर, मनोज पटेल, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, श्रवण चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल विशेष रूप से मौजूद थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 1356 करोड रुपए के पेयजल आपूर्ति संबंधी कार्यों का भूमि पूजन किया। इन कार्यों में पैकेज-एक के अंतर्गत 1650 एमएलडी इंटेक, 400 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट, पंपिंग स्टेशन एवं आधुनिक जल इंफ्रास्ट्रक्चर, पैकेज-2 के अंतर्गत 39 किलोमीटर ग्रेविटी पाइपलाइन, 2870 मीटर लंबी टनल एवं क्लोरिनेशन प्लांट, पैकेज-3 के अंतर्गत 20 नए ओवर हैड टैंक, 29 पुराने टैंकों का उन्नयन, 685 किलोमीटर पाइपलाइन और 1.26 लाख नवीन कनेक्शन तथा पैकेज-4 के अंतर्गत 20 नए ओवर हेड टैंक, 46 पुराने टैंको का उन्नयन, 892 किलोमीटर पाइपलाइन और 1.21 लाख नवीन कनेक्शन देने के कार्य शामिल है।

दशहरा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा विकासात्मक गतिविधियों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के पवित्र जल का अर्पण भी किया और उपस्थित साधू-संतों से आर्शीवाद प्राप्त किया। 

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